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धर्म के नाम पर किसी भी तरह की हिंसा स्वीकार्य नहीं: मदनी
देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि धर्म के नाम पर किसी भी तरह की हिंसा स्वीकार्य नहीं हो सकती। क्योंकि धर्म मानवता, सहिष्णुता और प्रेम का संदेश देता है इसलिए जो लोग इसका प्रयोग नफरत और हिंसा के लिए करते हैं वह अपने धर्म के सच्चे अनुयायी नहीं हो सकते हैं। ऐसे लोगों की जितनी निंदा की जाए कम है।
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शनिवार को एक बयान में मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि घृणा और सांप्रदायिकता का एक बड़ा कारण यह भी है कि अधिकतर राजनेताओं में नफरत को बढ़ावा देकर सत्ता प्राप्त करने की इच्छा तीव्र हो गई है। जिसके कारण सांप्रदायिकता और धार्मिक अतिवाद में असाधारण वृद्धि हुई है। मौलाना मदनी ने स्पष्ट किया कि हमारा विरोध और हमारी लड़ाई किसी राजनीतिक दल से नहीं, केवल उन शक्तियों से है जिन्होंने देश के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को रौंद कर अत्याचार और आक्रामकता का रास्ता अपना लिया है। मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान अल्पसंख्यकों विशेषकर मुसलमानों के साथ जो कुछ होता आ रहा है यहां दोहराने की जरूरत नहीं है। हिजाब को लेकर मौलाना मदनी ने कहा कि कुछ तथाकथित पढ़े-लिखे लोग गलत धारणा बना रहे हैं कि इस्लाम में हिजाब की पाबंदी नहीं है और कुरान में हिजाब का जिक्र नहीं है, जबकि ऐसा नहीं है। पवित्र कुरान और हदीस में हिजाब पर इस्लामी दिशा निर्देश हैं की शरीयत के अनुसार हिजाब अनिवार्य है। जहां तक संवैधानिक मुद्दे का सवाल है तो संविधान के अनुच्छेद-25 के तहत अल्पसंख्यकों को जो इख्तेयार (हक) हासिल है उसके कारण मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनने से रोकना अनुच्छेद-25 का उल्लंघन है।
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