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शुक्रताल में वसंत पंचमी पर्व मनाया
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 02 Feb 2017 01:01 AM IST
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सरस्वती पूजन करते संत और छात्र।
- फोटो : अमर उजाला
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मोरना में वसंत पंचमी पर्व पर आयोजित कार्यक्रम में स्वामी ओमानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि मां सरस्वती की आराधना से मनुष्य के मन, बुद्धि, वाणी और वातावरण पवित्र होता है। सरस्वती मां साहित्य, संगीत, कला एवं ज्ञान की देवी हैं। इसकी पूजा अर्चना करने से बुद्धि और ज्ञान का वरदान मिलता है। कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूजा अर्चना कर विद्यार्थियों को प्रसाद बांटा गया।
शुक्रताल स्थित शुकदेव आश्रम के श्री शुकदेव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण में स्वामी ने कहा कि सरस्वती को कई नामों से जाना जाता है। स्वर्ग, पृथ्वी और अंतरिक्ष में इनका वास होता है। पृथ्वी पर सरस्वती, स्वर्ग में भारती और अंतरिक्ष में इला के नाम से विख्यात है। पुराणों के अनुसार मां सरस्वती ब्रह्मा की पुत्री हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में मां बागेश्वरी सरस्वती का पूजन किया था। उनके अनुसार माघ माह शुक्ल में पंचमी के दिन श्वेत पुष्प, अक्षत सफेद वस्त्र, तिल, दूध, दही मकखन, नारियल, सफेद चंदन आदि से पूजा अर्चना करने से मनोकामना पूर्ण होती है। इस मौके पर प्राचार्य ज्ञान प्रसाद के सानिध्य में आचार्य श्याम शास्त्री, अचल शास्त्री, कृष्ण शास्त्री, प्रदीप शास्त्री, राजू आदि ने वैदिक मंत्रोच्चारण से पूजा-अर्चना की।
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शुक्रताल स्थित शुकदेव आश्रम के श्री शुकदेव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण में स्वामी ने कहा कि सरस्वती को कई नामों से जाना जाता है। स्वर्ग, पृथ्वी और अंतरिक्ष में इनका वास होता है। पृथ्वी पर सरस्वती, स्वर्ग में भारती और अंतरिक्ष में इला के नाम से विख्यात है। पुराणों के अनुसार मां सरस्वती ब्रह्मा की पुत्री हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में मां बागेश्वरी सरस्वती का पूजन किया था। उनके अनुसार माघ माह शुक्ल में पंचमी के दिन श्वेत पुष्प, अक्षत सफेद वस्त्र, तिल, दूध, दही मकखन, नारियल, सफेद चंदन आदि से पूजा अर्चना करने से मनोकामना पूर्ण होती है। इस मौके पर प्राचार्य ज्ञान प्रसाद के सानिध्य में आचार्य श्याम शास्त्री, अचल शास्त्री, कृष्ण शास्त्री, प्रदीप शास्त्री, राजू आदि ने वैदिक मंत्रोच्चारण से पूजा-अर्चना की।
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