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Muzaffarnagar News: टिकैत का नड्डा से सवाल, कंगना रनौत पर निशाना
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-बोले, कब तक अपमानित होते रहें अन्नदाता
फोटो
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर अभिनेत्री एवं सांसद कंगना रनौत पर निशाना साधा। उन्होंने पूछा कि आपकी और पार्टी की क्या मजबूरी रही होगी जो 2024 में हिमाचल की मंडी सीट से ऐसी प्रत्याशी को चुनाव लड़ाया, जिसे देश के बारे में ज्ञान नहीं है। वह बार-बार देश के खेत उपजाऊ वर्ग को अपना निशाना बना रही है।
भाकियू प्रवक्ता ने शनिवार को पत्र भेजा, जिसमें लिखा कि उन्होंने दिसंबर 2020 में महिलाओं पर पैसे लेकर धरने पर बैठने जैसे आरोप लगाए थे। यह वही ग्रामीण महिलाएं हैं, जो ग्रामीण पगडंडियों से देश की आर्थिक स्थिति में एक अहम भूमिका निभाती हैं। दुग्ध उत्पादकता में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका इन्हीं की रहती है।
फरवरी 2021 में देश के किसान को आतंकवादी बताने का काम किया गया। यह वही वर्ग है, जिन्होंने कोरोना जैसी महामारी के समय देश की जीडीपी में अपना योगदान निभाया और देश के प्रत्येक वर्ग को भूखा नहीं सोने दिया।
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24 सितंबर को फिर विवादित बयान दिया कि तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को फिर से लागू किया जाना चाहिए। देश में 13 माह चले आंदोलन में दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे रहे किसानों और इनकों रद्द कराने में अपनी जान का बलिदान देने वाले 750 शहीद किसानों को अपमानित करने का कार्य किया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर अभिनेत्री एवं सांसद कंगना रनौत पर निशाना साधा। उन्होंने पूछा कि आपकी और पार्टी की क्या मजबूरी रही होगी जो 2024 में हिमाचल की मंडी सीट से ऐसी प्रत्याशी को चुनाव लड़ाया, जिसे देश के बारे में ज्ञान नहीं है। वह बार-बार देश के खेत उपजाऊ वर्ग को अपना निशाना बना रही है।
भाकियू प्रवक्ता ने शनिवार को पत्र भेजा, जिसमें लिखा कि उन्होंने दिसंबर 2020 में महिलाओं पर पैसे लेकर धरने पर बैठने जैसे आरोप लगाए थे। यह वही ग्रामीण महिलाएं हैं, जो ग्रामीण पगडंडियों से देश की आर्थिक स्थिति में एक अहम भूमिका निभाती हैं। दुग्ध उत्पादकता में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका इन्हीं की रहती है।
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फरवरी 2021 में देश के किसान को आतंकवादी बताने का काम किया गया। यह वही वर्ग है, जिन्होंने कोरोना जैसी महामारी के समय देश की जीडीपी में अपना योगदान निभाया और देश के प्रत्येक वर्ग को भूखा नहीं सोने दिया।
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24 सितंबर को फिर विवादित बयान दिया कि तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को फिर से लागू किया जाना चाहिए। देश में 13 माह चले आंदोलन में दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे रहे किसानों और इनकों रद्द कराने में अपनी जान का बलिदान देने वाले 750 शहीद किसानों को अपमानित करने का कार्य किया है।