{"_id":"5ef234848ebc3e42d834846f","slug":"this-time-shraddha-will-not-be-flooded-in-the-spring-muzaffarnagar-news-mrt487842223","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस बार सावन में नहीं उमड़ेगा श्रद्धा का सैलाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस बार सावन में नहीं उमड़ेगा श्रद्धा का सैलाब
विज्ञापन
शुकतीर्थ के फिरोजपुर गांव का नीलकंठ महादेव मंदिर।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस बार सावन में नहीं उमड़ेगा श्रद्धा का सैलाब
मुजफ्फरनगर, भोपा। कोरोना संकट का असर आस्था पर भी पड़ेगा। कांवड़ यात्रा कोरोना के चलते स्थगित कर दी गई है। शिव भक्तों में इसे लेकर मायूसी तो है, लेकिन कोरोना के चलते ये मजबूरी भी है। कांवड़ यात्रा पांच से 17 जुलाई तक चलने वाली थी।
हर साल कांवड़ यात्रा में भोपा नहर पटरी से लाखों कांवड़िए गुजरते हैं। 10 दिन तक यह मार्ग कांवड़ियों के केसरिया रंग में रंगा नजर आता है। क्षेत्र के दो प्रसिद्ध शिव मंदिर हैं जिनमें हजारों शिवभक्त हरिद्वार, ऋषिकेश आदि से गंगाजल लाकर जलाभिषेक करते हैं। गंगा खादर क्षेत्र के गांव फिरोजपुर में प्राचीन सिद्धपीठ नीलकंठ महादेव मंदिर है। यह मंदिर मराठा काल से जुड़ा है। मंदिर में प्राचीन शिवलिंग स्थापित है। भोपा-मोरना मार्ग स्थित ककराला के जुड़ेश्वर महादेव मंदिर की भी अलग ही मान्यता है। यहां श्रावण में शिवरात्रि के निकट मेले का आयोजन किया जाता है। भारी संख्या में कांवड़िए यहां कांवड़ चढ़ाते हैं। फिरोजपुर मंदिर के अध्यक्ष अनुज कुमार, कैलाश चंद, ग्राम प्रधान नेमपाल व ककराला स्थित मंदिर के सोनवीर सिंह का कहना है कि शिवरात्रि पर जो भी सरकार की गाइडलाइन होगी उसका पालन किया जाएगा। उन्होंने शिव भक्तों से अनुरोध किया है कि वे भी सरकार के आदेश का पालन करें।
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर, भोपा। कोरोना संकट का असर आस्था पर भी पड़ेगा। कांवड़ यात्रा कोरोना के चलते स्थगित कर दी गई है। शिव भक्तों में इसे लेकर मायूसी तो है, लेकिन कोरोना के चलते ये मजबूरी भी है। कांवड़ यात्रा पांच से 17 जुलाई तक चलने वाली थी।
हर साल कांवड़ यात्रा में भोपा नहर पटरी से लाखों कांवड़िए गुजरते हैं। 10 दिन तक यह मार्ग कांवड़ियों के केसरिया रंग में रंगा नजर आता है। क्षेत्र के दो प्रसिद्ध शिव मंदिर हैं जिनमें हजारों शिवभक्त हरिद्वार, ऋषिकेश आदि से गंगाजल लाकर जलाभिषेक करते हैं। गंगा खादर क्षेत्र के गांव फिरोजपुर में प्राचीन सिद्धपीठ नीलकंठ महादेव मंदिर है। यह मंदिर मराठा काल से जुड़ा है। मंदिर में प्राचीन शिवलिंग स्थापित है। भोपा-मोरना मार्ग स्थित ककराला के जुड़ेश्वर महादेव मंदिर की भी अलग ही मान्यता है। यहां श्रावण में शिवरात्रि के निकट मेले का आयोजन किया जाता है। भारी संख्या में कांवड़िए यहां कांवड़ चढ़ाते हैं। फिरोजपुर मंदिर के अध्यक्ष अनुज कुमार, कैलाश चंद, ग्राम प्रधान नेमपाल व ककराला स्थित मंदिर के सोनवीर सिंह का कहना है कि शिवरात्रि पर जो भी सरकार की गाइडलाइन होगी उसका पालन किया जाएगा। उन्होंने शिव भक्तों से अनुरोध किया है कि वे भी सरकार के आदेश का पालन करें।

भोपा मोरना मार्ग स्थित ककराला का जुड़े श्वर महादेव मंदिर।- फोटो : MUZAFFARNAGAR
विज्ञापन