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Muzaffarnagar News: 105 सालों से चल रही अनुष्ठान की रामलीला 19 सितंबर से होगी शुरू
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मुजफ्फरनगर। शहर के टाउन हॉल में 19 सितंबर से श्रीरामलीला सभा के तत्वाधान में रामलीला मंचन 105 वर्ष पुरानी पंरपरा के साथ ही शुरू होगा। राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का किरदार निभाने वाले पात्र जहां 18 वर्ष की आयु के कलाकार होंगे वहीं ताड़का का अभिनय करने के लिए बाहर से आएंगे।
टाउन हॉल परिसर में एक माह से रामलीला मंचन की तैयारी चल रही है। रामलीला 19 सितंबर से गणेश पूजन और नारद मंचन के साथ शुरू होगी। 2 अक्तूबर को रामलीला टिल्ला मैदान में रावण और कुंभकरण के पुतलों का दहन होगा। 3 अक्तूबर को राम के राज्यभिषेक के साथ रामलीला का समापन होगा।
1920 में शुरू हुई थी अनुष्ठान की रामलीला
संरक्षक एवं मुख्य निर्देशक साधुराम गर्ग ने बताया कि नियमों का अनुसरण करने वाली अनुष्ठान की रामलीला पूरे भारत में लगभग 20 जगहों पर होती थी। मुजफ्फरनगर भी उन्हीं मे से एक है। वर्ष 1920 में आलू मंडी में अनुष्ठान की रामलीला वाराणसी के आचार्य भीमसेन वेदपाठ ने कराई थी। दर्शकों की बढ़ती संख्या के चलते 1975 में टाउन हाल में रामलीला मंचन की शुरुआत हुई थी। इसमें सभी पात्रों को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अभिनय की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। अभ्यास से लेकर रामलीला समाप्त होने तक सभी पात्र एक स्थान पर पूरे नियमों के साथ रहते हैं।
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अनवरत चलता है रामायण का पाठ
रामलीला सभा के अध्यक्ष शिवचरण दास गर्ग ने बताया कि रामलीला के दौरान रामलीला का पाठ चलता रहता है। पात्रों के अभिनय को भावों से भरने के लिए रामायण की चौपाइयों को मीठी और ओज वाणी में गाया जाता है। प्रेम, करुणा, ममता, रुदन के भाव जहां वाणी व्यक्त करती है, वहीं पात्र का अभिनय चौपाइयों के अर्थ दर्शकों तक पहुंचाता है।
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टाउन हॉल परिसर में एक माह से रामलीला मंचन की तैयारी चल रही है। रामलीला 19 सितंबर से गणेश पूजन और नारद मंचन के साथ शुरू होगी। 2 अक्तूबर को रामलीला टिल्ला मैदान में रावण और कुंभकरण के पुतलों का दहन होगा। 3 अक्तूबर को राम के राज्यभिषेक के साथ रामलीला का समापन होगा।
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1920 में शुरू हुई थी अनुष्ठान की रामलीला
संरक्षक एवं मुख्य निर्देशक साधुराम गर्ग ने बताया कि नियमों का अनुसरण करने वाली अनुष्ठान की रामलीला पूरे भारत में लगभग 20 जगहों पर होती थी। मुजफ्फरनगर भी उन्हीं मे से एक है। वर्ष 1920 में आलू मंडी में अनुष्ठान की रामलीला वाराणसी के आचार्य भीमसेन वेदपाठ ने कराई थी। दर्शकों की बढ़ती संख्या के चलते 1975 में टाउन हाल में रामलीला मंचन की शुरुआत हुई थी। इसमें सभी पात्रों को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अभिनय की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। अभ्यास से लेकर रामलीला समाप्त होने तक सभी पात्र एक स्थान पर पूरे नियमों के साथ रहते हैं।
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अनवरत चलता है रामायण का पाठ
रामलीला सभा के अध्यक्ष शिवचरण दास गर्ग ने बताया कि रामलीला के दौरान रामलीला का पाठ चलता रहता है। पात्रों के अभिनय को भावों से भरने के लिए रामायण की चौपाइयों को मीठी और ओज वाणी में गाया जाता है। प्रेम, करुणा, ममता, रुदन के भाव जहां वाणी व्यक्त करती है, वहीं पात्र का अभिनय चौपाइयों के अर्थ दर्शकों तक पहुंचाता है।