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कोल्हुओं पर गन्ना डालने से कतरा रहा किसान
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 05 Dec 2016 12:04 AM IST
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गन्ना।
- फोटो : Getty
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नकद भुगतान नहीं मिलने के कारण किसानों ने कोल्हुओं से मुंह मोड़ लिया है। पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गुड़ उत्पादन पर संकट के बादल छा गए हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई मंडियां बंद हो चुकी हैं, जो चल भी रही हैं वह बंद होने के कगार पर हैं। पश्चिम की सभी गुड़ मंडियों के व्यापारियों की इसे लेकर छह दिसंबर को नवीन मंडी स्थल पर बैठक होगी। व्यापारी भावी रणनीति भी तय करेंगे।
नोटबंदी के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की गुड़ मंडिया बंद होने लगी हैं। मंडियों में गुड़ की आवक नहीं होने से यह स्थिति सामने आई है। हालत यह है कि मंगलौर, चांदपुर, अमरोहा, हापुड़ आदि की मंडियां बंद चल रही हैं। एशिया की सबसे बड़ी गुड़मंडी मुजफ्फरनगर के सामने भी संकट की स्थिति पैदा हो गई है। इसका कारण यह है कि नकद भुगतान नहीं होने से किसान कोल्हुओं को कम गन्ना दे रहा है। किसान पुराने नोट लेने को तैयार नहीं हैं। बैंक से पैसे नहीं निकलने के कारण यह स्थिति बनी है।
कोल्हुओं पर कम गन्ना आने से गुड़ का उत्पादन घट गया है। ऐसे हालात में मंडी में भी गुड़ कम हो गया है। नोटबंदी के बाद के हालात को लेकर दि गुड़मंडी मर्चेंट्स एसोसिएशन के मंत्री श्याम सिंह सैनी ने बताया कि छह दिसंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सभी गुड़ मंडियों के व्यापारी नवीन मंडी स्थल पर एकत्र होंगे। मंडियों के सामने आ रही समस्याओं पर विचार होगा। व्यापारी चाहते हैं कि उनकी कैश लिमिट 50 हजार से अधिक बढ़ाई जाए। व्यापारियों का जो पैसा बैंकों में जमा है, उसे निकालने की छूट दी जाए। छह दिसंबर की बैठक में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।
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नोटबंदी के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की गुड़ मंडिया बंद होने लगी हैं। मंडियों में गुड़ की आवक नहीं होने से यह स्थिति सामने आई है। हालत यह है कि मंगलौर, चांदपुर, अमरोहा, हापुड़ आदि की मंडियां बंद चल रही हैं। एशिया की सबसे बड़ी गुड़मंडी मुजफ्फरनगर के सामने भी संकट की स्थिति पैदा हो गई है। इसका कारण यह है कि नकद भुगतान नहीं होने से किसान कोल्हुओं को कम गन्ना दे रहा है। किसान पुराने नोट लेने को तैयार नहीं हैं। बैंक से पैसे नहीं निकलने के कारण यह स्थिति बनी है।
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कोल्हुओं पर कम गन्ना आने से गुड़ का उत्पादन घट गया है। ऐसे हालात में मंडी में भी गुड़ कम हो गया है। नोटबंदी के बाद के हालात को लेकर दि गुड़मंडी मर्चेंट्स एसोसिएशन के मंत्री श्याम सिंह सैनी ने बताया कि छह दिसंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सभी गुड़ मंडियों के व्यापारी नवीन मंडी स्थल पर एकत्र होंगे। मंडियों के सामने आ रही समस्याओं पर विचार होगा। व्यापारी चाहते हैं कि उनकी कैश लिमिट 50 हजार से अधिक बढ़ाई जाए। व्यापारियों का जो पैसा बैंकों में जमा है, उसे निकालने की छूट दी जाए। छह दिसंबर की बैठक में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।
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