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Muzaffarnagar News: खूंखार हो रहे आवारा कुत्ते, बढ़ रहा रैबीज का खतरा

Sat, 28 Sep 2024 03:33 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 28 Sep 2024 03:33 AM IST
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Stray dogs are becoming dangerous, the risk of rabies is increasing
संवाद न्यूज एजेंसी
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मुजफ्फरनगर। गली-मोहल्लों में बढ़ रही आवारा कुत्तों की संख्या लोगों के लिए खतरा बन रही है। कुत्ते लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर रहे हैं। इसके चलते जिला अस्पताल में एआरवी लगवाने वालों की तादाद बढ़ती जा रही है।



स्वामी कल्याण देव जिला अस्पताल पर प्रति दिन 70 से 100 लोग ऐसे आते हैं, जिनमें अधिकतर को आवारा कुत्तों या बंदरों ने काटा हो। हमला करने वाले ये जानवर कहीं रैबीज वायरस से तो संक्रमित नहीं है, इसलिए एहतियातन पीड़ित को एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाना जरूरी होता है। इसे देखते हुए जिला अस्पताल पर एक माह के दौरान औसतन 1500 से दो हजार लोग एआरवी लगवाने आते हैं।
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कुत्ता काटे तो हाईड्रोफोबिया का खतरा



कुत्ता काटे से होने वाली बीमारी को हाईड्रोफोबिया कहा जाता है। इस बीमारी का सबसे बड़ा व अंतिम लक्षण पीड़ित का पानी के प्रति दहशत और उससे दूर भागने के रूप में सामने आता है, लेकिन जब तक यह लक्षण किसी पीड़ित में दिखाई पड़ता है, चिकित्सकों के मुताबिक बीमारी शरीर में विकराल रूप ले चुकी होती है। इसलिए किसी संक्रमित कुत्ते के काटते ही उपचार शुरू कर देना चाहिए।




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आम लोगों पर रैबीज बीमारी का प्रभाव



- संक्रमित कुत्ता, बंदर के काटने, चाटने या उनकी लार घाव पर लगकर संबंधित व्यक्ति के खून में मिलने से भी रैबीज का संक्रमण संभव है।

-रैबीज का संक्रमण सीधे तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव छोड़ता है, इसलिए सिर आदि के करीब पर संक्रमित जीव के काटे जाने से इसके शरीर में फैलने का खतरा अधिक बना रहता है, जबकि हाथ-पैर आदि पर काटने से संक्रमण देर से होता है।
-आम तौर से रैबीज के संक्रमण की स्थिति में कोई उपचार कारगर नहीं। इसलिए आवश्यक है कि संक्रमित कुत्ता, चमगादड़ आदि के काटने के साथ ही उपचार शुरू कराएं।


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इस तरह करें बचाव
-एंटी रैबीज तुरंत लगवाएं और कुत्ते पर भी रखें नजर।

-कुत्ता या बंदर काट ले तो घाव को ताजे पानी से धोएं।
-पालतु कुत्ते व अन्य पशुओं को ऐंटी रैबीज वैक्सीन लगवाएं।
-किसी पशु को संक्रमित कुत्ता आदि काटे तो उससे भी दूर रहें।
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पालिका ने पकड़वाए थे बंदर
आठ वर्ष पूर्व नगर पालिका ने मथुरा से विशेषज्ञ बुलाकर बंदर पकड़वाए थे। बंदरों को जंगलों में छोड़ दिया गया। शहर में कई जगह आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया गया, लेकिन गली-मोहल्लों के लोगों ने विरोध शुरू कर दिया।

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वर्जन :
एआरवी लगवाना जरूरी
जिला अस्पताल में एआरवी आवश्यक मात्रा में उपलब्ध है। कुत्ता काटने पर लोगों को एआरवी लगवाने की सलाह दी जाती है।
- डाॅ. राकेश कुमार, सीएमएस
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