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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Setback for Shahpur Nagar Panchayat at the 'Paith' (market) ground

Muzaffarnagar News: पैठ मैदान पर नगर पंचायत शाहपुर को झटका

Fri, 23 Oct 2026 01:27 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 23 Oct 2026 01:27 AM IST
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Setback for Shahpur Nagar Panchayat at the 'Paith' (market) ground
मुजफ्फरनगर। शाहपुर के प्रसिद्ध पैठ मैदान के मालिकाना हक को लेकर 51 साल बाद समाजसेवी इलम सिंह आर्य के परिवार के पक्ष में फैसला आया। अपर जिला जज/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने नौ साल पुराने निचली अदालत के आदेश को खारिज कर दिया गया। वर्ष 1975 से यह कानूनी लड़ाई चल रही है। नगर पंचायत का दावा था कि जमींदार खात्मा के साथ इस जमीन पर उनका हक हो गया है।
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शाहपुर में भौराकलां-शामली मार्ग पर प्रसिद्ध पैठ मैदान है। 19 अगस्त 1963 को मैदान पर काबिज मेहर अली ने बैनामा कस्बे के इलम चंद आर्य के पक्ष में कर दिया था। वर्ष 1975 में नगर पंचायत ने मैदान को अपने सीमा क्षेत्र का बताते हुए सिविल जज सीनियर डिवीजन में वाद दाखिल किया। बैनामा कैंसिल कराए जाने मांग रखी।
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सिविल जज ने 30 नवंबर 2017 को वाद स्वीकार कर लिया। इसके विरुद्ध इलम चंद आर्य पक्ष ने अपील दाखिल की थी, जिसकी सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई। वर्ष 2017 में नगर पंचायत के पक्ष में दिया गया। एफटीसी-03 ने निचली अदालत के आदेश को खारिज कर दिया है।
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हाईकोर्ट में हुई थी मेहर इलाही की जीत
एडवोकेट अमित गुप्ता ने बताया कि शाहपुर को नगर पंचायत का दर्जा 12 अगस्त 1863 को मिला। सात जुलाई 1949 को नगर पंचायत का नाम दिया गया। यहां पैठ मैदान की 20 बीघा जमीन अतर इलाही ने अपने बेटे मेहर अली को बतौर उपहार दी। नगर पंचायत ने जमीन को अपना बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। 30 मार्च 1955 को मेहर इलाही के पक्ष में फैसला आया।
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इनके पक्ष में आया फैसला
समाजसेवी इलमचंद आर्य का निधन हो चुका है। उनके बेटे सत्यवीर आर्य, महावीर आर्य, रणवीर सिंह आर्य, देवराज आर्य, बेटी सत्यवती आर्या, सरोज आर्या के पक्ष में यह फैसला आया है।
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जमींदारी विनाश अधिनियम लागू नहीं माना
अदालत ने लिखा कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय की विधि व्यवस्थाओं के आलोक में यह न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि विवादित संपत्ति पर उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 के प्रावधान लागू नही होते है। प्रकरण में बैनामा 19 अगस्त 1963 जिसकी रजिस्ट्री बही 20 नवंबर 1963 एक वैध दस्तावेज है। नगर पंचायत वादग्रस्त संपत्ति का मालिक काबिज नही है।

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मैदान से जुड़े सैकड़ों परिवार
शाहपुर का पैठ मैदान ऐतिहासिक है। सार्वजनिक कार्यक्रमोंं के अलावा यहां पर सैकड़ों परिवारों की रोजी रोटी जुड़ी है। अदालत में वाद विचाराधीन होने के कारण नए निर्माण भी नहीं हुए। प्रतिवादियों ने कहा था कि नगर पंचायत को यहां से तहबाजारी वसूलने का अधिकार नहीं है।
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हाईकोर्ट जाएगी नगर पंचायत
अधिशासी अधिकारी आलोक रंजन ने कहा कि स्थानीय न्यायालय के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। नगर पंचायत के पास पर्याप्त दस्तावेज हैं।
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