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डॉ. नवाज देवबंदी की ‘जर्रानवाजी’ का ऑनलाइन विमोचन
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डा. नवाज देवबंदी की पुस्तक का आनलाइन विमोचन करते मोरारी बापू व अन्य
- फोटो : DEVBAND
देवबंद (सहारनपुर)। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त शायर डॉ. नवाज देवबंदी की अदबी जिंदगी और शायरी पर आधारित पुस्तक ‘जर्रानवाजी’ का ऑनलाइन विमोचन किया गया। कार्यक्रम में आध्यात्मिक गुरु मोरारी बापू समेत देश के नामचीन हस्तियां शामिल रहीं।
मंगलवार को हुए विमोचन कार्यक्रम में मोरारी बापू ने कहा कि डॉ. नवाज देवबंदी की शायरी की विशेषता है कि इनकी गजलों में रुहानियत दिल बनकर धड़कती है। प्रोफेसर वसीम बरेलवी ने नवाज देवबंदी के साथ अदबी मंचों को साझा करने तथा साथ गुजारे वक्त को याद करते हुए कहा कि उनकी जितनी शायरी अच्छी है उतने ही अच्छे नवाज देवबंदी भी हैं। प्रोफेसर गोपीचंद नारंग ने कहा कि डॉ. नवाज देवबंदी बेहद सादे अल्फाजों में बहुत गहरी बात कहने की सलाहियत रखते हैं, उनकी यह विशेषता उनकी जिंदगी में भी नजर आती है। प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि मुशायरे हों या कवि सम्मेलन डॉ. नवाज को दोनों ही मंचों पर पसंद किया जाता है। मैं तो कहता हूं कि नवाज देवबंदी हिंदी के शायर और उर्दू जुबान के कवि हैं।
प्रोफेसर अख्तरुल वासे, प्रोफेसर वसीम अख्तर, प्रसिद्ध लेखक हसन कमाल, प्रो. अशोक चक्रधर ने भी विचार रखे। डा. नवाज ने अतिथियों का आभार जताते हुए बताया कि पुस्तक के संपादक डा. अलिफ नाजिम ने मेहनत और लगन के साथ विभिन्न लेखकों के विचारों को किताब की शक्ल दी है। उनकी यह मोहब्बत काबिल-ए-तारीफ है।
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मंगलवार को हुए विमोचन कार्यक्रम में मोरारी बापू ने कहा कि डॉ. नवाज देवबंदी की शायरी की विशेषता है कि इनकी गजलों में रुहानियत दिल बनकर धड़कती है। प्रोफेसर वसीम बरेलवी ने नवाज देवबंदी के साथ अदबी मंचों को साझा करने तथा साथ गुजारे वक्त को याद करते हुए कहा कि उनकी जितनी शायरी अच्छी है उतने ही अच्छे नवाज देवबंदी भी हैं। प्रोफेसर गोपीचंद नारंग ने कहा कि डॉ. नवाज देवबंदी बेहद सादे अल्फाजों में बहुत गहरी बात कहने की सलाहियत रखते हैं, उनकी यह विशेषता उनकी जिंदगी में भी नजर आती है। प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि मुशायरे हों या कवि सम्मेलन डॉ. नवाज को दोनों ही मंचों पर पसंद किया जाता है। मैं तो कहता हूं कि नवाज देवबंदी हिंदी के शायर और उर्दू जुबान के कवि हैं।
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प्रोफेसर अख्तरुल वासे, प्रोफेसर वसीम अख्तर, प्रसिद्ध लेखक हसन कमाल, प्रो. अशोक चक्रधर ने भी विचार रखे। डा. नवाज ने अतिथियों का आभार जताते हुए बताया कि पुस्तक के संपादक डा. अलिफ नाजिम ने मेहनत और लगन के साथ विभिन्न लेखकों के विचारों को किताब की शक्ल दी है। उनकी यह मोहब्बत काबिल-ए-तारीफ है।
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