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मां और उसके जुड़वां बच्चों ने दी कुपोषण को मात
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मां और उसके जुड़वां बच्चों ने दी कुपोषण को मात
मुजफ्फरनगर। अच्छे खानपान और सही समय पर उपचार से कुपोषण को मात दी जा सकती है। भंगेला गांव निवासी शिवानी और उसके जुड़वां बच्चों ने कुपोषण को मात दी। पोषण पुनर्वास केंद्र की चिकित्साधिकारी डॉ. आरती नंदवार की देखरेख में मां और दोनों बच्चे स्वस्थ हैं।
पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में चिकित्साधिकारी डॉ. आरती नंदवार ने बताया कि इसी साल 31 जनवरी को ब्लॉक खतौली के भंगेला गांव निवासी विवेक ने पत्नी शिवानी और जुड़वा बच्चों अरनव और अवंतिका को पोषण पुनर्वास केंद्र में कुपोषण और खून की कमी के चलते भर्ती कराया था। चिकित्सकीय परीक्षण करने पर पता चला कि बच्चों की मां भी कुपोषित है और गर्भावस्था के दौरान भी खून की कमी थी। दोनों बच्चों अरनव और अवंतिका को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती किया गया और मां शिवानी के खान-पान की व्यवस्था कराई गई।
भर्ती करने के दौरान मां का वजन मात्र 39 किलो था, जबकि अरनव का वजन 5.8 किलो और अवंतिका का वजन 5.230 किलो था। उस समय इन दोनों की उम्र करीब आठ माह थी। जबकि बच्चों का वजन कम से कम सात किलोग्राम होना चाहिए था। इतना कम वजन कुपोषण की श्रेणी में आता है। केंद्र पर शिवानी के लिए सुपोषित नाश्ते और पौष्टिक भोजन की व्यवस्था कराई और बच्चों को भी पौष्टिक आहार दिया गया। चिकित्सकों की देखरेख में बच्चों का उपचार भी किया गया। पूरी तरह ठीक होने पर पुनर्वास केंद्र से डिस्चार्ज कर दिया गया है। फिलहाल मां और दोनों जुड़वा बच्चे स्वस्थ हैं।
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मां का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. आभा आत्रेय का कहना है कि गर्भवती का पोषित और स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। जब मां स्वस्थ होगी तभी वह स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकेगी। गर्भावस्था के दौरान आयरन की जरूरत बढ़ जाती है, जिससे महिला को थकान, चक्कर, समय से पहले प्रसव और जटिल प्रसव की संभावना बढ़ जाती है। आयरन की कमी को पूरा करने के लिए आयरन युक्त भोजन के साथ रोजाना आयरन की गोली खाने की जरूरत होती है।
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मुजफ्फरनगर। अच्छे खानपान और सही समय पर उपचार से कुपोषण को मात दी जा सकती है। भंगेला गांव निवासी शिवानी और उसके जुड़वां बच्चों ने कुपोषण को मात दी। पोषण पुनर्वास केंद्र की चिकित्साधिकारी डॉ. आरती नंदवार की देखरेख में मां और दोनों बच्चे स्वस्थ हैं।
पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में चिकित्साधिकारी डॉ. आरती नंदवार ने बताया कि इसी साल 31 जनवरी को ब्लॉक खतौली के भंगेला गांव निवासी विवेक ने पत्नी शिवानी और जुड़वा बच्चों अरनव और अवंतिका को पोषण पुनर्वास केंद्र में कुपोषण और खून की कमी के चलते भर्ती कराया था। चिकित्सकीय परीक्षण करने पर पता चला कि बच्चों की मां भी कुपोषित है और गर्भावस्था के दौरान भी खून की कमी थी। दोनों बच्चों अरनव और अवंतिका को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती किया गया और मां शिवानी के खान-पान की व्यवस्था कराई गई।
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भर्ती करने के दौरान मां का वजन मात्र 39 किलो था, जबकि अरनव का वजन 5.8 किलो और अवंतिका का वजन 5.230 किलो था। उस समय इन दोनों की उम्र करीब आठ माह थी। जबकि बच्चों का वजन कम से कम सात किलोग्राम होना चाहिए था। इतना कम वजन कुपोषण की श्रेणी में आता है। केंद्र पर शिवानी के लिए सुपोषित नाश्ते और पौष्टिक भोजन की व्यवस्था कराई और बच्चों को भी पौष्टिक आहार दिया गया। चिकित्सकों की देखरेख में बच्चों का उपचार भी किया गया। पूरी तरह ठीक होने पर पुनर्वास केंद्र से डिस्चार्ज कर दिया गया है। फिलहाल मां और दोनों जुड़वा बच्चे स्वस्थ हैं।
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मां का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. आभा आत्रेय का कहना है कि गर्भवती का पोषित और स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। जब मां स्वस्थ होगी तभी वह स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकेगी। गर्भावस्था के दौरान आयरन की जरूरत बढ़ जाती है, जिससे महिला को थकान, चक्कर, समय से पहले प्रसव और जटिल प्रसव की संभावना बढ़ जाती है। आयरन की कमी को पूरा करने के लिए आयरन युक्त भोजन के साथ रोजाना आयरन की गोली खाने की जरूरत होती है।