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समय पर पैसा न मिलना उद्योगों की बड़ी समस्या

Fri, 26 Jun 2020 11:33 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jun 2020 11:33 PM IST
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Lack of money on time is a big problem for industries
समय पर पैसा न मिलना उद्योगों की बड़ी समस्या
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मुजफ्फरनगर। जिले के लघु और मध्यम उद्योगों के सामने समय पर उत्पाद का पैसा नहीं मिलना बड़ी समस्या है। कारपोरेट से इन उद्योगों केे 90 दिन बाद तक पैसा मिल रहा है, जिससे इनकी ग्रोथ रुक जाती है। लॉकडाउन के बाद उद्योगों ने रफ्तार पकड़नी शुरू की है, लेकिन डिमांड कम होना बड़ी समस्या है।
जिले में लगभग पांच हजार लघु और मध्यम उद्योग पंजीकृत हैं। लॉकडाउन के बाद जिले की 300 बड़ी इंडस्ट्री के साथ ये सभी उद्योग भी चल गए हैं। इन उद्योगों के सामने सबसे बड़ी समस्या डिमांड की है। दवा और खाद्यान्न पदार्थों से जुड़े उद्योग तो अच्छे तरीके से चल रहे हैं, अन्य उद्योग में अभी डिमांड का संकट है। आईआईए के मंडल अध्यक्ष कुशपुरी कहते हैं कि लघु उद्योगों के सामने सबसे बड़ी समस्या कारपोरेट से समय पर भुगतान नहीं होने की है। सरकारी उपक्रम भी समय पर भुगतान नहीं करते। आंकड़े देखें तो साढे़ तीन लाख करोड़ बड़े कारपोरेेट जगत पर स्माल इंडस्ट्री का उधार है। एमएसएमई डेवलेपमेंट एक्ट 2006 के अनुसार 45 दिन में भुगतान होना चाहिए। नहीं तो बैंक दर के हिसाब से ब्याज मिलना चाहिए। प्रदेश में केवल कानपुर में एक कौंसिल हैं, जबकि देश में सबसे ज्यादा स्माल इंडस्ट्री यूपी में है।
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लघु उद्योग से जुड़े विनय मित्तल कहते हैं कि सरकारी विभागों का पैसा ही छह महीने तक आ रहा है। लघु और मध्यम इंडस्ट्री के लोग अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए चैक एडवांस ले लेते थे। एनआई एक्ट के तहत चैक बाउंसिंग को आपराधिक श्रेणी में रखा गया था। सरकार इसे भी आपराधिक श्रेणी से बाहर करने का काम कर रही है। यह लघु उद्योगों के लिए खतरनाक होगा। सरकार की नीति ठीक है पर योजनाओं का क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पाता है।
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धीरे-धीरे हल हो रही समस्या
मुजफ्फरनगर। महाप्रबंधक उद्योग परमहंस मौर्य का कहना है कि लॉकडाउन के बाद सभी इंडस्ट्री के सामने थोड़ी समस्या थी। अब धीरे-धीरे डिमांड बढ़ रही है और उत्पादन भी बढ़ा है। यहां प्रवासी श्रमिकों को भी रोजगार मिला है।
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