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शिक्षा ऋषि कार्यों को बताया था अद्वितीय
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 05 Sep 2016 12:21 AM IST
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स्वामी कल्याणदेव (फाइल फोटो)।
- फोटो : अमर उजाला
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परमार्थ कार्यों के लिए वेटिकन सिटी में संत घोषित की गई भारत रत्न मदर टेरेसा से वीतराग स्वामी कल्याण देव ने देश के गांवों में गरीबों और असहायों की मदद के लिए आग्रह किया था। वर्ष 1985 में महान विभूतियों की यह भेंट दिल्ली में हुई थी। मदर टेरेसा ने ग्रामोत्थान और शिक्षा की अलख जगाने के लिए वीतराग संत के कार्यों को अद्वितीय बताया था।
पद्म भूषण स्वामी कल्याण देव ने अपने दीर्घायु जीवन में ग्रामोत्थान के लिए उत्तर भारत में साढ़े तीन सौ से अधिक शिक्षण संस्थाएं स्थापित की। कोलकाता, दिल्ली और चेन्नई में गरीब, असहाय और अस्वस्थ लोगों के लिए सेवा कार्य में जुटी मदर टेरेसा के कार्यों से स्वामी जी काफी प्रभावित थे।
वर्ष 1985 में अमेरिका ने मदर टेरेसा को मेडल ऑफ फ्रीडम का सम्मान दिया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी से दिल्ली में मुलाकात के लिए आईं नोबेल पुरस्कार प्राप्त मदर टेरेसा से शिक्षा ऋषि की भेंट कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हंसराज भारद्वाज ने कराई थी। तीन सदी के युगदृष्टा अभिनंदन ग्रंथ में दो महान विभूतियों के बीच हुई भेंट का जिक्र किया गया है।
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ट्रस्ट सदस्य एवं पूर्व मंत्री डॉ मुन्नीलाल रंगा बताते हैं कि मदर टेरेसा ने शिक्षा क्षेत्र में स्वामी जी के कार्यों को जाना और गांव को सेवा केंद्र बनाने पर उनके प्रति श्रद्धा का भाव प्रकट किया। वीतराग संत ने मदर टेरेसा से बातचीत में कहा कि मिशनरी ऑफ चैरिटी के सेवा कार्य देश के महानगरों तक सीमित है।
भारत गांवों में बसता है। देश की सच्ची सेवा के लिए आपको ग्रामीण क्षेत्र में भी पहल करनी चाहिए। परम शिष्य स्वामी ओमानंद सरस्वती बताते हैं कि दीन दुखियों के प्रति मदर टेरेसा के समर्पण और सेवा से गुरदेव प्रभावित थे। मदर टेरेसा को संत का गौरव मिलना परमार्थ के प्रति समर्पित जीवन का सम्मान है।
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पद्म भूषण स्वामी कल्याण देव ने अपने दीर्घायु जीवन में ग्रामोत्थान के लिए उत्तर भारत में साढ़े तीन सौ से अधिक शिक्षण संस्थाएं स्थापित की। कोलकाता, दिल्ली और चेन्नई में गरीब, असहाय और अस्वस्थ लोगों के लिए सेवा कार्य में जुटी मदर टेरेसा के कार्यों से स्वामी जी काफी प्रभावित थे।
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वर्ष 1985 में अमेरिका ने मदर टेरेसा को मेडल ऑफ फ्रीडम का सम्मान दिया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी से दिल्ली में मुलाकात के लिए आईं नोबेल पुरस्कार प्राप्त मदर टेरेसा से शिक्षा ऋषि की भेंट कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हंसराज भारद्वाज ने कराई थी। तीन सदी के युगदृष्टा अभिनंदन ग्रंथ में दो महान विभूतियों के बीच हुई भेंट का जिक्र किया गया है।
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ट्रस्ट सदस्य एवं पूर्व मंत्री डॉ मुन्नीलाल रंगा बताते हैं कि मदर टेरेसा ने शिक्षा क्षेत्र में स्वामी जी के कार्यों को जाना और गांव को सेवा केंद्र बनाने पर उनके प्रति श्रद्धा का भाव प्रकट किया। वीतराग संत ने मदर टेरेसा से बातचीत में कहा कि मिशनरी ऑफ चैरिटी के सेवा कार्य देश के महानगरों तक सीमित है।
भारत गांवों में बसता है। देश की सच्ची सेवा के लिए आपको ग्रामीण क्षेत्र में भी पहल करनी चाहिए। परम शिष्य स्वामी ओमानंद सरस्वती बताते हैं कि दीन दुखियों के प्रति मदर टेरेसा के समर्पण और सेवा से गुरदेव प्रभावित थे। मदर टेरेसा को संत का गौरव मिलना परमार्थ के प्रति समर्पित जीवन का सम्मान है।