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Muzaffarnagar News: कैसे होगी पढ़ाई, चार गांवों के बीच नहीं एक भी इंटर कॉलेज
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भोपा। क्षेत्र के चार गांवों नन्हेड़ा, नन्हेड़ी, गादला और शादरा में एक भी इंटर कॉलेज नहीं है, जिसके चलते चारों गांव के छात्र-छात्राओं को 12वीं की पढ़ाई के लिए छह किलोमीटर से लेकर 25 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ती है। यहां पहले ही छात्र -छात्राएं व ग्रामीण परिवहन की एक बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं।
चार गांव नन्हेड़ा, नन्हेड़ी, गादला, शादरा जिला मुख्यालय से काफी दूर स्थित हैं। इन गांव में एक भी इंटर कॉलेज नहीं होने से छात्र-छात्राओं को 12वीं की पढ़ाई के लिए बसेड़ा, भोपा,जट-मुझेड़ा आदि या इसके बाद जिला मुख्यालय मुजफ्फरनगर जाना पड़ता है। इसके लिए उन्हें छह से लेकर 25 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। गांव बरूकी में एक इंटर कॉलेज बनाया गया है लेकिन वह भी दूरी पर हैं। इन गांवों में पहले ही लोगों के लिए पिछले काफी वर्षों से परिवहन की समस्या बनी हुई है। शिक्षा से जुडी इस गंभीर समस्या के निदान के लिए शासन-प्रशासन को इस और ध्यान देना चाहिए।
गांव नन्हेड़ी निवासी समाजसेवी आबाद हसन का कहना है कि गांव में कोई इंटर कॉलेज नहीं होने से छात्र-छात्राओं को तो समस्या का सामना करना पड़ ही रहा है। साथ ही अपने बच्चों को उच्च शिक्षा ग्रहण कराने के लिए अन्य कॉलेजों में भेजने के लिए अभिभावकों को भी बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता हैं।
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गांव नन्हेडा निवासी किसान नेता अंकित जावला का कहना हैं कि इंटर कॉलेज ना होने से अनेकों छात्र-छात्राएं 12वीं की पढ़ाई या उससे आगे की पढ़ाई के लिए वंचित रह जाते हैं। बाहर जाने के लिए यहां पहले ही परिवहन की एक बड़ी समस्या बनी हुई है। पढ़ाई को क्षेत्र से बाहर जाने के लिए अधिकांश छात्र-छात्राओं को डग्गामार वाहनों में सफर तय करना पड़ता है।
गांव गादला निवासी समाज सेवी अब्दुल रहमान का कहना हैं कि आसपास के क्षेत्र की बात करें तो उनका गांव संख्या के आधार पर एक बड़ा गांव है, लेकिन इसके बाद भी कोई इंटर कॉलेज नहीं है। गांव ही नहीं आसपास के गांव के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए गांव से बाहर जाना होता है। इस ओर ध्यान देना चाहिए।
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चार गांव नन्हेड़ा, नन्हेड़ी, गादला, शादरा जिला मुख्यालय से काफी दूर स्थित हैं। इन गांव में एक भी इंटर कॉलेज नहीं होने से छात्र-छात्राओं को 12वीं की पढ़ाई के लिए बसेड़ा, भोपा,जट-मुझेड़ा आदि या इसके बाद जिला मुख्यालय मुजफ्फरनगर जाना पड़ता है। इसके लिए उन्हें छह से लेकर 25 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। गांव बरूकी में एक इंटर कॉलेज बनाया गया है लेकिन वह भी दूरी पर हैं। इन गांवों में पहले ही लोगों के लिए पिछले काफी वर्षों से परिवहन की समस्या बनी हुई है। शिक्षा से जुडी इस गंभीर समस्या के निदान के लिए शासन-प्रशासन को इस और ध्यान देना चाहिए।
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गांव नन्हेड़ी निवासी समाजसेवी आबाद हसन का कहना है कि गांव में कोई इंटर कॉलेज नहीं होने से छात्र-छात्राओं को तो समस्या का सामना करना पड़ ही रहा है। साथ ही अपने बच्चों को उच्च शिक्षा ग्रहण कराने के लिए अन्य कॉलेजों में भेजने के लिए अभिभावकों को भी बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता हैं।
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गांव नन्हेडा निवासी किसान नेता अंकित जावला का कहना हैं कि इंटर कॉलेज ना होने से अनेकों छात्र-छात्राएं 12वीं की पढ़ाई या उससे आगे की पढ़ाई के लिए वंचित रह जाते हैं। बाहर जाने के लिए यहां पहले ही परिवहन की एक बड़ी समस्या बनी हुई है। पढ़ाई को क्षेत्र से बाहर जाने के लिए अधिकांश छात्र-छात्राओं को डग्गामार वाहनों में सफर तय करना पड़ता है।
गांव गादला निवासी समाज सेवी अब्दुल रहमान का कहना हैं कि आसपास के क्षेत्र की बात करें तो उनका गांव संख्या के आधार पर एक बड़ा गांव है, लेकिन इसके बाद भी कोई इंटर कॉलेज नहीं है। गांव ही नहीं आसपास के गांव के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए गांव से बाहर जाना होता है। इस ओर ध्यान देना चाहिए।