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Muzaffarnagar News: ग्रीन हॉस्पिटल सील, विधायक बोले कोई सिफारिश नहीं की
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बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कस्बे के हिंडन नदी पुल पार ग्रीन हॉस्पिटल को सील कर दिया। आरोप है कि चिकित्सक की लापरवाही के कारण शामली जनपद के एक बालक की मौत हो गई थी। सीएमओ डॉ. सुनील तेवतिया ने जांच शुरू करा दी है। उधर, बुढ़ाना विधायक राजपाल बालियान ने बयान में कहा कि हॉस्पिटल को लेकर कोई सिफारिश नहीं की। अगर कोई सिफारिश साबित कर दे तो वह इस्तीफा दे देंगे। राजनीति के तहत उनका नाम घसीटा जा रहा है।
कस्बे के ग्रीन हॉस्पिटल में मंगलवार को मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया के निर्देश पर जिला मुख्यालय से एसीएमओ डॉ. अजय और डॉ. महक सिंह के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ग्रीन हॉस्पिटल पर पहुंची।
सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. प्रणव तेवतिया स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ ग्रीन हॉस्पिटल पहुंच गए। आरोप है कि सोमवार को नोटिस देने के बाद भी हॉस्पिटल संचालक में नर्सरी को खाली नहीं करवाया था।
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इस टीम के निर्देश पर हॉस्पिटल की नर्सरी में भर्ती 12 बच्चों को उनके परिजनों के साथ दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट कराया गया। इसके बाद अस्पताल के सभी हिस्सों को सील कर दिया गया। चिकित्सकों ने बताया कि ग्रीन हॉस्पिटल में करीब डेढ़ महीने पहले शामली जिले के कादरगढ़ निवासी मनु पुंडीर के 15 माह के बच्चे की उपचार के दौरान मौत हो गई थी।
परिजनों ने अस्पताल पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए सीएमओ कार्यालय में शिकायत की थी। परिजनों के मुताबिक, बच्चे को दस्त और बुखार की शिकायत पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत बिगड़ने पर उसे रेफर किया गया लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई थी। घटना की शिकायत मृतक बालक के परिजनों ने मुख्य चिकित्साधिकारी सहित विभाग के उच्चाधिकारियों, मुख्यमंत्री को भेजी थी।
पहले से विवादित रहा है ग्रीन हॉस्पिटल
बुढ़ाना। ग्रीन हॉस्पिटल पहले से ही विवादों में रहा है। पूर्व सीएमओ डॉ. महावीर फौजदार के कार्यकाल में दो साल पहले डॉ. अन्नू के भी हॉस्पिटल पर सील लगाई थी। कुछ घंटे बाद ही सील खुल गई थी। गांव चंधेड़ी निवासी श्रवण के बच्चे की मौत के बाद भी यह हॉस्पिटल विवादों में रहा है। घटना को लेकर श्रवण न्यायालय की शरण में है। गांव अटेरना निवासी कलवा ने भी चिकित्सालय पर हंगामा किया था। आरोप है कि ग्रीन हॉस्पिटल में बोर्ड पर पंजीकृत चिकित्सक का नाम होता है, जबकि हॉस्पिटल संचालक जेडए राणा ही बच्चों से बड़ों तक मरीजों को देखते हैं।
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कस्बे के ग्रीन हॉस्पिटल में मंगलवार को मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया के निर्देश पर जिला मुख्यालय से एसीएमओ डॉ. अजय और डॉ. महक सिंह के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ग्रीन हॉस्पिटल पर पहुंची।
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सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. प्रणव तेवतिया स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ ग्रीन हॉस्पिटल पहुंच गए। आरोप है कि सोमवार को नोटिस देने के बाद भी हॉस्पिटल संचालक में नर्सरी को खाली नहीं करवाया था।
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इस टीम के निर्देश पर हॉस्पिटल की नर्सरी में भर्ती 12 बच्चों को उनके परिजनों के साथ दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट कराया गया। इसके बाद अस्पताल के सभी हिस्सों को सील कर दिया गया। चिकित्सकों ने बताया कि ग्रीन हॉस्पिटल में करीब डेढ़ महीने पहले शामली जिले के कादरगढ़ निवासी मनु पुंडीर के 15 माह के बच्चे की उपचार के दौरान मौत हो गई थी।
परिजनों ने अस्पताल पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए सीएमओ कार्यालय में शिकायत की थी। परिजनों के मुताबिक, बच्चे को दस्त और बुखार की शिकायत पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत बिगड़ने पर उसे रेफर किया गया लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई थी। घटना की शिकायत मृतक बालक के परिजनों ने मुख्य चिकित्साधिकारी सहित विभाग के उच्चाधिकारियों, मुख्यमंत्री को भेजी थी।
पहले से विवादित रहा है ग्रीन हॉस्पिटल
बुढ़ाना। ग्रीन हॉस्पिटल पहले से ही विवादों में रहा है। पूर्व सीएमओ डॉ. महावीर फौजदार के कार्यकाल में दो साल पहले डॉ. अन्नू के भी हॉस्पिटल पर सील लगाई थी। कुछ घंटे बाद ही सील खुल गई थी। गांव चंधेड़ी निवासी श्रवण के बच्चे की मौत के बाद भी यह हॉस्पिटल विवादों में रहा है। घटना को लेकर श्रवण न्यायालय की शरण में है। गांव अटेरना निवासी कलवा ने भी चिकित्सालय पर हंगामा किया था। आरोप है कि ग्रीन हॉस्पिटल में बोर्ड पर पंजीकृत चिकित्सक का नाम होता है, जबकि हॉस्पिटल संचालक जेडए राणा ही बच्चों से बड़ों तक मरीजों को देखते हैं।