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कब बनेंगे ड्रग्स लाइसेंस, नए डीआई का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 28 Feb 2017 12:20 AM IST
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विजिलेंस के शिकंजे में आए औषधि निरीक्षक की गिरफ्तारी के बाद ड्रग्स लाइसेंस निर्गत करने की प्रक्रिया बीते एक माह से रुकी पड़ी है। ऑन लाइन प्रक्रिया होने की वजह से दवा व्यापारियों को होलसेल और मेडिकल स्टोर के लाइसेंस न मिलने से दिक्कतें आ रही हैं। लाइसेंसी नवीनीकरण की फाइलें भी बढ़ गई है। शासन से अभी तक किसी को यहां का चार्ज नहीं दिया गया है।
भ्रष्टाचार की शिकायत पर मेरठ की विजिलेंस टीम ने गत 27 जनवरी को कचहरी में स्थित कार्यालय पर छापा मार कर औषधि निरीक्षक राजेश कुमार यादव को 50 हजार रुपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया था। आरोपी औषधि निरीक्षक मेरठ की जेल में बंद है। मामला सुर्खियों में आने के बाद सहारनपुर और शामली के डीआई ने यहां का अतिरिक्त चार्ज लेने से इंकार कर दिया। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग लखनऊ से भी अभी तक नए डीआई की नियुक्ति नहीं हो पाई है।
बीते एक माह से जिले में लाइसेंस जारी न होने से दवा कारोबारियों को मुश्किलें आ गई है। लाइसेंस की पूरी प्रक्रिया ऑन लाइन है। स्थलीय निरीक्षण और डीआई की संस्तुति के बाद ही लाइसेंस निर्गत होता है। थोक और फु टकर दवाई बिक्री के लिए लाइसेंस की फाइलों की तादाद बढ़ गई है। जिन दवा विक्रेताओं के लाइसेंस का नवीनीकरण होना है, उन्हें भी नए औषधि निरीक्षक का इंतजार है।
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डिस्ट्रिक केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष चौधरी रविंद्र सिंह का कहना है कि दवा विक्रेताओं को लाइसेंस समय पर नहीं मिलने से दिक्कतें आ रही है। शासन को तत्काल जिले में औषधि निरीक्षक के पद को भरना चाहिए। बताते चले कि सीएमओ ऑफिस के ऊपरी तल पर पहले औषधि विभाग का कार्यालय था, जिसे एडीएम प्रशासन के निर्देश पर कचहरी में स्थानांतरित कर दिया गया था।
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भ्रष्टाचार की शिकायत पर मेरठ की विजिलेंस टीम ने गत 27 जनवरी को कचहरी में स्थित कार्यालय पर छापा मार कर औषधि निरीक्षक राजेश कुमार यादव को 50 हजार रुपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया था। आरोपी औषधि निरीक्षक मेरठ की जेल में बंद है। मामला सुर्खियों में आने के बाद सहारनपुर और शामली के डीआई ने यहां का अतिरिक्त चार्ज लेने से इंकार कर दिया। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग लखनऊ से भी अभी तक नए डीआई की नियुक्ति नहीं हो पाई है।
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बीते एक माह से जिले में लाइसेंस जारी न होने से दवा कारोबारियों को मुश्किलें आ गई है। लाइसेंस की पूरी प्रक्रिया ऑन लाइन है। स्थलीय निरीक्षण और डीआई की संस्तुति के बाद ही लाइसेंस निर्गत होता है। थोक और फु टकर दवाई बिक्री के लिए लाइसेंस की फाइलों की तादाद बढ़ गई है। जिन दवा विक्रेताओं के लाइसेंस का नवीनीकरण होना है, उन्हें भी नए औषधि निरीक्षक का इंतजार है।
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डिस्ट्रिक केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष चौधरी रविंद्र सिंह का कहना है कि दवा विक्रेताओं को लाइसेंस समय पर नहीं मिलने से दिक्कतें आ रही है। शासन को तत्काल जिले में औषधि निरीक्षक के पद को भरना चाहिए। बताते चले कि सीएमओ ऑफिस के ऊपरी तल पर पहले औषधि विभाग का कार्यालय था, जिसे एडीएम प्रशासन के निर्देश पर कचहरी में स्थानांतरित कर दिया गया था।