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अधिवक्ताओं व तहसीलदार के बीच का विवाद गहराया
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अधिवक्ताओं और तहसीलदार के बीच विवाद गहराया
जानसठ। बार संघ अधिवक्ताओं व तहसीलदार के बीच विवाद निपटने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। अधिवक्ताओं ने एसडीएम से मिलकर तहसीलदार के कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार व कार्यालय से गायब दो दर्जन से अधिक पत्रावली के बारे में शिकायत करते हुए उनके तबादला होने तक न्यायालय का बहिष्कार करने के निर्णय से अवगत कराया। एसडीएम ने जांच कराकर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
तहसील में अधिवक्ताओं व तहसीलदार अमित कुमार के बीच चल रहे विवाद के चलते मंगलवार को बार संघ अध्यक्ष प्रदीप गर्ग व सचिव ज्ञानचंद सैनी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल एसडीएम अनुज मलिक से मिला। अध्यक्ष व सचिव ने तहसीलदार द्वारा अधिवक्ताओं के साथ किए जा रहे अभद्र व्यवहार व तहसीलदार कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार से अवगत कराया। अधिवक्ताओं ने बताया कि दाखिल खारिज के लिए सरकार द्वारा जहां 45 दिन का निर्धारित समय दे रखा है, वहीं दाखिल खारिज कई कई माह तक नहीं हो पाता तथा वादकारियों के साथ साथ अधिवक्ताओं के साथ भी अभद्र व्यवहार किया जाता है। तहसीलदार की तैनाती जिले में तीन साल से अधिक हो चुकी है। तहसीलदार का तबादला गैर जनपद में होना अनिवार्य है। अधिवक्ताओं ने एसडीएम को बताया कि जब तक तहसीलदार का तबादला नहीं होता, तब तक उनके न्यायालय का बहिष्कार जारी रहेगा। एसडीएम ने जांच कराकर अधिवक्ताओं को कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इस दौरान दीपेश गुप्ता, अजादार हुसैन जैदी, जावेद हुृमायूं, वेदपाल, रोशन लाल, सोनी गुर्जर, जसवंत कांबोज, रविंद्र कुमार, अनुज, कपिल कुमार, जुल्फकार, नावेद, अरुण गर्ग आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।
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जानसठ। बार संघ अधिवक्ताओं व तहसीलदार के बीच विवाद निपटने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। अधिवक्ताओं ने एसडीएम से मिलकर तहसीलदार के कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार व कार्यालय से गायब दो दर्जन से अधिक पत्रावली के बारे में शिकायत करते हुए उनके तबादला होने तक न्यायालय का बहिष्कार करने के निर्णय से अवगत कराया। एसडीएम ने जांच कराकर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
तहसील में अधिवक्ताओं व तहसीलदार अमित कुमार के बीच चल रहे विवाद के चलते मंगलवार को बार संघ अध्यक्ष प्रदीप गर्ग व सचिव ज्ञानचंद सैनी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल एसडीएम अनुज मलिक से मिला। अध्यक्ष व सचिव ने तहसीलदार द्वारा अधिवक्ताओं के साथ किए जा रहे अभद्र व्यवहार व तहसीलदार कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार से अवगत कराया। अधिवक्ताओं ने बताया कि दाखिल खारिज के लिए सरकार द्वारा जहां 45 दिन का निर्धारित समय दे रखा है, वहीं दाखिल खारिज कई कई माह तक नहीं हो पाता तथा वादकारियों के साथ साथ अधिवक्ताओं के साथ भी अभद्र व्यवहार किया जाता है। तहसीलदार की तैनाती जिले में तीन साल से अधिक हो चुकी है। तहसीलदार का तबादला गैर जनपद में होना अनिवार्य है। अधिवक्ताओं ने एसडीएम को बताया कि जब तक तहसीलदार का तबादला नहीं होता, तब तक उनके न्यायालय का बहिष्कार जारी रहेगा। एसडीएम ने जांच कराकर अधिवक्ताओं को कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इस दौरान दीपेश गुप्ता, अजादार हुसैन जैदी, जावेद हुृमायूं, वेदपाल, रोशन लाल, सोनी गुर्जर, जसवंत कांबोज, रविंद्र कुमार, अनुज, कपिल कुमार, जुल्फकार, नावेद, अरुण गर्ग आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।
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