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मूक बधिर बच्चों की जिंदगी की रोशनी का दीया बुझा
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 27 Oct 2016 12:44 AM IST
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मगनलाल गर्ग (फाइल फोटो)।
- फोटो : अमर उजाला
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मंदबुद्धि और मूक बधिर बच्चों की जिंदगी में खुशियों की रोशनी का एक दीया बुझ गया है। शहर में मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए 14 साल पहले इंजीनियर मगनलाल गर्ग ने एक विद्यालय की नींव रखी थी, जिसमें शिक्षा के साथ उन्हें जीवन दिनचर्या का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। जीवन की अंतिम सांस तक गर्ग निष्काम सेवा में मगन रहे।
संकल्प की शक्ति ने सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त अभियंता एमएल गर्ग को मूक बधिर और मंदबुद्धि बच्चों की सेवा के लिए प्रेरित किया। इंग्लैंड में बसे दामाद डॉ अरुण गुप्ता की सलाह पर उन्होंने शहर में शारीरिक और मानसिक दिव्यांग बच्चों के बीच आशा की ज्योति जलाई। गर्ग ने वर्ष 1993 में आर्य समाज नईमंडी के दो कमरों में पांच बच्चों के साथ यह संस्था शुरू की। उन्होंने अभिभावकों को नया हौसला दिया।
जन्म से दिव्यांग बच्चों को संभालने की ट्रेनिंग दी। कैसे उनकी दिनचर्या बेहतर बन सकती है, इसके लिए जीवन पर्यन्त जुटे रहे। नि:स्वार्थ सेवा के पथिक गर्ग ने जन सहयोग से संस्था को राष्ट्रीय पहचान दी। बुढ़ाना तहसील के गांव खरड़ में रिंकूमल गर्ग के घर जन्मे मगनलाल ने रुड़की से सिविल इंजीनियरिंग की। रिटायरमेंट के बाद वह अपने बेटे डॉ विपिन गर्ग के पास अमेरिका चले गए, मगर जीवन की सार्थकता के लिए सेवा की भावना उन्हें फिर वतन ले आई।
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उन्होंने आशादीप धर्मार्थ सेवा समिति का गठन किया। नईमंडी के बाद सरकुलर रोड स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल के दो कमरों में विद्यालय संचालित किया। धुन के धुनी गर्ग ने मानसिक दिव्यांग बच्चों के प्रशिक्षण के लिए जानसठ रोड स्थित विष्णु विहार में आशादीप बाल प्रशिक्षण संस्थान का भवन स्थापित कराया। जिसमें वर्तमान में 90 बच्चे स्वावलंबन की ट्रेनिंग ले रहे हैं। हार्ट सर्जरी के बाद भी गर्ग रोजाना विद्यालय जाते और बच्चों की व्यवस्था दुरुस्त करते।
यही उनकी जिन्दगी थी और यही धर्म। गत बृहस्पतिवार को 82 वर्षीय गर्ग ने साउथ सिविल लाईन्स आवास पर अंतिम सांस ली। उनकी पत्नी सोमा रानी बताती हैं कि उन्होंने मूक बधिर और मंद बुद्धि बच्चों के चेहरे पर मुस्कान को ही ईश्वर भक्ति मान लिया था। बेटी संध्या प्रकाश कहती हैं कि दिव्यांग बच्चों की शिक्षा से चिकित्सा तक की जिम्मेदारी निभाने में उन्हें फख्र होता था।
संस्था के हर संकट में बनते थे सारथी
मुजफ्फरनगर। मंदबुद्धि बच्चों की सहायार्थ जब भी आर्थिक संकट आया, खुद एमएल गर्ग ने धन जुटाकर व्यवस्था को संभाले रखा। आशादीप बाल प्रशिक्षण संस्थान के अध्यक्ष वेदप्रकाश सिंघल बताते हैं कि विद्यालय के भवन निर्माण में उन्होंने कमी नहीं आने दी। पीएनबी के पूर्व प्रबंधक पीडी सिंघल और पीडब्ल्यूडी के पूर्व अभियंता जयलाल शर्मा कहते हैं कि गर्ग के प्रयास से यह संस्था ऐसे बच्चों को स्वावलंबी बनाने का संकल्प लिए है।
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संकल्प की शक्ति ने सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त अभियंता एमएल गर्ग को मूक बधिर और मंदबुद्धि बच्चों की सेवा के लिए प्रेरित किया। इंग्लैंड में बसे दामाद डॉ अरुण गुप्ता की सलाह पर उन्होंने शहर में शारीरिक और मानसिक दिव्यांग बच्चों के बीच आशा की ज्योति जलाई। गर्ग ने वर्ष 1993 में आर्य समाज नईमंडी के दो कमरों में पांच बच्चों के साथ यह संस्था शुरू की। उन्होंने अभिभावकों को नया हौसला दिया।
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जन्म से दिव्यांग बच्चों को संभालने की ट्रेनिंग दी। कैसे उनकी दिनचर्या बेहतर बन सकती है, इसके लिए जीवन पर्यन्त जुटे रहे। नि:स्वार्थ सेवा के पथिक गर्ग ने जन सहयोग से संस्था को राष्ट्रीय पहचान दी। बुढ़ाना तहसील के गांव खरड़ में रिंकूमल गर्ग के घर जन्मे मगनलाल ने रुड़की से सिविल इंजीनियरिंग की। रिटायरमेंट के बाद वह अपने बेटे डॉ विपिन गर्ग के पास अमेरिका चले गए, मगर जीवन की सार्थकता के लिए सेवा की भावना उन्हें फिर वतन ले आई।
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उन्होंने आशादीप धर्मार्थ सेवा समिति का गठन किया। नईमंडी के बाद सरकुलर रोड स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल के दो कमरों में विद्यालय संचालित किया। धुन के धुनी गर्ग ने मानसिक दिव्यांग बच्चों के प्रशिक्षण के लिए जानसठ रोड स्थित विष्णु विहार में आशादीप बाल प्रशिक्षण संस्थान का भवन स्थापित कराया। जिसमें वर्तमान में 90 बच्चे स्वावलंबन की ट्रेनिंग ले रहे हैं। हार्ट सर्जरी के बाद भी गर्ग रोजाना विद्यालय जाते और बच्चों की व्यवस्था दुरुस्त करते।
यही उनकी जिन्दगी थी और यही धर्म। गत बृहस्पतिवार को 82 वर्षीय गर्ग ने साउथ सिविल लाईन्स आवास पर अंतिम सांस ली। उनकी पत्नी सोमा रानी बताती हैं कि उन्होंने मूक बधिर और मंद बुद्धि बच्चों के चेहरे पर मुस्कान को ही ईश्वर भक्ति मान लिया था। बेटी संध्या प्रकाश कहती हैं कि दिव्यांग बच्चों की शिक्षा से चिकित्सा तक की जिम्मेदारी निभाने में उन्हें फख्र होता था।
संस्था के हर संकट में बनते थे सारथी
मुजफ्फरनगर। मंदबुद्धि बच्चों की सहायार्थ जब भी आर्थिक संकट आया, खुद एमएल गर्ग ने धन जुटाकर व्यवस्था को संभाले रखा। आशादीप बाल प्रशिक्षण संस्थान के अध्यक्ष वेदप्रकाश सिंघल बताते हैं कि विद्यालय के भवन निर्माण में उन्होंने कमी नहीं आने दी। पीएनबी के पूर्व प्रबंधक पीडी सिंघल और पीडब्ल्यूडी के पूर्व अभियंता जयलाल शर्मा कहते हैं कि गर्ग के प्रयास से यह संस्था ऐसे बच्चों को स्वावलंबी बनाने का संकल्प लिए है।