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असंतुष्ट नेताओं को मनाने में जुटे पार्टी के दिग्गज, डैमेज कंट्रोल भाजपा के लिए बड़ी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 09 Nov 2017 11:56 PM IST
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नाम वापस लेने पहुंचे प्रत्याशी।
- फोटो : अमर उजाला
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चाहे अध्यक्ष पद पर प्रत्याशी के चयन का मुद्दा हो या फिर वार्डों में उम्मीदवारों की अदला-बदली का घमासान, भाजपा के लिए बीते पांच दिन सबसे मुश्किलों भरा वक्त रहा। सड़कों पर उतरकर बखेड़ा करने वाली महिला कार्यकर्ताओं की मान-मनौव्वल के लिए दिग्गजों को हस्तक्षेप करना पड़ा।
सक्रिय कार्यकर्ताओं को टिकट नहीं मिले तो सांसद से लेकर एमएलए को खरी-खोटी सुननी पड़ी। भाजपा में ऐसा नजारा पहले कभी नहीं देखा गया। निकाय चुनाव में भाजपा के लिए ऐसे हालात में डैमेज कंट्रोल करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा।
निकाय चुनाव में उम्मीदवारों के चयन में जो फजीहत भाजपा की हुई है, वैसी अन्य सियासी पार्टियों में दिखाई नहीं दी। केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकारों के सत्तारुढ़ होने की वजह से सबसे ज्यादा मारामारी भाजपा के टिकटों को लेकर होना स्वाभाविक थी।
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वार्ड सदस्य बनने की चाह में कार्यकर्ता कई साल से भाजपा नेताओं की परिक्रमा में जुटे थे। वैसे भी पिछले नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस ने भाजपाइयों को झटका दे दिया था।
ऐसे में संगठन में वर्षों से सक्रिय कार्यकर्ताओं को उम्मीदें थी कि पार्टी उन्हें अनुकूल माहौल में चुनाव लड़ने का मौका देगी। टिकट की घोषणा से पहले पार्टी में सबकुछ अनुशासित लग रहा था। आवेदन की पूरी प्रक्रिया गंभीरता से पूरी की गई। यही वजह है कि 33 आवेदन मुजफ्फरनगर और 16 आवेदन खतौली नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए पार्टी के समक्ष प्रस्तुत किए गए। जैसे ही प्रत्याशियों की घोषणा हुई, बखेड़ा खड़ा हो गया।
सूची में कई ऐसे नाम आ गए, जो दूसरे दलों से आए और उनका पार्टी संगठन में भी कोई योगदान नहीं रहा। यही वजह रही कि नेताओं पर टिकट में खरीद-फरोख्त के आरोप लगे। शिवचौक पर महिलाओं कार्यकर्ताओं का 24 घंटे हाईवोल्टेज ड्रामा चला। मामला बिगड़ता देख जिला प्रभारी मंत्री सतीश महाना ने भी किनारा कर लिया।
ऐसे में हाईकमान के निर्देश के बाद जिले के शीर्ष नेताओं को ही महिला कार्यकर्ताओं के घर पहुंचकर उन्हें मनाना पड़ा। वार्ड सदस्यों के चयन में छीछालेदर हुई। पहली सूची में घोषित नामों को एक रात के बाद ही बदल दिया गया, जिसमें नेताओं ने अपने चहेतों के नाम घुसा दिए थे।
सभासद पदों के टिकटों को बेचने के भी आरोप-प्रत्यारोप लगे। लगभग छह से दस वार्डों में भाजपा में कलह का माहौल है। पार्टी के कई पुराने महारथी भी टिकट वितरण में उपेक्षा से खिन्न हैं। प्रत्याशियों के चयन में जिस तरह तमाशा हुआ, उससे संगठन की अपरिपक्वता भी सामने आई।
परदे के पीछे पूरे बवाल को संभालने की जरूरत थी, लेकिन पार्टी चूक गई और पूरा मामला सड़कों पर आ गया। नामांकन के लिए कई ऐसे प्रत्याशी कलक्ट्रेट में विरोध प्रदर्शन करते नजर आए, जिनका पहले टिकट घोषित हुआ, फिर काट दिया गया। ऐसे कई प्रत्याशी निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़कर भाजपा की मुश्किलें बढ़ाएंगे।
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर असमंजस
मुजफ्फरनगर। निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैली को लेकर पार्टी असमंजस में है। 12 नवंबर की रैली 18 में कराए जाने के लिए हाईकमान को लिखा गया है। हाईकमान ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। भाजपा निकाय चुनाव के रण के लिए पूरी तरह तैयार भी नहीं हुई थी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कार्यक्रम आ गया। पार्टी नेता अचानक आए 12 नवंबर के कार्यक्रम से खुद को असहज महसूस कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में टाउनहाल के मैदान में जनसभा करेंगे। पार्टी हाईकमान से आए कार्यक्रम के बाद जिले में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई और उसमें चर्चा के बाद हाईकमान से बात की गई। पार्टी हाईकमान को पत्र भेजकर कहा गया कि अभी चुनाव शुरू हुआ है, ऐसे में शुरुआत में ही रैली से अधिक लाभ नहीं होगा।
चुनावी रैली के लिए 18 नवंबर के लिए समय मांगा गया है। पार्टी हाईकमान ने अभी तक जिले को कोई दूसरा समय नहीं दिया है। हाईकमान के हिसाब से अभी तक जनपद में 12 नवंबर को ही रैली होनी है। पार्टी के कार्यकर्ता रैली को लेकर पशोपेश में हैं। जिलाध्यक्ष रुपेंद्र सैनी का कहना है कि 12 नवंबर को टाउन हाल में सीएम योगी आदित्यनाथ का कार्यक्रम आया है। पार्टी में कार्यक्रम को लेकर मंथन चल रहा है।
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सक्रिय कार्यकर्ताओं को टिकट नहीं मिले तो सांसद से लेकर एमएलए को खरी-खोटी सुननी पड़ी। भाजपा में ऐसा नजारा पहले कभी नहीं देखा गया। निकाय चुनाव में भाजपा के लिए ऐसे हालात में डैमेज कंट्रोल करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा।
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निकाय चुनाव में उम्मीदवारों के चयन में जो फजीहत भाजपा की हुई है, वैसी अन्य सियासी पार्टियों में दिखाई नहीं दी। केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकारों के सत्तारुढ़ होने की वजह से सबसे ज्यादा मारामारी भाजपा के टिकटों को लेकर होना स्वाभाविक थी।
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वार्ड सदस्य बनने की चाह में कार्यकर्ता कई साल से भाजपा नेताओं की परिक्रमा में जुटे थे। वैसे भी पिछले नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस ने भाजपाइयों को झटका दे दिया था।
ऐसे में संगठन में वर्षों से सक्रिय कार्यकर्ताओं को उम्मीदें थी कि पार्टी उन्हें अनुकूल माहौल में चुनाव लड़ने का मौका देगी। टिकट की घोषणा से पहले पार्टी में सबकुछ अनुशासित लग रहा था। आवेदन की पूरी प्रक्रिया गंभीरता से पूरी की गई। यही वजह है कि 33 आवेदन मुजफ्फरनगर और 16 आवेदन खतौली नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए पार्टी के समक्ष प्रस्तुत किए गए। जैसे ही प्रत्याशियों की घोषणा हुई, बखेड़ा खड़ा हो गया।
सूची में कई ऐसे नाम आ गए, जो दूसरे दलों से आए और उनका पार्टी संगठन में भी कोई योगदान नहीं रहा। यही वजह रही कि नेताओं पर टिकट में खरीद-फरोख्त के आरोप लगे। शिवचौक पर महिलाओं कार्यकर्ताओं का 24 घंटे हाईवोल्टेज ड्रामा चला। मामला बिगड़ता देख जिला प्रभारी मंत्री सतीश महाना ने भी किनारा कर लिया।
ऐसे में हाईकमान के निर्देश के बाद जिले के शीर्ष नेताओं को ही महिला कार्यकर्ताओं के घर पहुंचकर उन्हें मनाना पड़ा। वार्ड सदस्यों के चयन में छीछालेदर हुई। पहली सूची में घोषित नामों को एक रात के बाद ही बदल दिया गया, जिसमें नेताओं ने अपने चहेतों के नाम घुसा दिए थे।
सभासद पदों के टिकटों को बेचने के भी आरोप-प्रत्यारोप लगे। लगभग छह से दस वार्डों में भाजपा में कलह का माहौल है। पार्टी के कई पुराने महारथी भी टिकट वितरण में उपेक्षा से खिन्न हैं। प्रत्याशियों के चयन में जिस तरह तमाशा हुआ, उससे संगठन की अपरिपक्वता भी सामने आई।
परदे के पीछे पूरे बवाल को संभालने की जरूरत थी, लेकिन पार्टी चूक गई और पूरा मामला सड़कों पर आ गया। नामांकन के लिए कई ऐसे प्रत्याशी कलक्ट्रेट में विरोध प्रदर्शन करते नजर आए, जिनका पहले टिकट घोषित हुआ, फिर काट दिया गया। ऐसे कई प्रत्याशी निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़कर भाजपा की मुश्किलें बढ़ाएंगे।
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर असमंजस
मुजफ्फरनगर। निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैली को लेकर पार्टी असमंजस में है। 12 नवंबर की रैली 18 में कराए जाने के लिए हाईकमान को लिखा गया है। हाईकमान ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। भाजपा निकाय चुनाव के रण के लिए पूरी तरह तैयार भी नहीं हुई थी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कार्यक्रम आ गया। पार्टी नेता अचानक आए 12 नवंबर के कार्यक्रम से खुद को असहज महसूस कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में टाउनहाल के मैदान में जनसभा करेंगे। पार्टी हाईकमान से आए कार्यक्रम के बाद जिले में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई और उसमें चर्चा के बाद हाईकमान से बात की गई। पार्टी हाईकमान को पत्र भेजकर कहा गया कि अभी चुनाव शुरू हुआ है, ऐसे में शुरुआत में ही रैली से अधिक लाभ नहीं होगा।
चुनावी रैली के लिए 18 नवंबर के लिए समय मांगा गया है। पार्टी हाईकमान ने अभी तक जिले को कोई दूसरा समय नहीं दिया है। हाईकमान के हिसाब से अभी तक जनपद में 12 नवंबर को ही रैली होनी है। पार्टी के कार्यकर्ता रैली को लेकर पशोपेश में हैं। जिलाध्यक्ष रुपेंद्र सैनी का कहना है कि 12 नवंबर को टाउन हाल में सीएम योगी आदित्यनाथ का कार्यक्रम आया है। पार्टी में कार्यक्रम को लेकर मंथन चल रहा है।