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Muzaffarnagar News: सार्वजनिक श्मशान घाट में ही करेंगे दाह संस्कार
Thu, 23 Jan 2025 12:45 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 23 Jan 2025 12:45 AM IST
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खतौली तहसील में वार्ता के बाद शमशान घाट मामले का निपटारा होने के बाद बाहर आते भैंसी के ग्रामीण।
खतौली। गांव भैंसी में चला आ रहा श्मशान घाट का पुराना मामला एसडीएम के प्रयासों से निपट गया। अब वाल्मीकि समाज के लोग सार्वजनिक श्मशान घाट में ही शवों का अंतिम संस्कार करेंगे।
गांव भैंसी में वाल्मीकि समाज के लोग काफी समय से एक किसान के खेत में दाह संस्कार करते चले आ रहे थे, पिछले दिनों किसान ने अपनी भूमि में दाह संस्कार के लिए मना कर दिया था। इसके बाद वाल्मीकि समाज में एक मौत हो गई थी। कुछ ग्रामीणों ने शव को सार्वजनिक श्मशान घाट में न जाने के लिए कहा था। इस बात को लेकर वाल्मीकि समाज के लोगों में रोष बन गया था। तनातनी होने पर पुलिस ने गांव पहुंच कर स्थिति को संभाला था। इसके बाद सार्वजनिक श्मशान घाट में ही वाल्मीकि समाज के लोगों ने दाह संस्कार किया था। इस दौरान ग्राम प्रधान के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करा दिया गया था। श्मशान घाट में जमीन दिलाए जाने के लिए वाल्मीकि समाज के लोग चक्कर काट रहे थे। एसडीएम मोनालिसा जौहरी ने ग्राम प्रधान अमित अहलात, विशाल अहलावत आदि के साथ वाल्मीकि समाज के लोगों की वार्ता कराई। इसके बाद सार्वजनिक श्मशान घाट में ही अंतिम संस्कार करने की सहमति बन गई। एसडीएम ने बताया कि श्मशान घाट का 60 वर्ष से अधिक पुराना विवाद था। जिसको गांव के लोगों के बीच पंचायत करा कर निपटा दिया गया। वार्ता के दौरान सुधीर धामा वाल्मीकि, ब्रजपाल, ऋषिपाल, राजपाल, प्रमोद, राजू, सुरेश, आनंद, संजय आदि मौजूद रहे।
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गांव भैंसी में वाल्मीकि समाज के लोग काफी समय से एक किसान के खेत में दाह संस्कार करते चले आ रहे थे, पिछले दिनों किसान ने अपनी भूमि में दाह संस्कार के लिए मना कर दिया था। इसके बाद वाल्मीकि समाज में एक मौत हो गई थी। कुछ ग्रामीणों ने शव को सार्वजनिक श्मशान घाट में न जाने के लिए कहा था। इस बात को लेकर वाल्मीकि समाज के लोगों में रोष बन गया था। तनातनी होने पर पुलिस ने गांव पहुंच कर स्थिति को संभाला था। इसके बाद सार्वजनिक श्मशान घाट में ही वाल्मीकि समाज के लोगों ने दाह संस्कार किया था। इस दौरान ग्राम प्रधान के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करा दिया गया था। श्मशान घाट में जमीन दिलाए जाने के लिए वाल्मीकि समाज के लोग चक्कर काट रहे थे। एसडीएम मोनालिसा जौहरी ने ग्राम प्रधान अमित अहलात, विशाल अहलावत आदि के साथ वाल्मीकि समाज के लोगों की वार्ता कराई। इसके बाद सार्वजनिक श्मशान घाट में ही अंतिम संस्कार करने की सहमति बन गई। एसडीएम ने बताया कि श्मशान घाट का 60 वर्ष से अधिक पुराना विवाद था। जिसको गांव के लोगों के बीच पंचायत करा कर निपटा दिया गया। वार्ता के दौरान सुधीर धामा वाल्मीकि, ब्रजपाल, ऋषिपाल, राजपाल, प्रमोद, राजू, सुरेश, आनंद, संजय आदि मौजूद रहे।
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