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नीली बत्ती लगी कार से ढो रहे सवारी 

Sun, 11 Sep 2016 01:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Sun, 11 Sep 2016 01:18 AM IST
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Carry out official car ride
नीली बत्ती लगी कार में बैठती सवारियां। - फोटो : अमर उजाला
समय करीब 11 बजे। मेरठ-करनाल हाईवे पर बायवाला चौकी के पास नीली बत्ती लगी एक सफेद रंग की बोलेरो आकर रुकती है। यकायक लोगों को किसी अफसर के आने का आभास होता है, लेकिन तभी बोलेरो का चालक मेरठ जाने वाली सवारियों को बैठने के लिए आवाज लगाता है।
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शुरू में लोग ठिठके, लेकिन जब उसने प्रति सवारी किराया बताया तो पुरुषों के साथ कुछ महिलाएं भी कार में सवार हो गईं। पूरे वाकये के दौरान चालक को यह अहसास भी नहीं हुआ कि वहां खड़े किसी राहगीर ने उसके कारनामे को मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया है। इतना ही नहीं कुछ ही देर में यह तस्वीरें वॉट्सअप पर वायरल हो गईं। 
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दिनभर चलती रही छानबीन
फोटो वायरल होते ही प्रशासन भी हरकत में आ गया। सीओ बुढ़ाना को गाड़ी का पता करने के लिए लगाया गया। इसी बीच तमाम अफसरों के फोन घनघनाने लगे। चूंकि गाड़ी शामली की ओर से आई थी, इसलिए संभावना जताई गई कि गाड़ी शामली के किसी अफसर की है।
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गाड़ी पर नीली बत्ती लगी होने के साथ ही आगे उत्तर प्रदेश सरकार भी लिखा था। एआरटीओ शामली मोहम्मद कय्यूम से गाड़ी की जानकारी ली गई, लेकिन वह भी स्पष्ट नहीं कर पाए। उन्होंने यह कयास भी लगाए कि हो सकता है कि गाड़ी के चालक का कोई रिश्तेदार वहां खड़ा हो, जिसे देखकर उसने गाड़ी रोकी और उन्हें बैठाकर चला गया। 

बीएसए की निकली गाड़ी, डीएम सख्त 
काफी छानबीन के बाद शाम तक स्पष्ट हुआ कि गाड़ी बेसिक शिक्षा अधिकारी की है। मुजफ्फरनगर के अफसरों ने शामली जिला प्रशासन से बात की। नीली बत्ती लगी सरकारी गाड़ी में सवारी ढोने के मामले को डीएम शामली सुजीत कुमार ने मामले को बेहद गंभीर माना है।


उन्होंने बीएसए शामली चंद्रशेखर को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कहा कि यह अत्यंत आपत्तिजनक है और सरकार की छवि को धूमिल करने का दुस्साहस भी है। उन्होंने तत्काल स्पष्टीकरण मांगा है। इस संबंध में बीएसए चंद्रशेखर से बात की गई तो उन्होंने यह माना कि उनका ड्राइवर गाड़ी ठीक कराने मेरठ गया था, लेकिन गाड़ी से सवारियां ढोने की जानकारी होने से उन्होंने इंकार कर दिया। 
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