{"_id":"62e8199fcf3efa38917d1a18","slug":"buses-closed-people-traveling-by-horse-carriage-muzaffarnagar-news-mrt599429054","type":"story","status":"publish","title_hn":"बसें बंद, घोड़ा-बुग्गी से आवाजाही कर रहे लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बसें बंद, घोड़ा-बुग्गी से आवाजाही कर रहे लोग
विज्ञापन
बसें बंद, घोड़ा-बुग्गी से आवाजाही कर रहे लोग
पुरकाजी। रोडवेज की बसों का संचालन नहीं होने से खादर क्षेत्र के लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों को ई-रिक्शा, घोड़ा-बुग्गी आदि में बैठकर ही पुरकाजी तक पहुंचना पड़ता है। उसके बाद बसों व डग्गामार वाहनों में बैठकर मुख्यालय तक पहुंचना पड़ता है।
धमात गंग नहर पुल पर लोहे के गार्डर लगे होने के कारण प्राइवेट बसों के चालकों ने सवारियों को पुल पार ही उतारना शुरू कर दिया है। सवारियों को ई-रिक्शा में बैठकर पुरकाजी तक पहुंचना पड़ता है। करीब 17 वर्ष पूर्व तक मुजफ्फरनगर से वाया पुरकाजी होते हुए खादर क्षेत्र के गांव शेरपुर बढ़िवाला तक रोडवेज बसों का संचालन होता रहा है, जो वर्ष 2015 से बंद है। ग्रामीणों ने कई बार परिवहन विभाग के अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से रोडवेज की बसों का संचालन कराने की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बसों का संचालन नहीं होने से खादर क्षेत्र के गांव बढ़िवाला, शेरपुर, चांचक भदौला, मार्कपुर, सुहेली, अलमावाला, जिंदवाला, खेड़की, झबरपुर, हरिनगर, समसो, सुवाहेड़ी आदि के करीब 50 हजार लोगों को ई-रिक्शा और घोड़ा-बुग्गी आदि से पुरकाजी तक आना पड़ता है।
जनहित के लिए जरूरी है बसों का संचालन
खादर क्षेत्र के ग्रामीण देवेंद्र खालसा, सुनील बारी, सरदार जोगेंद्र सिंह, कुलवंत सिंह, सतनाम सिंह, राजू प्रजापति, राजेंद्र पांचली आदि का कहना है कि रोडवेज की बसें नहीं चलने से क्षेत्र के लोग बेहद परेशान हैं। क्षेत्र के गांव शकरपुर, नूरनगर, कल्लनपुर, मेघा, गोधना, नगला दुहेली आदि में भी रोडवेज की बसों का संचालन नहीं होने से ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मनोज चौहान, रतन सिंह चेयरमैन, अर्पित गुप्ता, अशोक कुमार, सुरेंद्र सिंह, दिलशाद राणा, हाफिज मोहसिन आदि ग्रामीणों का कहना है कि जनहित में रोडवेज की बसों का संचालन होना जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पुरकाजी। रोडवेज की बसों का संचालन नहीं होने से खादर क्षेत्र के लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों को ई-रिक्शा, घोड़ा-बुग्गी आदि में बैठकर ही पुरकाजी तक पहुंचना पड़ता है। उसके बाद बसों व डग्गामार वाहनों में बैठकर मुख्यालय तक पहुंचना पड़ता है।
धमात गंग नहर पुल पर लोहे के गार्डर लगे होने के कारण प्राइवेट बसों के चालकों ने सवारियों को पुल पार ही उतारना शुरू कर दिया है। सवारियों को ई-रिक्शा में बैठकर पुरकाजी तक पहुंचना पड़ता है। करीब 17 वर्ष पूर्व तक मुजफ्फरनगर से वाया पुरकाजी होते हुए खादर क्षेत्र के गांव शेरपुर बढ़िवाला तक रोडवेज बसों का संचालन होता रहा है, जो वर्ष 2015 से बंद है। ग्रामीणों ने कई बार परिवहन विभाग के अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से रोडवेज की बसों का संचालन कराने की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बसों का संचालन नहीं होने से खादर क्षेत्र के गांव बढ़िवाला, शेरपुर, चांचक भदौला, मार्कपुर, सुहेली, अलमावाला, जिंदवाला, खेड़की, झबरपुर, हरिनगर, समसो, सुवाहेड़ी आदि के करीब 50 हजार लोगों को ई-रिक्शा और घोड़ा-बुग्गी आदि से पुरकाजी तक आना पड़ता है।
विज्ञापन
जनहित के लिए जरूरी है बसों का संचालन
खादर क्षेत्र के ग्रामीण देवेंद्र खालसा, सुनील बारी, सरदार जोगेंद्र सिंह, कुलवंत सिंह, सतनाम सिंह, राजू प्रजापति, राजेंद्र पांचली आदि का कहना है कि रोडवेज की बसें नहीं चलने से क्षेत्र के लोग बेहद परेशान हैं। क्षेत्र के गांव शकरपुर, नूरनगर, कल्लनपुर, मेघा, गोधना, नगला दुहेली आदि में भी रोडवेज की बसों का संचालन नहीं होने से ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मनोज चौहान, रतन सिंह चेयरमैन, अर्पित गुप्ता, अशोक कुमार, सुरेंद्र सिंह, दिलशाद राणा, हाफिज मोहसिन आदि ग्रामीणों का कहना है कि जनहित में रोडवेज की बसों का संचालन होना जरूरी है।
विज्ञापन