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राष्ट्रीय एकता को वैदिक संस्कृति से जुड़े युवा शक्ति
Updated Sun, 01 Apr 2018 11:44 PM IST
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वैदिक आश्रम के वार्षिकोत्सव का समापन
तितावी। वैदिक आश्रम अलीपुर कलां के दो दिवसीय वार्षिकोत्सव में देश की एकता, अखंडता और रक्षा को वैदिक संस्कृति से युवा शक्ति को जोड़ने का आह्वान किया गया। समाज में आर्य समाज की चेतना जगाने को आचार्य गुरुदत्त आर्य को सम्मानित किया गया। इस मौके पर इंजीनियर करण सिंह की पुस्तक वेद परिचय का विमोचन अतिथियों ने किया।
वार्षिकोत्सव के समापन समारोह में डॉ धीरज कुमार आर्य ने कहा कि आचरण की श्रेष्ठता ही धर्म है। सत्य, मर्यादित और पवित्र व्यवहार तथा आचरण होगा तो समाज से अधर्म, पाप, अत्याचार मिट जाएगा। धर्म के लक्षण त्याग, सेवा, परोपकार, दान, अनुशासन, ईमानदारी, देशभक्ति आदि है। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वैदिक संस्कृति संसार में सबसे प्राचीन है। वेदों के ज्ञान-विज्ञान से ही भारत के दर्शन, संस्कृति और संस्कारों की महत्ता दुनिया ने स्वीकारी है। वेद ईश्वरीय वाणी है। आर्यमुनि वानप्रस्थी ने कहा कि यज्ञ और योग से युवा अपने जीवन को ऊर्जावान बनाए। स्वामी सत्यवेश ने कहा कि ऋषि दयानंद के समाज सुधार अभियान की आज ज्यादा जरूरत है। श्रेष्ठ सत्संग से जीवन बदलता है। पीतम सिंह आर्य, सत्यपाल जिज्ञासु ने बच्चों को संस्कृति से जोड़ने का संदेश दिया। वैदिक प्रतियोगिता के विजेता बच्चों को डॉ हरेंद्र सिंह अहलावत ने पुरस्कृत किया। पूर्व बीएसए एवं साहित्यकार हरपाल सिंह अरुष तथा वानप्रस्थी अजब सिंह आर्य को संस्था ने सम्मानित किया। मोहित आर्य ने भजन सुनाए। संसार सिंह आर्य, राजबीर सिंह आर्य, डॉ महेंद्र सिंह शास्त्री, इंजीनियर रामेश्वर दयाल, इंद्रपाल सिंह, सोरण सिंह आर्य, राजेंद्र सिंह आर्य, आरपी शर्मा, आनंदपाल आर्य, जाट महासभा जिलाध्यक्ष देवी सिंह , आनंद पाल सिंह, डॉ. अश्वनी आर्य आदि मौजूद रहे। यज्ञमान पुष्पेंद्र आर्य रहे। संचालन आर्य मुनि ने किया।
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तितावी। वैदिक आश्रम अलीपुर कलां के दो दिवसीय वार्षिकोत्सव में देश की एकता, अखंडता और रक्षा को वैदिक संस्कृति से युवा शक्ति को जोड़ने का आह्वान किया गया। समाज में आर्य समाज की चेतना जगाने को आचार्य गुरुदत्त आर्य को सम्मानित किया गया। इस मौके पर इंजीनियर करण सिंह की पुस्तक वेद परिचय का विमोचन अतिथियों ने किया।
वार्षिकोत्सव के समापन समारोह में डॉ धीरज कुमार आर्य ने कहा कि आचरण की श्रेष्ठता ही धर्म है। सत्य, मर्यादित और पवित्र व्यवहार तथा आचरण होगा तो समाज से अधर्म, पाप, अत्याचार मिट जाएगा। धर्म के लक्षण त्याग, सेवा, परोपकार, दान, अनुशासन, ईमानदारी, देशभक्ति आदि है। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वैदिक संस्कृति संसार में सबसे प्राचीन है। वेदों के ज्ञान-विज्ञान से ही भारत के दर्शन, संस्कृति और संस्कारों की महत्ता दुनिया ने स्वीकारी है। वेद ईश्वरीय वाणी है। आर्यमुनि वानप्रस्थी ने कहा कि यज्ञ और योग से युवा अपने जीवन को ऊर्जावान बनाए। स्वामी सत्यवेश ने कहा कि ऋषि दयानंद के समाज सुधार अभियान की आज ज्यादा जरूरत है। श्रेष्ठ सत्संग से जीवन बदलता है। पीतम सिंह आर्य, सत्यपाल जिज्ञासु ने बच्चों को संस्कृति से जोड़ने का संदेश दिया। वैदिक प्रतियोगिता के विजेता बच्चों को डॉ हरेंद्र सिंह अहलावत ने पुरस्कृत किया। पूर्व बीएसए एवं साहित्यकार हरपाल सिंह अरुष तथा वानप्रस्थी अजब सिंह आर्य को संस्था ने सम्मानित किया। मोहित आर्य ने भजन सुनाए। संसार सिंह आर्य, राजबीर सिंह आर्य, डॉ महेंद्र सिंह शास्त्री, इंजीनियर रामेश्वर दयाल, इंद्रपाल सिंह, सोरण सिंह आर्य, राजेंद्र सिंह आर्य, आरपी शर्मा, आनंदपाल आर्य, जाट महासभा जिलाध्यक्ष देवी सिंह , आनंद पाल सिंह, डॉ. अश्वनी आर्य आदि मौजूद रहे। यज्ञमान पुष्पेंद्र आर्य रहे। संचालन आर्य मुनि ने किया।
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