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एनआरएचएम बनाएगा जिले मं तीन अस्पताल
Updated Sat, 20 Jan 2018 12:33 AM IST
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मुजफ्फरनगर।
गांव-गांव चिकित्सा सुविधा को बेहतर करने के लिए तीन अस्पताल बनाने मसौदा तैयार किया गया है। इनमें दो अस्पताल 50 बेड के हैं, जबकि एक 30 बेड का बनेगा। तीनों अस्पतालों का निर्माण एनएचएम के तहत किया जाएगा। इनमें अनुमानित खर्च करीब 20 करोड़ रुपये होगा। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों के निर्माण के लिए प्रपोजल बनाकर शासन को भेज दिया है। हालांकि प्रथम दृष्टया सीएचसी की भूमि का परीक्षण किया जा रहा है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की टीम ने गांवों में सर्वे किया है। अधिकांश ग्रामीण स्तर पर चिकित्सकीय सुविधाएं मुकम्मल नहीं हैं। जिसके चलते ग्रामीणों को बीमारियों के इलाज के लिए शहर की दौड़ लगानी पड़ती है। इससे पैसे के साथ समय की बर्बादी अधिक होती है। ग्रामीणों को इससे निजात दिलाने और घर-गांव में ही बेहतर चिकित्सकीय सुविधा देने का मसौदा बनाया गया है। इसके लिए नए सिरे अस्पतालों का निर्माण होगा। चरथावल और जानसठ में 50 बेड का नया अस्पताल बनाने के साथ भोपा क्षेत्र में 30 बेड का अस्पताल बनाया जाएगा। यह तीनों अस्पताल एनएचएम के तहत बनाए जाएंगे। 50 बेड के अस्पताल के लिए विभाग को 1500 वर्ग मीटर भूमि चाहिए, जबकि 30 बेड के अस्पताल की बिल्डिंग खड़ी करने में 1200 वर्ग मीटर जमीन की जरूरत है। दो अस्पतालों पर 15 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जबकि भोपा में सवा चार करोड़ रुपये की लागत से अस्पताल बनाया जाएगा। विभाग की निर्माण इकाई ने अस्पतालों को प्रपोजल बनाकर शासन को भेजा है। अस्पताल निर्माण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने भूमि की तलाश शुरू कर दी है। सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा ने बताया कि तीन नए अस्पतालों के निर्माण का प्रपोजल बनाया गया है। चरथावल, जानसठ के साथ भोपा में नए अस्पताल बनाए जाएंगे, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।
जानसठ-चरथावल में है सीएचसी
मुजफ्फरनगर। जानसठ और चरथावल में पहले से ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। हालांकि मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इसके अलावा भोपा में पीएचसी है, जो मौजूदा समय में मरीजों का भार नहीं उठा पा रही है। इसके चलते यहां नया अस्पताल बनाकर ग्रामीणों को राहत मिलेगी। हालांकि इन्हें बंद नहीं किया जाएगा।
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पीपीपी मॉडल पर चलने की संभावना
मुजफ्फरनगर। एनएचएम के तहत बनने वाले तीनों अस्पतालों को पीपीपी मॉडल पर संचालन की संभावना है। क्योंकि सरकार के पास संसाधनों के साथ चिकित्सकों का बड़ा टोटा है। इसके चलते इन तीनों अस्पतालों में स्टाफ को लेकर अटकले हैं। ऐसे में इन्हें पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप में चलाया जा सकता है।
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गांव-गांव चिकित्सा सुविधा को बेहतर करने के लिए तीन अस्पताल बनाने मसौदा तैयार किया गया है। इनमें दो अस्पताल 50 बेड के हैं, जबकि एक 30 बेड का बनेगा। तीनों अस्पतालों का निर्माण एनएचएम के तहत किया जाएगा। इनमें अनुमानित खर्च करीब 20 करोड़ रुपये होगा। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों के निर्माण के लिए प्रपोजल बनाकर शासन को भेज दिया है। हालांकि प्रथम दृष्टया सीएचसी की भूमि का परीक्षण किया जा रहा है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की टीम ने गांवों में सर्वे किया है। अधिकांश ग्रामीण स्तर पर चिकित्सकीय सुविधाएं मुकम्मल नहीं हैं। जिसके चलते ग्रामीणों को बीमारियों के इलाज के लिए शहर की दौड़ लगानी पड़ती है। इससे पैसे के साथ समय की बर्बादी अधिक होती है। ग्रामीणों को इससे निजात दिलाने और घर-गांव में ही बेहतर चिकित्सकीय सुविधा देने का मसौदा बनाया गया है। इसके लिए नए सिरे अस्पतालों का निर्माण होगा। चरथावल और जानसठ में 50 बेड का नया अस्पताल बनाने के साथ भोपा क्षेत्र में 30 बेड का अस्पताल बनाया जाएगा। यह तीनों अस्पताल एनएचएम के तहत बनाए जाएंगे। 50 बेड के अस्पताल के लिए विभाग को 1500 वर्ग मीटर भूमि चाहिए, जबकि 30 बेड के अस्पताल की बिल्डिंग खड़ी करने में 1200 वर्ग मीटर जमीन की जरूरत है। दो अस्पतालों पर 15 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जबकि भोपा में सवा चार करोड़ रुपये की लागत से अस्पताल बनाया जाएगा। विभाग की निर्माण इकाई ने अस्पतालों को प्रपोजल बनाकर शासन को भेजा है। अस्पताल निर्माण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने भूमि की तलाश शुरू कर दी है। सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा ने बताया कि तीन नए अस्पतालों के निर्माण का प्रपोजल बनाया गया है। चरथावल, जानसठ के साथ भोपा में नए अस्पताल बनाए जाएंगे, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।
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जानसठ-चरथावल में है सीएचसी
मुजफ्फरनगर। जानसठ और चरथावल में पहले से ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। हालांकि मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इसके अलावा भोपा में पीएचसी है, जो मौजूदा समय में मरीजों का भार नहीं उठा पा रही है। इसके चलते यहां नया अस्पताल बनाकर ग्रामीणों को राहत मिलेगी। हालांकि इन्हें बंद नहीं किया जाएगा।
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पीपीपी मॉडल पर चलने की संभावना
मुजफ्फरनगर। एनएचएम के तहत बनने वाले तीनों अस्पतालों को पीपीपी मॉडल पर संचालन की संभावना है। क्योंकि सरकार के पास संसाधनों के साथ चिकित्सकों का बड़ा टोटा है। इसके चलते इन तीनों अस्पतालों में स्टाफ को लेकर अटकले हैं। ऐसे में इन्हें पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप में चलाया जा सकता है।