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सदाचरण से ही सुदृढ बनेगा समाज
Updated Sun, 07 Oct 2018 11:28 PM IST
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सदाचार से ही सुदृढ़ बनेगा समाज
तितावी (मुजफ्फरनगर)। आर्य समाज ढिंढावली के तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव का शुभारंभ वैदिक संस्कृति को अपनाने के संकल्प के साथ हुआ। आर्य वैदिक कन्या इंटर कॉलेज की छात्राओं ने वेदपाठ किया।
क्षेत्र के गांव ढिंढावली में आर्य समाज के सम्मेलन में आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि सत्य, न्याय और सदाचरण से ही समाज सुदृढ़ बनेगा। वेद ईश्वरीय वाणी है। चार ऋषियों अग्नि, वायु, आदित्य और अंगिरा ने वेदों की रचना की। वेदानुकूल आचरण बनाने से संस्कृति, संस्कार, सभ्यता और अध्यात्म समृद्ध होगा। आर्य मुनि वानप्रस्थी ने देवयज्ञ, संध्या की महत्ता बताई। स्वामी सत्यवेश ने कहा कि अज्ञान, अविद्या, अन्याय, अत्याचार, पाखंड, अंधविश्वास और कुरीतियां वेदों की उपेक्षा से बढ़ी हैं। दिल्ली से आए आचार्य अजीत कुमार ने कहा कि अभिभावक बच्चों को बाल्य अवस्था से ही परिश्रम, चरित्र, सदाचार, देशभक्ति और सेवा की शिक्षा दें। भजनोपदेशक अशोक प्रबोध आर्य, ललिता आर्य ने महर्षि दयानंद के जीवन दर्शन पर आधारित भजन प्रस्तुत किए। डॉ धीरज कुमार आर्य, हरिकिशन, ऋषिपाल सिंह, प्रेमसिंह फौजी, डॉ रविंद्र आर्य, यतेंद्र आर्य, संजीव कुमार, सीताराम शर्मा, राजवीर सिंह आर्य आदि मौजूद रहे। इससे पूर्व, यज्ञ में ग्रामीणों ने आहुतियां दी। यज्ञमान ब्रहमपाल सिंह आर्य सपत्नीक रहे। प्रधानाचार्या कौशल्या देवी के नेतृत्व में छात्राओं ने वेदपाठ किया।
आर्य विद्वानों को किया सम्मानित
तितावी। वैदिक प्रचार और उत्कृष्ट सेवा कार्यों के लिए आर्य समाज ढिंढावली ने आर्य विद्वानों का अभिनंदन किया। संयोजक संसार सिंह आर्य, चरण सिंह आर्य, सतीश कुमार आर्य ने शॉल ओढ़ाकर वैदिक साहित्य भेंट किया। सम्मानित महानुभाव ने आर्य मुनि वानप्रस्थी, आचार्य गुरुदत्त आर्य, वैदिक आश्रम अलीपुर खेडी के सत्यमुनि, आचार्य अजीत कुमार शामिल है।
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तितावी (मुजफ्फरनगर)। आर्य समाज ढिंढावली के तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव का शुभारंभ वैदिक संस्कृति को अपनाने के संकल्प के साथ हुआ। आर्य वैदिक कन्या इंटर कॉलेज की छात्राओं ने वेदपाठ किया।
क्षेत्र के गांव ढिंढावली में आर्य समाज के सम्मेलन में आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि सत्य, न्याय और सदाचरण से ही समाज सुदृढ़ बनेगा। वेद ईश्वरीय वाणी है। चार ऋषियों अग्नि, वायु, आदित्य और अंगिरा ने वेदों की रचना की। वेदानुकूल आचरण बनाने से संस्कृति, संस्कार, सभ्यता और अध्यात्म समृद्ध होगा। आर्य मुनि वानप्रस्थी ने देवयज्ञ, संध्या की महत्ता बताई। स्वामी सत्यवेश ने कहा कि अज्ञान, अविद्या, अन्याय, अत्याचार, पाखंड, अंधविश्वास और कुरीतियां वेदों की उपेक्षा से बढ़ी हैं। दिल्ली से आए आचार्य अजीत कुमार ने कहा कि अभिभावक बच्चों को बाल्य अवस्था से ही परिश्रम, चरित्र, सदाचार, देशभक्ति और सेवा की शिक्षा दें। भजनोपदेशक अशोक प्रबोध आर्य, ललिता आर्य ने महर्षि दयानंद के जीवन दर्शन पर आधारित भजन प्रस्तुत किए। डॉ धीरज कुमार आर्य, हरिकिशन, ऋषिपाल सिंह, प्रेमसिंह फौजी, डॉ रविंद्र आर्य, यतेंद्र आर्य, संजीव कुमार, सीताराम शर्मा, राजवीर सिंह आर्य आदि मौजूद रहे। इससे पूर्व, यज्ञ में ग्रामीणों ने आहुतियां दी। यज्ञमान ब्रहमपाल सिंह आर्य सपत्नीक रहे। प्रधानाचार्या कौशल्या देवी के नेतृत्व में छात्राओं ने वेदपाठ किया।
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आर्य विद्वानों को किया सम्मानित
तितावी। वैदिक प्रचार और उत्कृष्ट सेवा कार्यों के लिए आर्य समाज ढिंढावली ने आर्य विद्वानों का अभिनंदन किया। संयोजक संसार सिंह आर्य, चरण सिंह आर्य, सतीश कुमार आर्य ने शॉल ओढ़ाकर वैदिक साहित्य भेंट किया। सम्मानित महानुभाव ने आर्य मुनि वानप्रस्थी, आचार्य गुरुदत्त आर्य, वैदिक आश्रम अलीपुर खेडी के सत्यमुनि, आचार्य अजीत कुमार शामिल है।
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