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श्रीराम कथा का अंतिम दिन समापन-
Updated Mon, 14 Aug 2017 01:43 AM IST
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खतौली(मुजफ्फरनगर)। मंडी धर्मशाला में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा पांच दिवसीय श्रीराम कथा के अंतिम दिन कथा व्यास साध्वी प्रभा भारती ने रावण वध एवं रामराज्य की स्थापना का सार सुनाया।
पांचवें दिन कथा का शुभारंभ अनुराधा रस्तोगी, डॉली बंसल एवं महिपाल वालिया द्वारा दीप प्रज्ज्वलन करके किया। कथा वाचक साध्वी ने कहा कि रावण एक महान विद्वान पंडित होने के बाद भी प्रभु राम को जान नहीं सका और अपने अहंकार वश सब कुछ गंवा बैठा। वहीं दूसरी ओर विभीषण ने अधर्म का साथ छोड़ धर्म का साथ दिया और रावण की मृत्यु का रहस्य उजागर कर राम को सदा सदा के लिए प्राप्त कर लिया। विभीषण और रावण एक ही कुल के थे, अगर विभीषण राम को प्राप्त कर पाया तो उसका कारण संत की संगति थी। विभीषण के जीवन में जब हनुमान रूपी संत का आगमन हुआ तब विभीषण में विवेक और भक्ति का जन्म हुआ। रामराज्य की स्थापना बिना हनुमान रूपी संत के असंभव है।
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पांचवें दिन कथा का शुभारंभ अनुराधा रस्तोगी, डॉली बंसल एवं महिपाल वालिया द्वारा दीप प्रज्ज्वलन करके किया। कथा वाचक साध्वी ने कहा कि रावण एक महान विद्वान पंडित होने के बाद भी प्रभु राम को जान नहीं सका और अपने अहंकार वश सब कुछ गंवा बैठा। वहीं दूसरी ओर विभीषण ने अधर्म का साथ छोड़ धर्म का साथ दिया और रावण की मृत्यु का रहस्य उजागर कर राम को सदा सदा के लिए प्राप्त कर लिया। विभीषण और रावण एक ही कुल के थे, अगर विभीषण राम को प्राप्त कर पाया तो उसका कारण संत की संगति थी। विभीषण के जीवन में जब हनुमान रूपी संत का आगमन हुआ तब विभीषण में विवेक और भक्ति का जन्म हुआ। रामराज्य की स्थापना बिना हनुमान रूपी संत के असंभव है।
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