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जन-गण-मन की भावना से करें पूजा
Updated Sat, 08 Jul 2017 01:19 AM IST
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जन-गण-मन की भावना से करें पूजा
मुजफ्फरनगर। श्री परमधाम न्यास में शुक्रवार को जनेऊ क्रांति महोत्सव मनाया गया। जिसमें अनुयायियों ने भाग लेकर महोत्सव में क्रांतिकारियों को नमन किया। इस दौरान पूर्ण गुरु चंद्रमोहन जी महाराज ने कहा कि कहा कि जन, गण, मन को मजबूत करने की भावना रखते हुए परमात्मा की पूजा करें।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान से किया गया। इसके बाद क्रांतिकारियों की महाआरती की गई। अनुयायियों ने हर्षोल्लास से जनेऊ महोत्सव में भाग लिया। पूर्ण गुरु चंद्रमोहन महाराज ने कहा कि जिसके दिल में मानवतावाद पूरी तरह से स्थापित है। वह गणतंत्र (लोकतंत्र) परमात्मा को बहुत प्रिय है। जनेऊ के तीन सूत्र - ज ने ऊँ जन, गण, मन को मजबूत करने व देव ऋण, पितृ ऋण व गुरु ऋण से मुक्त होने के सूत्र हैं। गण मजबूत होगा नैतिकता धारण करने से, गण का अर्थ होता है समूह, जिस समूह में नैतिकता आ जाती है उस समूह को समाज कहते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा बिना दीक्षा के अधूरी है। शिक्षा से केवल दो चीजों की प्राप्ति होती है रोजगार और अस्थाई सम्मान परंतु दीक्षा से हमें पाँच चीजें मिलती है। स्वास्थ्य, सुरक्षा, स्वाभिमान, सम्मान और शांति। दीक्षा के समय पूरा महापुरुष जनेऊँ धारण करवाता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, मेरठ, दौराला, मुजफ्फरनगर समेत विभिन्न क्षेत्रों से अनुयायियों ने भाग लिया।
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मुजफ्फरनगर। श्री परमधाम न्यास में शुक्रवार को जनेऊ क्रांति महोत्सव मनाया गया। जिसमें अनुयायियों ने भाग लेकर महोत्सव में क्रांतिकारियों को नमन किया। इस दौरान पूर्ण गुरु चंद्रमोहन जी महाराज ने कहा कि कहा कि जन, गण, मन को मजबूत करने की भावना रखते हुए परमात्मा की पूजा करें।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान से किया गया। इसके बाद क्रांतिकारियों की महाआरती की गई। अनुयायियों ने हर्षोल्लास से जनेऊ महोत्सव में भाग लिया। पूर्ण गुरु चंद्रमोहन महाराज ने कहा कि जिसके दिल में मानवतावाद पूरी तरह से स्थापित है। वह गणतंत्र (लोकतंत्र) परमात्मा को बहुत प्रिय है। जनेऊ के तीन सूत्र - ज ने ऊँ जन, गण, मन को मजबूत करने व देव ऋण, पितृ ऋण व गुरु ऋण से मुक्त होने के सूत्र हैं। गण मजबूत होगा नैतिकता धारण करने से, गण का अर्थ होता है समूह, जिस समूह में नैतिकता आ जाती है उस समूह को समाज कहते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा बिना दीक्षा के अधूरी है। शिक्षा से केवल दो चीजों की प्राप्ति होती है रोजगार और अस्थाई सम्मान परंतु दीक्षा से हमें पाँच चीजें मिलती है। स्वास्थ्य, सुरक्षा, स्वाभिमान, सम्मान और शांति। दीक्षा के समय पूरा महापुरुष जनेऊँ धारण करवाता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, मेरठ, दौराला, मुजफ्फरनगर समेत विभिन्न क्षेत्रों से अनुयायियों ने भाग लिया।
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