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40 साल से अभिशप्त है चेयरमैन की कुर्सी
Updated Tue, 31 Oct 2017 01:11 AM IST
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मुजफ्फरनगर। इसे महज इत्तेफाक कहें या कुछ और, नगर पालिका परिषद में पिछले 40 सालों से कोई भी चेयरमैन अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पा रहा है। फरवरी 1973 में जीते विद्या भूषण के बाद जितने भी चेयरमैन आए सभी को बीच में ही कुर्सी गंवानी पड़ी। इस बीच तीन बार बीजेपी और दो बार कांग्रेस के प्रत्याशी चेयरमैन का चुनाव जीते। बीच में 12 साल तक चुनाव भी नहीं हुए।
नगर पालिका परिषद के चुनाव में 17 फरवरी 1973 को विद्या भूषण ने शपथ ली थी। उनका कार्यकाल 11 अगस्त 1977 तक चला। विद्या भूषण के बाद दस फरवरी 1989 को चुनाव हुए। इस चुनाव में लक्ष्मीचंद सिंघल जीते। 12 जून 1990 को उन्हें हटा दिया गया। इस बीच अनिल तायल के पास चार्ज रहा। उन्हें 29 जुलाई 1992 को दोबारा चार्ज मिल पाया। उनका कार्यकाल छह फरवरी 1994 को पूरा हुआ। आठ माह तक चुनाव नहीं हुआ, इसके बाद एक दिसंबर 1995 को बीजेपी के डॉ सुभाषचंद शर्मा ने शपथ ली। शर्मा को दस दिसंबर 1999 को हटा दिया गया। इस बीच पालिका में प्रशासक नियुक्त हो गया। एक दिसंबर 2000 को भाजपा के जगदीश भाटिया को चेयरमैन की कुर्सी मिली। 18 दिसंबर 2004 को इन्हें भी आरोपों के चलते हटा दिया गया। कुछ दिन बाद उन्हें दोबारा चार्ज मिला।
इसके बाद 16 नवंबर 2006 को बीजेपी के कपिलदेव अग्रवाल ने चुनाव जीतकर चेयरमैन पद की शपथ ली। एक जून 2009 को आरोपों के चलते उन्हें भी हटाया गया और प्रशासक तैनात हुआ। हालांकि एक माह बाद उन्हें फिर से चार्ज मिला। इसके बाद कांग्रेस के पंकज अग्रवाल चुनाव जीते और उन्होंने 18 जुलाई 2012 में चेयरमैन पद की शपथ ली। कार्यकाल पूरा होने से चार माह पहले ही उनके अधिकार भी सीज कर दिए गए। विद्या भूषण के बाद से एक भी चेयरमैन ऐसा नहीं है जो बीते 40 सालों में अपना कार्यकाल पूरा कर पाया हो।
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पहली बार पालिका की कुर्सी पर बैठेगी महिला
मुजफ्फरनगर। देश की आजादी से लेकर आज तक नगर पालिका मुजफ्फरनगर के अध्यक्ष पद पर किसी महिला ने चुनाव नहीं जीता। यही वजह रही कि पालिकाध्यक्ष पद पर कभी महिला नहीं बैठ पाई। पालिका के इतिहास में पहली बार नगर पालिका की चेयरमैन महिला होगी।
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नगर पालिका परिषद के चुनाव में 17 फरवरी 1973 को विद्या भूषण ने शपथ ली थी। उनका कार्यकाल 11 अगस्त 1977 तक चला। विद्या भूषण के बाद दस फरवरी 1989 को चुनाव हुए। इस चुनाव में लक्ष्मीचंद सिंघल जीते। 12 जून 1990 को उन्हें हटा दिया गया। इस बीच अनिल तायल के पास चार्ज रहा। उन्हें 29 जुलाई 1992 को दोबारा चार्ज मिल पाया। उनका कार्यकाल छह फरवरी 1994 को पूरा हुआ। आठ माह तक चुनाव नहीं हुआ, इसके बाद एक दिसंबर 1995 को बीजेपी के डॉ सुभाषचंद शर्मा ने शपथ ली। शर्मा को दस दिसंबर 1999 को हटा दिया गया। इस बीच पालिका में प्रशासक नियुक्त हो गया। एक दिसंबर 2000 को भाजपा के जगदीश भाटिया को चेयरमैन की कुर्सी मिली। 18 दिसंबर 2004 को इन्हें भी आरोपों के चलते हटा दिया गया। कुछ दिन बाद उन्हें दोबारा चार्ज मिला।
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इसके बाद 16 नवंबर 2006 को बीजेपी के कपिलदेव अग्रवाल ने चुनाव जीतकर चेयरमैन पद की शपथ ली। एक जून 2009 को आरोपों के चलते उन्हें भी हटाया गया और प्रशासक तैनात हुआ। हालांकि एक माह बाद उन्हें फिर से चार्ज मिला। इसके बाद कांग्रेस के पंकज अग्रवाल चुनाव जीते और उन्होंने 18 जुलाई 2012 में चेयरमैन पद की शपथ ली। कार्यकाल पूरा होने से चार माह पहले ही उनके अधिकार भी सीज कर दिए गए। विद्या भूषण के बाद से एक भी चेयरमैन ऐसा नहीं है जो बीते 40 सालों में अपना कार्यकाल पूरा कर पाया हो।
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पहली बार पालिका की कुर्सी पर बैठेगी महिला
मुजफ्फरनगर। देश की आजादी से लेकर आज तक नगर पालिका मुजफ्फरनगर के अध्यक्ष पद पर किसी महिला ने चुनाव नहीं जीता। यही वजह रही कि पालिकाध्यक्ष पद पर कभी महिला नहीं बैठ पाई। पालिका के इतिहास में पहली बार नगर पालिका की चेयरमैन महिला होगी।