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दंगा: नफरत के बीच दोस्ती का फर्ज निभाएगा सतेंद्र
अमर उजाला, शामली
Updated Thu, 03 Oct 2013 03:11 PM IST
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हालिया दिनों में यूपी के मुजफ्फरनगर सहित कई इलाकों में भड़की सांप्रदायिक हिंसा ने हर मौके पर सुख-दुख के साथी रहे हिंदू-मुसलमानों के बीच नफरत की अनचाही दीवार खड़ी कर दी थी।
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पर अभी भी इलाके के कुछ लोग ऐसे हैं जो आपसी भाईचारा और प्रेम का नायाब मिसाल पेश कर रहे हैं।
यूपी के शामली स्थित कुड़ाना गांव के एक रिटायर्ड फौजी परिवार ने दूसरे समुदाय के अपने पड़ोसी की बेटी का निकाह कराने का बीड़ा उठाया है।
यह परिवार न सिर्फ निकाह का खर्च उठाएगा, बल्कि पड़ोसी की बेटी को अपनी बेटी की तरह ससुराल भी विदा करेगा।
फौजी परिवार के इस कदम की हर किसी ने सराहना की है। उनका कहना है कि हाल ही में हिंसा के दौर से गुजरे जिले में इस परिवार ने हिंदू-मुस्लिम एकता और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की है।
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हिंसा के वक्त अपने गांवों, घरों से पलायन कर लोग शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं, जबकि कुछ की वापसी हो गई है।
इस दौरान कुछ लोग आर्थिक रूप से टूट गए हैं। किसी को रोजी-रोटी के लाले हैं, तो किसी के बेटा-बेटी की शादी नहीं हो पा रही।
ऐसे में कुड़ाना गांव के रिटायर्ड फौजी सतेंद्र मलिक ने गांव के दूसरे समुदाय के गरीब परिवार रहीसु की पुत्री का निकाह कराने और होने खर्च का बीड़ा उठाकर एक मिसाल पेश किया।
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निकाह चार अक्तूबर को होना है। बारात बुढ़ाना से आएगी। सभी तैयारी में जुटे हैं।
सतेंद्र मलिक ने बताया कि उसकी अपनी कोई बेटी नहीं है। एक बेटा अनित मलिक है। पत्नी मनोज देवी और बेटे ने भी इस नेक काम में अपनी सहमति दी है।
सतेंद्र मलिक का कहना है कि वर्ष 2012 में एक सड़क हादसे के बाद उसने यह काम करने का निर्णय लिया था। वह रहीसुद्दीन की बेटी को अपनी बेटी मानकर ससुराल विदा करना चाहता है।
रहीसु उसका दोस्त है। वह मजदूरी कर पांच बेटी, दो बेटों और पत्नी का गुजारा कर रहा है। उसकी माली हालत को देखते हुए ही उसने निकाह कराने का फैसला लिया।
रिटायर्ड फौजी ने बताया कि इस धर्मार्थ कार्य से वह सद्भावना का संदेश देना चाहता है।