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एक ने बंदूक से फोड़ी आंख, दूसरे ने बदले में ले ली जान
मुरादाबाद/ब्यूरो
Updated Thu, 01 Aug 2013 12:20 PM IST
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जातीय रंजिश और बदले की भावना कितनी बुरी हो सकती है यह उत्तरप्रदेश के
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मुरादाबाद में देखने को मिला। यहां तीन साल पहले जातीय संघर्ष का बदला लेते
हुए एक व्यक्ति ने दूसरे को गोली मार दी।
अकबर और आसिम के बीच विवाद में तीन साल पहले एक घटना में आसिम की आंख चली गई थी। आसिम ने बदला लेते हुए अकबर को मौत के घाट उतार दिया।
कई सालों तक मौका ताड़ने के बाद आसिम ने बदला लेने का प्लान बनाया। एक रिश्तेदार और दोस्त के साथ मिलकर उन्होंने अकबर को मौत के घाट उतार दिया। बुधवार को पुलिस ने तीनों को कोर्ट में पेश किया। यहां से तीनों को जेल भेज दिया गया।
रविवार की शाम नवाबपुरा के बाग गुलाबराय मोहल्ले में अकबर अली की हत्या कर दी गई थी। उस वक्त अकबर शराफत वाली मस्जिद से नमाज अदा करके बाहर निकल रहा था।
आसिम ने बताया कि चौदह साल पहले उसके चचेरे भाई की हत्या के बाद से कई बार अकबर उस पर हमला कर चुका था। रमजान माह के चलते वह और अकबर रोजाना ही शराफत वाली मस्जिद में नमाज अदा करने आते थे।
रविवार को वारदात से करीब पंद्रह मिनट पहले आसिम और उसके साथी मस्जिद के बाहर खड़े हो गए थे। जैसे ही अकबर बाहर निकला तो इन तीनों ने उसे घेर लिया।
खुद को घिरता देख अकबर ने भागने की कोशिश की लेकिन आसिम ने मौका गंवाए बगैर उस पर फायर कर दिया। इससे अकबर गिर पड़ा। इसके बाद उस पर तब तक फायर किए जब तक उन्हें यकीन नहीं हो गया कि अकबर मर चुका है।
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ये है आसिम का कबूलनामा
'चौदह साल पहले रमजान के दौरान ही अकबर ने मेरे चचेरे भाई आले नबी की हत्या की थी। इसके बाद से ही अकबर लगातार मुझ पर दबाव बनाने की नीयत से हमले बोलता रहा है। 2010 में अकबर ने अपने साथी सन्नू के साथ मिलकर तारीख से लौटते वक्त मुझ पर दीवान का बाजार में गोली चलाई थी। इसमें छर्रे मेरे हाथ में लगे थे। अगले ही साल तहसील स्कूल पर अकबर व सन्नू ने ही तहसील स्कूल के पास मुझ पर गोलियां चलाईं। इस हमले में मेरी दाईं आंख चली गई थी। तब से मैं आत्मग्लानि में जी रहा था। बाहर ही नहीं घर में मेरी पत्नी भी ताने मारती थी। इन तीन सालों में मैंने मात्र तीन बार शीशा देखा। शीशा देखते ही पूरा घटनाक्रम सामने आ जाता था। इस रमजान में जब मैं रोजाना अकबर से रुबरु होता तो मेरा खून खौल जाता था। इसी के चलते मैंने उसकी हत्या का प्लान तैयार किया। अकबर को घेरकर मैंने ही उसे पहली गोली मारी। उसकी हत्या के बाद मैं अब सुकून महसूस कर रहा हूं।'
अकबर और आसिम के बीच विवाद में तीन साल पहले एक घटना में आसिम की आंख चली गई थी। आसिम ने बदला लेते हुए अकबर को मौत के घाट उतार दिया।
कई सालों तक मौका ताड़ने के बाद आसिम ने बदला लेने का प्लान बनाया। एक रिश्तेदार और दोस्त के साथ मिलकर उन्होंने अकबर को मौत के घाट उतार दिया। बुधवार को पुलिस ने तीनों को कोर्ट में पेश किया। यहां से तीनों को जेल भेज दिया गया।
रविवार की शाम नवाबपुरा के बाग गुलाबराय मोहल्ले में अकबर अली की हत्या कर दी गई थी। उस वक्त अकबर शराफत वाली मस्जिद से नमाज अदा करके बाहर निकल रहा था।
आसिम ने बताया कि चौदह साल पहले उसके चचेरे भाई की हत्या के बाद से कई बार अकबर उस पर हमला कर चुका था। रमजान माह के चलते वह और अकबर रोजाना ही शराफत वाली मस्जिद में नमाज अदा करने आते थे।
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रविवार को वारदात से करीब पंद्रह मिनट पहले आसिम और उसके साथी मस्जिद के बाहर खड़े हो गए थे। जैसे ही अकबर बाहर निकला तो इन तीनों ने उसे घेर लिया।
खुद को घिरता देख अकबर ने भागने की कोशिश की लेकिन आसिम ने मौका गंवाए बगैर उस पर फायर कर दिया। इससे अकबर गिर पड़ा। इसके बाद उस पर तब तक फायर किए जब तक उन्हें यकीन नहीं हो गया कि अकबर मर चुका है।
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ये है आसिम का कबूलनामा
'चौदह साल पहले रमजान के दौरान ही अकबर ने मेरे चचेरे भाई आले नबी की हत्या की थी। इसके बाद से ही अकबर लगातार मुझ पर दबाव बनाने की नीयत से हमले बोलता रहा है। 2010 में अकबर ने अपने साथी सन्नू के साथ मिलकर तारीख से लौटते वक्त मुझ पर दीवान का बाजार में गोली चलाई थी। इसमें छर्रे मेरे हाथ में लगे थे। अगले ही साल तहसील स्कूल पर अकबर व सन्नू ने ही तहसील स्कूल के पास मुझ पर गोलियां चलाईं। इस हमले में मेरी दाईं आंख चली गई थी। तब से मैं आत्मग्लानि में जी रहा था। बाहर ही नहीं घर में मेरी पत्नी भी ताने मारती थी। इन तीन सालों में मैंने मात्र तीन बार शीशा देखा। शीशा देखते ही पूरा घटनाक्रम सामने आ जाता था। इस रमजान में जब मैं रोजाना अकबर से रुबरु होता तो मेरा खून खौल जाता था। इसी के चलते मैंने उसकी हत्या का प्लान तैयार किया। अकबर को घेरकर मैंने ही उसे पहली गोली मारी। उसकी हत्या के बाद मैं अब सुकून महसूस कर रहा हूं।'