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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   UPSC Result: Vaibhav of Moradabad got success, excitement among family members after getting 58th rank

UPSC Result: मुरादाबाद के वैभव को तीसरे प्रयास में मिली सफलता,  58वीं रैंक मिलने पर परिजनों में उत्साह

Tue, 16 Apr 2024 05:55 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: विमल शर्मा Updated Tue, 16 Apr 2024 05:55 PM IST
सार

मुरादाबाद निवासी वैभव आनंद शर्मा ने यूपीएससी परीक्षा पास की है। उन्हें 58वीं रैंक हासिल हुई है। वैभव ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को दिया है। 

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UPSC Result: Vaibhav of Moradabad got success, excitement among family members after getting 58th rank
मुरादाबाद के वैभव ने यूपीएससी परीक्षा पास की - फोटो : संवाद

विस्तार

आशियाना निवासी वैभव आनंद शर्मा ने सिविल सेवा की परीक्षा में 58वीं रैंक हासिल की है। वैभव को यह सफलता तीसरे प्रयास में मिली है। वैभव के पिता डॉ. एके शर्मा सेवानिवृत्त जिला होम्योपैथी अधिकारी और माता ममता शर्मा गृहिणी हैं।

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उनके बड़े भाई डॉ. सिद्धार्थ आनंद शर्मा भी होम्योपैथी के चिकित्सक हैं, जबकि बहन वैशाली आनंद शर्मा ऑस्ट्रेलिया में रहती हैं और शिक्षिका हैं। वैभव ने बताया कि बचपन से ही वह देखते थे कि उनके पिता होम्योपैथी अधिकारी हैं, फिर भी जिलाधिकारी को रिपोर्ट करते हैं।
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ऐसे में शुरू से ही उनके मन में जिलाधिकारी के पद के प्रभाव को लेकर उत्सुकता बन गई थी। उन्होंने दिल्ली पब्लिक स्कूल से 92 फीसदी अंकों से दसवीं और 82 फीसदी अंकों से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की।
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इसके बाद वैभव ने जेपी इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन ब्रांच से बीटेक किया है। पढ़ाई पूरी करने के बाद दो वर्ष उन्होंने एक निजी कंपनी में मार्केटिंग विभाग में एग्जीक्यूटिव के पद पर नौकरी भी की है।

पिता डॉ. एके शर्मा ने बताया कि सरकारी नौकरी में रहने के दौरान मुझे जानकारी थी कि देश को बनाने में आईएएस अधिकारी की कितनी बड़ी भूमिका होती है। ऐसे में जब वैभव नौकरी कर रहे थे तो उनसे सिविल सेवा को लेकर चर्चा होती रहती थी।

हमारे रुझान को देखकर वैभव ने भी दिलचस्पी दिखाई। इसके बाद वह नौकरी छोड़कर मुरादाबाद आ गए और अप्रैल 2019 से घर पर रहकर ही यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। वैभव के ताऊ एचपी शर्मा बैंक प्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त हैं। वह पत्रकार और साहित्यकार भी हैं।

सोशल मीडिया से रहे दूर प्रतिदिन पढ़ा अखबार
वैभव ने बताया कि मैंने कोचिंग के बजाय स्वाध्याय से तैयारी करने को प्राथमिकता दी। प्रतिदिन छह से सात घंटे पढ़ते थे। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र को पढ़ने के साथ समाज में हो रहे घटनाक्रम को गहराई से समझते थे। इंटरनेट से कंटेंट जुटाकर पढ़ाई करते थे।

इसके अलावा प्रतिदिन अखबार पढ़कर नोट्स तैयार करते थे। अखबार की वजह से करंट अफेयर्स की अच्छी तैयारी हो गई थी। तैयारी के दौरान मैंने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली थी। किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मेरा अकाउंट नहीं था। 

तीसरा प्रयास और पहला साक्षात्कार
वैभव ने बताया कि दो बार प्री परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी और बहुत ही कम अंतर से मेंस परीक्षा में रह जाता था। ऐसे में भरोसा हो गया कि मैं अपने दम पर परीक्षा को उत्तीर्ण कर लूंगा। पहले दो प्रयास में मुझे लगा कि उत्तर लिखने की रणनीति अच्छी नहीं थी।

पहले मैंने लिखने का ज्यादा अभ्यास नहीं किया था। बाद में मैंने लिखने की रणनीति में बदलाव कर उसका अभ्यास बढ़ा दिया था। कम शब्दों में प्रभावी तरीके से लिखने का मैंने अभ्यास किया और सफलता मिल गई।

35 मिनट चला साक्षात्कार, मुरादाबाद की अर्थव्यवस्था पर पूछा सवाल
वैभव ने बताया कि उनका साक्षात्कार 35 मिनट चला था। पैनल में एक आईआरएस अधिकारी थीं, उन्होंने मुझसे मुरादाबाद की अर्थव्यवस्था पर सवाल पूछा था। दूसरे अधिकारी ने भारत-पाकिस्तान के रिश्ते की दिक्कतें और सुझाव पर सवाल पूछा था।

एक सवाल में मुझे एक परिस्थिति दी गई थी, जिसमें मुझसे पूछा कि यदि मैं आईएएस बन गया और एक शहर में नाला खुला है जो नदी में गिर रहा है। इसके समाधान में आड़े एक करप्ट कांट्रेक्टर आ रहा है तो उस स्थिति में क्या करेंगे।

हर मुद्दे पर मां के साथ करते हैं चर्चा
वैभव की सफलता के पीछे उनकी मां ममता शर्मा का भी कठिन परिश्रम है। पिता डॉ. एके शर्मा ने कहा कि यदि वैभव आठ घंटे पढ़ते थे तो उनकी मम्मी आठ घंटे तक वैभव के पास बैठी रहती थीं। वह खुद उनकी तैयारी में मदद करती थीं। उनके अच्छे खानपान का पूरा ध्यान रखती थीं।

वैभव ने बताया कि मैं मम्मी से चाहे नारी सशक्तीकरण हो या फिर अर्थव्यवस्था हर बिंदु पर चर्चा करता हूं। मां ममता शर्मा ने बताया कि मेरा मानना है कि बच्चे कहना बहुत कुछ चाहते हैं, लेकिन उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं होता है।

इसलिए मेरा यही मानना था कि यदि वैभव कुछ कह रहा है तो कम से कम उसकी बात को सुन लूं। भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि बेटे की उपलब्धि की खुशी को बयां करने के लिए आज मेरे पास शब्द नहीं हैं। 

कॅरिअर के लिहाज से कोई भी क्षेत्र नहीं है कम : वैभव
वैभव ने कहा कि युवाओं को आकांक्षाएं रखने की बहुत जरूरत है। वह किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। वह चाहें तो आर्किटेक्ट बनें, डॉक्टर बनें, गायक बनें, पत्रकार बन सकते हैं। समाज रूपी सुंदर गुलदस्ता बनाने के लिए यह सभी क्षेत्र बहुत जरूरी हैं। हमें सभी सफलता का जश्न मनाने की जरूरत है। 

पिता से प्रेरणा लेकर छाया ने दी परीक्षा, पाई 65वीं रैंक
पाकबड़ा के गांव ज्ञानपुर निवासी छाया सिंह ने यूपीएससी में 65वीं रैंक प्राप्त की है। छाया के भाई और बैंक ऑफ बड़ौदा जोया ब्रांच के शाखा प्रबंधक अनिल कुमार ने बताया कि छाया के पिता और उनके चाचा छोटे सिंह भी प्रशासनिक सेवा में हैं।

वर्तमान में मध्यप्रदेश के रीवा मंडल में कमिश्नर के पद पर कार्यरत हैं। उनसे प्रेरणा लेकर ही छाया ने सिविल सेवा की परीक्षा दी थी। उन्हें आईपीएस में नियुक्ति मिली थी।  छाया पुणे में ट्रेनिंग कर रही हैं और वर्तमान में डेप्युटेशन पर लद्दाख गई हैं।

छाया ने अपनी रैंक सुधारने के लिए प्रशिक्षण के दौरान भी नियमित तीन से चार घंटे पढ़ाई की है। इंटरनेट के अलावा वह अपने नोट्स खुद तैयार करती थीं। अनिल ने बताया कि इस बार छाया ने लेखन कौशल पर विशेष ध्यान दिया था।

साक्षात्कार के बाद ही छाया को उम्मीद थी कि अब रैंक सुधार जाएगी और हुआ भी ऐसा ही। उन्होंने कहा कि छाया बचपन से ही मेधावी हैं। ग्वालियर के सिंधिया स्कूल से दसवीं और भोपाल से 12वीं की पढ़ाई की।

पटियाला विश्वविद्यालय से एलएलएम की पढ़ाई की है। छाया के छोटे भाई सक्षम ने इसी वर्ष स्नातक किया है और मां अंजू सिंह गृहिणी हैं। छाया ट्रेंनिग पर जाने से पहले गांव आईं थीं। अनिल कुमार ने बताया कि छाया की उपलब्धि पर पूरे परिवार को गर्व है।
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