UP Chunav Results: मुरादाबाद मंडल में सपा का फिर दबदबा, आसपा-रालोद का खुला खाता, बसपा को एक भी सीट नहीं
मुरादाबाद मंडल में सपा ने एक बार फिर बाजी मारी है। भाजपा को सिर्फ एक सीट पर ही संतोष करना पड़ा जबकि बसपा खाता तक नहीं खोल पाई है। रालोद को एक सीट मिली है। उधर पहली बार किस्मत आजमाने वाली आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) का भी खाता खुल गया है।
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मुरादाबाद मंडल में साइकिल सरपट दौड़ी है। छह में से तीन सीटों पर कब्जा जमाकर सपा ने मंडल में अपना दबदबा कायम रखा है। वहीं मंडल की सियासत में पहली बार किस्मत आजमाने वाली आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) का खाता खुल गया। भाजपा और रालोद को एक-एक सीटें मिली। जबकि बसपा का मंडल में खाता तक नहीं खुला।
पिछली बार भाजपा ने मंडल की बिजनौर सीट को छोड़कर बाकी पांच पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। बिजनौर सीट से भाजपा के सहयोगी दल रालोद का प्रत्याशी चुनाव मैदान में था। दूसरी ओर अमरोहा सीट छोड़कर पांच सीटों पर सपा चुनाव लड़ी। अमरोहा सीट पर कांग्रेस के खाते में थी। मंडल की छह सीटों में तीन चरणों में चुनाव हुए थे।
मंगलवार को चुनाव परिणाम सामने आए। नगीना लोकसभा सीट को छोड़ दिया जाए तो बाकी पांच सीटों पर सपा-कांग्रेस और भाजपा में सीधी टक्कर थी। सपा ने मुरादाबाद, रामपुर और संभल सीट पर जीत दर्ज की। भाजपा मंडल की एक मात्र अमरोहा सीट ही जीत पाई।
जबकि बिजनौर लोकसभा सीट पर भाजपा की सहयोगी दल रालोद ने बाजी मारी। सुरक्षित सीट नगीना का परिणाम चौंकाने वाला रहा। यहां भाजपा और सपा के उम्मीदवारों को पछाड़ते हुए आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख चंद्रशेखर ने धमाकेदार जीत दर्ज की।
इसके विपरीत 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में राजनीतिक दलोंं के पक्ष में एकतरफा मत पड़े थे। 2014 के चुनाव में भाजपा ने मंडल की सभी छह सीटों पर कब्जा जमाया था। विपक्ष दलों का खाता नहीं खुल सका था।
यही हाल 2019 का रहा। इस लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा मिलकर भाजपा का मंडल से सुपडा साफ कर दिया था। गठबंधन के साथ चुनाव मैदान में उतरे दोनों दलों ने मंडल की तीन-तीन सीटों पर जीत दर्ज की थी।
चार प्रत्याशी पहली बार सांसद बने एक ने मैदान बदलकर पाई जीत
मुरादाबाद मंडल की लोकसभा सीटों पर अमरोहा को छोड़ दिया जाए तो सारे नए चेहरे सांसद बने हैं। इनमें भी विशेषता यह है कि पांच में से चार प्रत्याशी पहली बार सांसद बने हैं। जबकि एक ने मैदान बदलकर फतह पाई है।
मुरादाबाद सीट से जीत दर्ज करने वाली सपा प्रत्याशी रुचिवीरा 2019 में आंवला से बसपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुकी हैं। वहां उन्हें भाजपा के धर्मेंद्र कश्यप के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि वह दूसरे नंबर पर रही थीं।
इनके अलावा रामपुर से सपा के मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी, संभल से जियाउर्रहमान बर्क, बिजनौर से रालोद के चंदन चौहान व नगीना से आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर पहली बार लोकसभा के मैदान में थे।
इन चारों को पहली बार में ही जीत मिली। चंद्रशेखर की दावेदारी के कारण नगीना यूपी की सबसे चर्चित सीटों में शामिल थी। मंडल में जीत का सबसे बड़ा अंतर भी चंद्रशेखर के पास ही रहा। उन्होंने सवा लाख से ज्यादा वोटों से चुनाव जीता।
रामपुर के मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी के बाहरी होने की हवा उड़ी थी, लेकिन उन्होंने शपथ पत्र में स्पष्ट कर दिया था कि वह रामपुर के ही मूल निवासी हैं। जियाउर्रहमान भी संभल के मूल निवासी हैं। जबकि रुचिवीरा बिजनौर, चंदन चौहान मुजफ्फरनगर व चंद्रशेखर सहारनपुर के मूल निवासी हैं।
अमरोहा की बात करें तो भाजपा के कंवर सिंह तंवर 2014 में भी सांसद रह चुके हैं। वह भी मूल रूप से अमरोहा के ही रहने वाले हैं।