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मई-जून में मौसम नहीं हुआ गरम तो 21वीं सदी में दोनों महीने अब तक सबसे नरम
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मुरादाबाद। जून माह का अंतिम सप्ताह चल रहा है, लेकिन अभी तक लू और सूरज की तपिश ने लोगों को परेशान नहीं किया है। हालांकि, बादल छाए रहने से उमस लोगों को परेशान कर रही है। मौसम विभाग के अनुसार जून का औसत तापमान 37 डिग्री सेल्सियस रहा है, वहीं मई का औसत तापमान 35 डिग्री सेल्सियस था। 21वीं सदी में मई और जून माह (दोनों एक साथ) औसत 36 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे ठंडे रहे हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार भी जेष्ठ माह का महीना पूरा हो चुका है, जिसकी पहचान ही लू और तपिश के लिए होती है, लेकिन इस वर्ष लोगों को ज्येष्ठ की दोपहरी याद ही नहीं आई। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बारिश में बढ़ोतरी हुई है, जिसकी वजह से मौसम में यह अंतर देखने को मिल रहे हैं।
पंत नगर विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह का कहना है कि वर्ष 1999 में मई और जून का औसत तापमान 35 डिग्री सेल्सियस रहा था। हालांकि, अप्रैल माह से गर्मी बढ़नी शुरू हो जाती है। मई माह में पीक पर होती है, जो करीब 10 जून तक जारी रहता है। कई बार 15 जून तक मौसम गर्म रहता है। उसके बाद बारिश या नमी भरी ठंडी हवा चलने की वजह से उमस हो जाती है। इस बार मई में दो चक्रवात और तीन पश्चिमी विक्षोभ की वजह से 136 मिली मीटर बारिश हुई है, जो सामान्य से करीब सौ मिलीमीटर अधिक है। पिछले वर्षों में मई माह में बारिश होती थी, लेकिन उसके दूसरे दिन से ही वातावरण गर्म होने लगता था, लेकिन इस वर्ष न तो मई में और न ही जून माह में बारिश के बाद तापमान में बढ़ोतरी हुई है। मई माह में दस दिन और जून माह में न्यूनतम तापमान भी लगातार एक सप्ताह तक 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया है, जो अपने आप में रिकॉर्ड है। हर तीसरे-चौथे दिन वातावरण में बदलाव होने की वजह मानसूनी सीजन के प्रभावित होने की संभावना है। क्योंकि अच्छी बारिश के लिए तापमान में बढ़ोतरी होना बहुत आवश्यक है, जो अभी नहीं है।
टुकड़ों में आ रहा मानसून
गर्मी अधिक न होने का असर मानसून पर होने लगा है। बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के क्षेत्र बनने से मानसून तय समय 25 जून से एक सप्ताह पहले 18 जून को आ गया है, लेकिन अभी यह पूर्ण रूप से सक्रिय नहीं है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जब उत्तरी भारत में भीषण गर्मी पड़ती है तो मानसून की गति तेज होती है और सभी क्षेत्रों में एक समान बारिश होती है, लेकिन इस वर्ष गर्मी कम होने की वजह से मानसून टुकड़ों में पहुंच रहा है। अभी दिल्ली तक के सभी क्षेत्रों में एक समान बारिश नहीं हो सकी है। यही स्थिति रही तो मानसून प्रभावित हो जाएगा।
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ज्येष्ठ माह में हो गई तीन गुना बारिश
ज्येष्ठ महीना भीषण गर्मी के लिए जाना जाता है, लेकिन इस वर्ष सामान्य से अधिक बारिश होने के कारण न तो लू चली और न ही सूरज की तपिश ने लोगों को परेशान किया। यहां तक कि ज्येष्ठ माह में पड़ा नौतपा भी नहीं तपा। इस बार ज्येष्ठ माह (27 मई से 24 जून) में 284 मिली मीटर बारिश हुई है, जो सामान्य से करीब तीन गुना अधिक है। जून के पहले सप्ताह में तीन दिनों को छोड़ दें तो एक भी दिन तापमान 40 से अधिक नहीं पहुंचा है। इस माह का औसत तापमान 41 डिग्री सेल्सियस है, जो 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।
दाल, सब्जी और आम की फसल को हुआ नुकसान
डॉ. आरके सिंह का कहना है कि मई और जून माह में सामान्य गर्मी न पड़ने और लगातार बारिश हो जाने की वजह से दाल, सब्जी और आम की फसल को नुकसान हुआ है। इसकी वजह से मूंग, उड़द और मक्का की फसल की पैदावार पर असर पड़ेगा। बारिश और नमी से किसानों की 20 से 25 फीसदी सब्जी खेत में ही सड़ गई है। इसके अलावा आम की फसल में भी स्केल कीट का संक्रमण हो गया है।
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पंत नगर विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह का कहना है कि वर्ष 1999 में मई और जून का औसत तापमान 35 डिग्री सेल्सियस रहा था। हालांकि, अप्रैल माह से गर्मी बढ़नी शुरू हो जाती है। मई माह में पीक पर होती है, जो करीब 10 जून तक जारी रहता है। कई बार 15 जून तक मौसम गर्म रहता है। उसके बाद बारिश या नमी भरी ठंडी हवा चलने की वजह से उमस हो जाती है। इस बार मई में दो चक्रवात और तीन पश्चिमी विक्षोभ की वजह से 136 मिली मीटर बारिश हुई है, जो सामान्य से करीब सौ मिलीमीटर अधिक है। पिछले वर्षों में मई माह में बारिश होती थी, लेकिन उसके दूसरे दिन से ही वातावरण गर्म होने लगता था, लेकिन इस वर्ष न तो मई में और न ही जून माह में बारिश के बाद तापमान में बढ़ोतरी हुई है। मई माह में दस दिन और जून माह में न्यूनतम तापमान भी लगातार एक सप्ताह तक 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया है, जो अपने आप में रिकॉर्ड है। हर तीसरे-चौथे दिन वातावरण में बदलाव होने की वजह मानसूनी सीजन के प्रभावित होने की संभावना है। क्योंकि अच्छी बारिश के लिए तापमान में बढ़ोतरी होना बहुत आवश्यक है, जो अभी नहीं है।
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टुकड़ों में आ रहा मानसून
गर्मी अधिक न होने का असर मानसून पर होने लगा है। बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के क्षेत्र बनने से मानसून तय समय 25 जून से एक सप्ताह पहले 18 जून को आ गया है, लेकिन अभी यह पूर्ण रूप से सक्रिय नहीं है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जब उत्तरी भारत में भीषण गर्मी पड़ती है तो मानसून की गति तेज होती है और सभी क्षेत्रों में एक समान बारिश होती है, लेकिन इस वर्ष गर्मी कम होने की वजह से मानसून टुकड़ों में पहुंच रहा है। अभी दिल्ली तक के सभी क्षेत्रों में एक समान बारिश नहीं हो सकी है। यही स्थिति रही तो मानसून प्रभावित हो जाएगा।
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ज्येष्ठ माह में हो गई तीन गुना बारिश
ज्येष्ठ महीना भीषण गर्मी के लिए जाना जाता है, लेकिन इस वर्ष सामान्य से अधिक बारिश होने के कारण न तो लू चली और न ही सूरज की तपिश ने लोगों को परेशान किया। यहां तक कि ज्येष्ठ माह में पड़ा नौतपा भी नहीं तपा। इस बार ज्येष्ठ माह (27 मई से 24 जून) में 284 मिली मीटर बारिश हुई है, जो सामान्य से करीब तीन गुना अधिक है। जून के पहले सप्ताह में तीन दिनों को छोड़ दें तो एक भी दिन तापमान 40 से अधिक नहीं पहुंचा है। इस माह का औसत तापमान 41 डिग्री सेल्सियस है, जो 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।
दाल, सब्जी और आम की फसल को हुआ नुकसान
डॉ. आरके सिंह का कहना है कि मई और जून माह में सामान्य गर्मी न पड़ने और लगातार बारिश हो जाने की वजह से दाल, सब्जी और आम की फसल को नुकसान हुआ है। इसकी वजह से मूंग, उड़द और मक्का की फसल की पैदावार पर असर पड़ेगा। बारिश और नमी से किसानों की 20 से 25 फीसदी सब्जी खेत में ही सड़ गई है। इसके अलावा आम की फसल में भी स्केल कीट का संक्रमण हो गया है।