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मेहमानों का था इंतजार, घर आया बेटे का शव
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Mon, 26 Dec 2016 02:14 AM IST
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जिस बेटे के सिर पर सेहरा बांधा देखने का सपना मां-बाप सजोए थे। रविवार को उस बेटे का रिश्ता तय करना था और घर में मेहमानोें के आने का इंतजार हो रहा था। मां और बहनें तीन दिन से घर की साफ सफाई में लगी थी तो पिता मेहमानों के स्वागत के लिए तैयारियों में जुटे थे।
उसी दिन बेटे का शव घर में पहुंचा तो मां-बाप टूट गए। परिवार में चीख पुकार मच गई। भाई बहनों को रोता देख वहां मौजूद लोगों की आंखों से भी आंसू छलक आए। बूढ़े मां-बाप कभी बेटे को याद कर रो पड़े तो कभी मिल वालों कोसने लगते।
छजलैट थानाक्षेत्र के लदावली गांव निवासी राजवीर सिंह का बड़ा बेटा पप्पी उर्फ परमजीत शुगर मिल में काम करता था। जबकि छोटा बेटा आशु अगवानपुर स्थित किसान इंटर कालेज से इंटरमीडिएट का छात्र है। जबकि दो बेटी शिवानी और सलोनी हैं।
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परिवार के लोगों ने बताया कि रविवार को ही उसका रिश्ता भी आना था। तीन दिन से घर में साफ सफाई का कार्य चल रहा था। वहीं मेहमानों की खातिरदारी के लिए तैयारियां की जा रहीं थीं। लेकिन परमजीत की मौत ने सारी खुशियां मातम में बदल गई।
मां विमलेश देवी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पिता राजवीर सिंह बीमार रहने के साथ ही कमजोर भी है। जबकि छोटा भाई अभी नाबालिग है।
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उसी दिन बेटे का शव घर में पहुंचा तो मां-बाप टूट गए। परिवार में चीख पुकार मच गई। भाई बहनों को रोता देख वहां मौजूद लोगों की आंखों से भी आंसू छलक आए। बूढ़े मां-बाप कभी बेटे को याद कर रो पड़े तो कभी मिल वालों कोसने लगते।
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छजलैट थानाक्षेत्र के लदावली गांव निवासी राजवीर सिंह का बड़ा बेटा पप्पी उर्फ परमजीत शुगर मिल में काम करता था। जबकि छोटा बेटा आशु अगवानपुर स्थित किसान इंटर कालेज से इंटरमीडिएट का छात्र है। जबकि दो बेटी शिवानी और सलोनी हैं।
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परिवार के लोगों ने बताया कि रविवार को ही उसका रिश्ता भी आना था। तीन दिन से घर में साफ सफाई का कार्य चल रहा था। वहीं मेहमानों की खातिरदारी के लिए तैयारियां की जा रहीं थीं। लेकिन परमजीत की मौत ने सारी खुशियां मातम में बदल गई।
मां विमलेश देवी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पिता राजवीर सिंह बीमार रहने के साथ ही कमजोर भी है। जबकि छोटा भाई अभी नाबालिग है।