{"_id":"575ba6d14f1c1b8c1b9c53b4","slug":"rr-school-mock-drill-accident","type":"story","status":"publish","title_hn":"माक ड्रिल प्रकरणः मैं तो टुकुर के साथ बैठी थी.. तो फिर गिरी कैसे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
माक ड्रिल प्रकरणः मैं तो टुकुर के साथ बैठी थी.. तो फिर गिरी कैसे
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Sat, 11 Jun 2016 11:23 AM IST
विज्ञापन
मॉक ड्रिल हादसा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
‘हां! मुझे याद है, ये एक तारीख की बात है.. सुबह के करीब दस - साढ़े दस बजे होंगे.. स्कूल में मॉक ड्रिल की तैयारियां चल रही थीं..और मैं भी तो वहीं थी..अपनी बेटी टुकुर के साथ ठीक सामने कुर्सी पर बैठी थी.. लेकिन उसके बाद क्या हुआ?.. कुछ भी तो नहीं हुआ था.. मुझे ध्यान है मॉक ड्रिल तो उस दिन हुई ही नहीं थी.. मुझे कुछ नहीं पता.. मेरी समझ में नहीं आता जब मैं अपनी बेटी के साथ कुर्सी पर बैठी थी तो मैं आखिर गिरी कैसे ..? ’।
कोठीवाल डेंटल कालेज एंड रिसर्च सेंटर में प्राइवेट वार्ड नंबर 300 के बिस्तर पर लेटी श्रद्धा शर्मा के चेहरे पर इतना बोलते - बोलते तनाव छलकने लगता है और वह सिर पकड़ लेती हैं। डाक्टरों के मुताबिक श्रद्धा शर्मा एमनेजिया की शिकार हो गई हैं जिसमें कुछ वक्त के लिए याददाश्त चली जाती है। एक जून को आरआरके स्कूल में सिविल डिफेंस की मॉक ड्रिल के दौरान तीसरी मंजिल से गिरकर गंभीर रूप से जख्मी हुई श्रद्धा शर्मा की हालत अब खतरे से बाहर है।
उन्हें आईसीयू से वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। शुक्रवार को पहली बार उनके चेहरे पर हंसी दिखाई दी। लिहाजा हमने उनसे हादसे के उन मनहूस पलों के बारे में जानना चाहा कि एक जून की दोपहर बारह बजे आखिर हुआ क्या था? शुक्रवार को शाम के करीब छह बजे हैं। दोनों एढ़ियों की चकनाचूर हो चुकी हड्डियां पर प्लास्टर चढ़ा है और श्रद्धा अस्पताल के बिस्तर पर लेटी हैं। हमने उनसे पूछा, हादसा कैसे हुआ तो वो अनंत में निहारने लगीं।
विज्ञापन
थोड़ा सोचने के बाद बोलीं, मैं तो अपनी बेटी टुकुर (अनुष्का) के साथ बैठी थी, तो मैं कैसे गिरी? दिमाग पर बहुत जोर डालने के बाद भी उन्हें कुछ याद नहीं आता। वो सिर पकड़ लेती हैं। कहती हैं मुझे बस इतना ध्यान है कि उस दिन मॉक ड्रिल हादसा की तैयारियां चल रही थीं। बोलीं, मैं ही तो स्कूल की ओर से सारा मैनजमेंट देख रही थी.. लेकिन मैं तो कुर्सी से उठकर कहीं गई ही नहीं, मेरी बेटी से पूछ लीजिए मैं तो उसी के साथ बैठी थी।
दरअसल श्रद्धा शर्मा हादसे से कुछ घंटे पहले से लेकर चार दिन बाद तक की याददाश्त खो चुकी हैं। उनकी ननद नूपुर शर्मा का कहना है कि आईसीयू के शुरुआती चार दिन भी श्रद्धा को याद नहीं है। डाक्टर उनकी याददाश्त लौटाने के लिए जरूरी दवाएं दे रहे हैं।
विज्ञापन
कोठीवाल डेंटल कालेज एंड रिसर्च सेंटर में प्राइवेट वार्ड नंबर 300 के बिस्तर पर लेटी श्रद्धा शर्मा के चेहरे पर इतना बोलते - बोलते तनाव छलकने लगता है और वह सिर पकड़ लेती हैं। डाक्टरों के मुताबिक श्रद्धा शर्मा एमनेजिया की शिकार हो गई हैं जिसमें कुछ वक्त के लिए याददाश्त चली जाती है। एक जून को आरआरके स्कूल में सिविल डिफेंस की मॉक ड्रिल के दौरान तीसरी मंजिल से गिरकर गंभीर रूप से जख्मी हुई श्रद्धा शर्मा की हालत अब खतरे से बाहर है।
विज्ञापन
उन्हें आईसीयू से वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। शुक्रवार को पहली बार उनके चेहरे पर हंसी दिखाई दी। लिहाजा हमने उनसे हादसे के उन मनहूस पलों के बारे में जानना चाहा कि एक जून की दोपहर बारह बजे आखिर हुआ क्या था? शुक्रवार को शाम के करीब छह बजे हैं। दोनों एढ़ियों की चकनाचूर हो चुकी हड्डियां पर प्लास्टर चढ़ा है और श्रद्धा अस्पताल के बिस्तर पर लेटी हैं। हमने उनसे पूछा, हादसा कैसे हुआ तो वो अनंत में निहारने लगीं।
विज्ञापन
थोड़ा सोचने के बाद बोलीं, मैं तो अपनी बेटी टुकुर (अनुष्का) के साथ बैठी थी, तो मैं कैसे गिरी? दिमाग पर बहुत जोर डालने के बाद भी उन्हें कुछ याद नहीं आता। वो सिर पकड़ लेती हैं। कहती हैं मुझे बस इतना ध्यान है कि उस दिन मॉक ड्रिल हादसा की तैयारियां चल रही थीं। बोलीं, मैं ही तो स्कूल की ओर से सारा मैनजमेंट देख रही थी.. लेकिन मैं तो कुर्सी से उठकर कहीं गई ही नहीं, मेरी बेटी से पूछ लीजिए मैं तो उसी के साथ बैठी थी।
दरअसल श्रद्धा शर्मा हादसे से कुछ घंटे पहले से लेकर चार दिन बाद तक की याददाश्त खो चुकी हैं। उनकी ननद नूपुर शर्मा का कहना है कि आईसीयू के शुरुआती चार दिन भी श्रद्धा को याद नहीं है। डाक्टर उनकी याददाश्त लौटाने के लिए जरूरी दवाएं दे रहे हैं।