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शासन तक पहुंची दलितों के हिंदू धर्म छोड़ने की गूंज
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Sun, 28 May 2017 01:53 AM IST
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- फोटो : Getty
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दलपतपुर के तीस दलित परिवारों के हिंदू धर्म छोड़ने की गूंज शासन तक पहुंच चुकी है। आरटीओ बवाल में भाजपा नेताओं के दबाव में दलितों के खिलाफ एकपक्षीय कार्रवाई किए जाने से खफा इन तीस दलित परिवारों ने शुक्रवार को हिंदू देवी देवताआें की प्रतिमाएं रझेड़ा नदी में प्रवाहित कर हिंदू धर्म छोड़ दिया था।
मामला सुर्खियों में आने के बाद शनिवार को खुफिया एजेंसियों ने दलपतपुर में डेरा डाल दिया। पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। नौ मई को आरटीओ पर मेडिकल किट के ठेके को लेकर भाजपा के महानगर उपाध्यक्ष राकेश शर्मा और बजरंग दल के महानगर संयोजक विशाल द्रविड़ के बीच फायरिंग व बवाल हुआ था।
दोनों गुटों में आरटीओ पर सरेआम फायरिग और बवाल अफरातफरी मच गई थी। पुलिस ने इस मामले में बजरंग दल के दलित कार्यकर्ताआें के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज करके चार आरोपियों को जेल भेज दिया था। सत्ता के दबाव में पुलिस ने राकेश शर्मा व बवाल में शामिल दूसरे भाजपाइयों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी।
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दलित समाज के बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर दो - दो मुकदमे होने से खफा दलित समाज पहले दिन से ही इस घटना में भाजपा के खिलाफ आक्रोशित है। घटना के कुछ दिन बाद ही मुरादाबाद में पचास दलित परिवारों ने हिंदू देवी देवताओं की प्रतिमाएं रामगंगा में प्रवाहित कर हिंदू धर्म छोड़ दिया था।
शुक्रवार को दलपतपुर के तीस दलित परिवारों ने भी मुरादाबाद आरटीओ प्रकरण, संभल, अलीगढ़ और सहारनपुर की घटनाओं में सरकार पर पक्षपातपूर्ण तरीके से दलितों के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए हिंदू धर्म छोड़ दिया था।
शनिवार को यह मामला सुर्खियों में आया तो एलआईयू और स्पेशल ब्रांच की टीमें गांव पहुंचीं और उन्होंने धर्म छोड़ने वाले दलित परिवारों से बात की। खुफिया एजेंसियों ने पूरी रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज की महिला विंग की प्रभारी कमलेश सागर का कहना है कि दलित समाज को बहुत उम्मीदें थीं कि भाजपा सरकार सत्ता में आने के बाद उनके लिए कुछ करेगी लेकिन प्रदेश की योगी सरकार में जगह - जगह दलितों का उत्पीड़न हो रहा है। उत्पीड़न करने वाले भी कोई और नहीं बल्कि भाजपा के ही नेता हैं।
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मामला सुर्खियों में आने के बाद शनिवार को खुफिया एजेंसियों ने दलपतपुर में डेरा डाल दिया। पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। नौ मई को आरटीओ पर मेडिकल किट के ठेके को लेकर भाजपा के महानगर उपाध्यक्ष राकेश शर्मा और बजरंग दल के महानगर संयोजक विशाल द्रविड़ के बीच फायरिंग व बवाल हुआ था।
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दोनों गुटों में आरटीओ पर सरेआम फायरिग और बवाल अफरातफरी मच गई थी। पुलिस ने इस मामले में बजरंग दल के दलित कार्यकर्ताआें के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज करके चार आरोपियों को जेल भेज दिया था। सत्ता के दबाव में पुलिस ने राकेश शर्मा व बवाल में शामिल दूसरे भाजपाइयों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी।
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दलित समाज के बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर दो - दो मुकदमे होने से खफा दलित समाज पहले दिन से ही इस घटना में भाजपा के खिलाफ आक्रोशित है। घटना के कुछ दिन बाद ही मुरादाबाद में पचास दलित परिवारों ने हिंदू देवी देवताओं की प्रतिमाएं रामगंगा में प्रवाहित कर हिंदू धर्म छोड़ दिया था।
शुक्रवार को दलपतपुर के तीस दलित परिवारों ने भी मुरादाबाद आरटीओ प्रकरण, संभल, अलीगढ़ और सहारनपुर की घटनाओं में सरकार पर पक्षपातपूर्ण तरीके से दलितों के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए हिंदू धर्म छोड़ दिया था।
शनिवार को यह मामला सुर्खियों में आया तो एलआईयू और स्पेशल ब्रांच की टीमें गांव पहुंचीं और उन्होंने धर्म छोड़ने वाले दलित परिवारों से बात की। खुफिया एजेंसियों ने पूरी रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज की महिला विंग की प्रभारी कमलेश सागर का कहना है कि दलित समाज को बहुत उम्मीदें थीं कि भाजपा सरकार सत्ता में आने के बाद उनके लिए कुछ करेगी लेकिन प्रदेश की योगी सरकार में जगह - जगह दलितों का उत्पीड़न हो रहा है। उत्पीड़न करने वाले भी कोई और नहीं बल्कि भाजपा के ही नेता हैं।