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रामलीला : नारद मोह और विष्णु लीला का मंचन
Tue, 06 Oct 2026 02:39 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
Updated Tue, 06 Oct 2026 02:39 AM IST
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कांठ। तहसील प्रशासन की ओर से गठित अस्थायी समिति की देखरेख में श्री रामलीला का मंचन नगर में सोमवार से शुरू हो गया।
श्री रामलीला के 117वें 18 दिवसीय मंचन के पहले दिन सोमवार को श्री भोले बाबा आदर्श रामलीला-रासलीला नाटक कला मंडल चंदौसी के कलाकारों ने रंगमंच पर नारद मोह और विष्णु लीला का सुंदर मंचन किया। सोमवार को श्री हनुमान चालीसा पाठ, प्रार्थना और भगवान विष्णु की आरती के बाद रंगमंच पर दिखाया गया कि देवर्षि नारद कठोर तपस्या कर कामदेव पर विजय प्राप्त करते हैं। अपनी इस सफलता पर उन्हें अहंकार हो जाता है और वह स्वयं को काम और मोह से परे समझने लगते हैं। नारद के अहंकार को दूर करने के लिए भगवान विष्णु लीला रचते हैं।
नारद को एक सुंदर राजकुमारी के स्वयंवर की जानकारी मिलती है और वह उससे विवाह करने की इच्छा रखते हैं। वह भगवान विष्णु से अपना रूप सुंदर बनाने का वरदान मांगते हैं। भगवान विष्णु उनकी परीक्षा लेने के लिए उन्हें ऐसा रूप देते हैं, जिससे स्वयंवर में राजकुमारी उनका वरण नहीं करती। इसके बाद नारद को अपनी भूल और अहंकार का एहसास होता है। लीला के माध्यम से कलाकारों ने संदेश दिया कि व्यक्ति को अपनी उपलब्धियों पर अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार मनुष्य के विवेक को समाप्त कर देता है।
भगवान विष्णु की लीला के बाद देवर्षि नारद को अपनी भूल का बोध होता है और वह भगवान की शरण में जाते हैं। मंचन के दौरान कलाकारों के अभिनय और संवादों ने दर्शकों को बांधे रखा। लीला देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामलीला मैदान पहुंचे। भगवान श्रीराम के जयकारों से रामलीला मैदान गूंज उठा।
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व्यवस्था में समिति के कार्यकारी अध्यक्ष धीरज कुमार बिश्नोई, निर्देशक सुधीर कुमार बिश्नोई, कोषाध्यक्ष नवनीत पहलवान, विनोद नंबरदार, सुशील नंबरदार, केके बिश्नोई, मास्टर सुरेंद्र बिश्नोई, राधेश्याम भुइयार, राजेंद्र सिंह, देवेंद्र बिश्नोई, धर्मपाल चौहान, सनी बिश्नोई, इंद्रजीत सिंह बिश्नोई आदि रहे।
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श्री रामलीला के 117वें 18 दिवसीय मंचन के पहले दिन सोमवार को श्री भोले बाबा आदर्श रामलीला-रासलीला नाटक कला मंडल चंदौसी के कलाकारों ने रंगमंच पर नारद मोह और विष्णु लीला का सुंदर मंचन किया। सोमवार को श्री हनुमान चालीसा पाठ, प्रार्थना और भगवान विष्णु की आरती के बाद रंगमंच पर दिखाया गया कि देवर्षि नारद कठोर तपस्या कर कामदेव पर विजय प्राप्त करते हैं। अपनी इस सफलता पर उन्हें अहंकार हो जाता है और वह स्वयं को काम और मोह से परे समझने लगते हैं। नारद के अहंकार को दूर करने के लिए भगवान विष्णु लीला रचते हैं।
नारद को एक सुंदर राजकुमारी के स्वयंवर की जानकारी मिलती है और वह उससे विवाह करने की इच्छा रखते हैं। वह भगवान विष्णु से अपना रूप सुंदर बनाने का वरदान मांगते हैं। भगवान विष्णु उनकी परीक्षा लेने के लिए उन्हें ऐसा रूप देते हैं, जिससे स्वयंवर में राजकुमारी उनका वरण नहीं करती। इसके बाद नारद को अपनी भूल और अहंकार का एहसास होता है। लीला के माध्यम से कलाकारों ने संदेश दिया कि व्यक्ति को अपनी उपलब्धियों पर अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार मनुष्य के विवेक को समाप्त कर देता है।
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भगवान विष्णु की लीला के बाद देवर्षि नारद को अपनी भूल का बोध होता है और वह भगवान की शरण में जाते हैं। मंचन के दौरान कलाकारों के अभिनय और संवादों ने दर्शकों को बांधे रखा। लीला देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामलीला मैदान पहुंचे। भगवान श्रीराम के जयकारों से रामलीला मैदान गूंज उठा।
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व्यवस्था में समिति के कार्यकारी अध्यक्ष धीरज कुमार बिश्नोई, निर्देशक सुधीर कुमार बिश्नोई, कोषाध्यक्ष नवनीत पहलवान, विनोद नंबरदार, सुशील नंबरदार, केके बिश्नोई, मास्टर सुरेंद्र बिश्नोई, राधेश्याम भुइयार, राजेंद्र सिंह, देवेंद्र बिश्नोई, धर्मपाल चौहान, सनी बिश्नोई, इंद्रजीत सिंह बिश्नोई आदि रहे।