बैरंग लौटी रेलवे की टीम: ग्रामीण बोले- पीपल में हैं पूर्वजों का वास, जानिए पूरा मामला
कुछ लोग इतने भावुक हो गए कि उनकी आंखों से आंसू निकल आए।रेलवे टीम को बिना पेड़ काटे लौटना पड़ा। लोगों का कहना है कि यह पेड़ हमारी आस्था का प्रतीक है।
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मुरादाबाद में रेलवे लाइन के किनारे वर्षों पुराने पीपल के पेड़ को हटाने पहुंची रेलवे की टीम को भावनात्मक विरोध का सामना करना पड़ा। यह पेड़ रामगंगा किनारे अटल घाट के सामने है। लोगों का कहना था कि हम वर्षों से इसकी पूजा करते हैं। इसमें हमारे पूर्वजों का वास है।
कुछ लोग इतने भावुक हो गए कि उनकी आंखों से आंसू निकल आए। लिहाजा रेलवे टीम को बिना पेड़ काटे लौटना पड़ा। क्षमा शंखधर, सत्यप्रकाश रस्तोगी, अमन शर्मा आदि लोगों का कहना है कि यह पेड़ हमारी आस्था का प्रतीक है। इस पर जो घड़े टंगे हुए हैं, वे पूर्वजों को तर्पण के लिए हैं। हिंदू धर्म में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद दस कर्म होने तक उसकी आत्मा को जल अर्पित किया जाता है। ऐसे में हम इसे कटने नहीं देंगे।
रेलवे का तर्क है कि यह पेड़ काफी पुराना होने के कारण कभी भी रेलवे लाइन पर गिर सकता है। लोगों का कहना है कि पेड़ का झुकाव रेलवे लाइन की तरफ न होकर सड़क की ओर है। पास में ही प्राचीन शिव मन्दिर भी है। ऐसे में सुबह शाम यहां पूजा करने के लिए कई लोग आते हैं। खासकर शनिवार के दिन सैकड़ों लोग दीया जलाने आते हैं। लोगों के विरोध के बाद रविवार को रेलवे की टीम लौट गई। फिलहाल अभी पेड़ काटने के लिए कोई निर्णय नहीं लिया गया है।