'मैं मरने जा रहा हूं' : मेरी मां बहुत प्यारी हैं...अगले जन्म में भी मिलें, मेरा अंतिम संस्कार अयोध्या में करना
सिविल लाइंस स्थित बीएसएनएल कॉलोनी में अंकित तिवारी ने परेशान होकर फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। बहन को फोन पर जानकारी देकर उसने फोन बंद कर लिया था। मौके पर पहुंची पुलिस को सुसाइड नोट मिला और फोरेंसिक टीम ने जांच की। अंकित का सुसाइड नोट पढ़कर सभी हैरान रह गए।
विस्तार
कश्मीर में रहने वाली बहन को कॉल कर अंकित तिवारी (24) ने कहा बहुत परेशान हूं बहन... मरने जा रहा हूं। इसके बाद युवक ने फोन ऑफ कर लिया और फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। परेशान बहन ने उसके दोस्त सचिन चौधरी को घर पर भेजा तब तक अंकित फंदे पर झूल चुका था। सूचना पर पहुंची पुलिस व फोरेंसिक टीम को माैके से सुसाइड नोट भी मिला। पुलिस के अनुसार आत्महत्या की वजह प्रेम प्रसंग है।
यह घटना बृहस्पतिवार को शहर के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के रामगंगा विहार स्थित बीएसएनएल कॉलोनी में हुई। कॉलोनी में निवासी ज्ञानलक्ष्मी तिवारी मूलरूप से अयोध्या के गोसाईगंज की रहने वाली हैं। उनके पति श्रीकांत तिवारी बीएसएनएल में कार्यरत थे। उनकी माैत के बाद ज्ञानलक्ष्मी को नौकरी मिल गई। ज्ञानलक्ष्मी का बड़ा बेटा अंकुश तिवारी गांव में ही परिवार के साथ रहता है।
बेटी शिल्पी पति के साथ कश्मीर में रहती हैं। ज्ञानलक्ष्मी के साथ उनका छोटा बेटा अंकित तिवारी रहता था। अंकित जल निगम में संविदा पर कार्यरत था। ज्ञानलक्ष्मी ने पुलिस को बताया कि बृहस्पतिवार दोपहर करीब ढाई बजे अंकित ने शिल्पी को फोन कर कहा था कि बहुत परेशान हूं और मैं जान देने जा रहा हूं। इसके बाद उसने फोन बंद कर लिया था।
इसके बाद शिल्पी ने इसकी जानकारी अपनी मां को दी और तुरंत घर जाने के लिए कहा। साथ ही शिल्पी ने पड़ोस में रहने वाले अंकित के दोस्त सचिन चौधरी को घर पर जाने को कहा। सचिन तुरंत घर पहुंच गया और उसने देखा कि दरवाजा अंदर से बंद था। तब तक ज्ञानलक्ष्मी भी मौके पर पहुंच गईं।
सचिन ने पड़ोस में निर्माण कार्य कर रहे मजदूरों की मदद से सीढ़ी लगाकर खिड़की से झांक कर देखा तो अंकित दुपट्टे के सहारे फंदे से लटका हुआ था। सूचना पर सीओ सिविल लाइंस अर्पित कपूर और थाना प्रभारी मनीष सक्सेना मौके पर पहुंच गए। मृतक की मां से जानकारी ली। फोरेंसिक टीम ने जांच पड़ताल की और शव को फंदे से नीचे उतारा।
मेरी मां बहुत प्यारी हैं... अगले जन्म में भी मिलें
सुसाइड नोट में अंकित ने लिखा कि मैं जो कर रहा हूं, अपने मन से कर रहा हूं। इसके लिए मैं खुद जिम्मेदार हूं। मेरे जाने के बाद मेरे जितने भी रुपये हैं, वह मेरी मां को दे दिए जाएं। मैं चाहता हूं कि मेरा परिवार हमेशा खुश रहे। भैया मम्मी का हमेशा ध्यान रखना। मैं साथ नहीं दे पाऊंगा। उसके लिए सभी से माफी मांगता हूं।
हो सके तो मेरा अंतिम संस्कार अयोध्या में ही करना। मैं वहीं रहना चाहता हूं। अगर अगला जन्म मिले तो मुझे मेरी मां ही मिलें। मेरी मां बहुत प्यारी हैं। सुसाइड नोट में अंकित ने लिखा कि मैं कानून के रखवालों से कहना चाहता हूं कि लड़कों को समझो, हर लड़का गलत नहीं होता है। अंत में लिखा... मैं जहां भी रहूं, तुम्हारे साथ रहूं।
नहीं थम रहे मां के आंसू
ज्ञानलक्ष्मी ने बताया कि वह रोज की तरह बृहस्पतिवार सुबह ड्यूटी चली गईं थीं। तब अंकित घर में ही मौजूद था। उसे किसी तरह की कोई परेशानी नहीं लग रही थी। रोते हुए उन्होंने कहा कि अगर उन्हें जरा सा भी अंदाजा होता कि बेटे कोई परेशानी है तो वह घर में रहतीं और बेटे की जान बचा लेतीं। बेटे की माैत से बेहाल ज्ञानलक्ष्मी के आंसू थम नहीं रहे हैं।