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22 साल तक फर्जी शैक्षिक प्रमाणों से की नौकरी, गर्दन फंसती देख दिया त्याग पत्र
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मुरादाबाद। शहर कोतवाली क्षेत्र के एक इंटर कालेज में फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के जरिए 22 साल तक सहायक अध्यापक के पद पर एक व्यक्ति ने नौकरी की। शिकायत पर जब जांच शुरू हुई तो उसने अपनी गर्दन फंसती देख नौकरी से त्याग पत्र दे दिया। प्रधानाचार्य ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज करा दिया है।
कोतवाली क्षेत्र के बुधबाजार स्थित जीजी हिन्दू इंटर कालेज के प्रधानाचार्य कुलदीप बरनवाल ने मझोला थानाक्षेत्र के लाइन पार प्रेम नगर गली नंबर पांच निवासी वीरेंद्र कुमार यादव के खिलाफ केस दर्ज कराया है। जिसमें उन्होंने बताया कि कालेज में एक जुलाई 1998 को वीरेंद्र कुमार यादव की सहायक अध्यापक के रूप में तैनाती हुई थी। उनका कहना है कि वीरेंद्र का चयन संयुक्त शिक्षा निदेशक मंडल मुरादाबाद की चयन समिति ने किया था। साल 2016 में शासन द्वारा वीरेंद्र कुमार यादव का विनियमितिकरण किया गया था। प्रधानाचार्य ने बताया कि एक जुलाई 2020 को वीरेंद्र कुमार यादव ने कालेज के प्रबंधक को त्याग पत्र दे दिया। जिसमें उन्होंने त्यागपत्र देने का कारण अपना निजी व्यवसाय शुरू करना बताया था। 24 जुलाई 2020 को उनका त्याग पत्र स्वीकार कर लिया गया था। इसके बाद शासन को भी इसकी सूचना भेज दी गई थी। 20 सितंबर 2020 को जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से कालेज प्रधानाचार्य और प्रबंधक को एक पत्र भेजा गया। जिसमें बताया गया कि विद्यालय में नियुक्त सहायक अध्यापक वीरेंद्र कुमार यादव के बीए और बीएड के शैक्षिक प्रमाण पत्रों के संबंध में उच्च स्तर से शिकायत मिली है। जिसमें बताया गया कि वीरेंद्र कुमार ने प्रमाण पत्रों में हेराफेरी कर मैरिट में स्थान हासिल किया है। इसके बाद शैक्षिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया गया तो इंटर, स्नातक और बीएड के अंक पत्रों में हेराफेरी सामने आई थी। कोतवाली प्रभारी अशोक कुमार ने बताया कि आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे। उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सालों तक कराता रहा नौकरी और लाखों रुपये की सैलरी भी ली, लेकिन पकड़ा नहीं गया
मुरादाबाद। एक कागज बनवाने के लिए लोग सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा लगाकर थक जाते हैं। जब जाकर सरकारी कागज हाथ लग पाता है। तमाम लोग तो सरकारी प्रक्रिया से तंग आकर कागज नहीं बनवा पाते हैं। लेकिन शहर के एक इंटर कालेज में एक व्यक्ति 22 साल तक सबकी आंखों में धूल झोंक कर नौकरी करता रहा, लेकिन किसी को इसकी भनक नहीं लग सकी। शिक्षा विभाग की ओर से आंखें बंद कर ली गईं। एक शिकायत नहीं हुई होती तो न जाने कब तक वीरेंद्र सरकारी खजाने को लूटता रहा। प्रधानाचार्य का कहना है कि शिकायत की जांच की भनक लगने पर ही वीरेंद्र ने त्याग पत्र दिया था। इन 22 सालों में उसने लाखों रुपये सैलरी के रूप में लिए हैं। आरोपी ने अपनी गर्दन फंसती देख उसने कालेज प्रबंधक को त्याग पत्र दे दिया। जिसमें उसने अपने त्याग पत्र में बताया कि उसने अपना व्यवसाय कर दिया है।
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कोतवाली क्षेत्र के बुधबाजार स्थित जीजी हिन्दू इंटर कालेज के प्रधानाचार्य कुलदीप बरनवाल ने मझोला थानाक्षेत्र के लाइन पार प्रेम नगर गली नंबर पांच निवासी वीरेंद्र कुमार यादव के खिलाफ केस दर्ज कराया है। जिसमें उन्होंने बताया कि कालेज में एक जुलाई 1998 को वीरेंद्र कुमार यादव की सहायक अध्यापक के रूप में तैनाती हुई थी। उनका कहना है कि वीरेंद्र का चयन संयुक्त शिक्षा निदेशक मंडल मुरादाबाद की चयन समिति ने किया था। साल 2016 में शासन द्वारा वीरेंद्र कुमार यादव का विनियमितिकरण किया गया था। प्रधानाचार्य ने बताया कि एक जुलाई 2020 को वीरेंद्र कुमार यादव ने कालेज के प्रबंधक को त्याग पत्र दे दिया। जिसमें उन्होंने त्यागपत्र देने का कारण अपना निजी व्यवसाय शुरू करना बताया था। 24 जुलाई 2020 को उनका त्याग पत्र स्वीकार कर लिया गया था। इसके बाद शासन को भी इसकी सूचना भेज दी गई थी। 20 सितंबर 2020 को जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से कालेज प्रधानाचार्य और प्रबंधक को एक पत्र भेजा गया। जिसमें बताया गया कि विद्यालय में नियुक्त सहायक अध्यापक वीरेंद्र कुमार यादव के बीए और बीएड के शैक्षिक प्रमाण पत्रों के संबंध में उच्च स्तर से शिकायत मिली है। जिसमें बताया गया कि वीरेंद्र कुमार ने प्रमाण पत्रों में हेराफेरी कर मैरिट में स्थान हासिल किया है। इसके बाद शैक्षिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया गया तो इंटर, स्नातक और बीएड के अंक पत्रों में हेराफेरी सामने आई थी। कोतवाली प्रभारी अशोक कुमार ने बताया कि आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे। उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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सालों तक कराता रहा नौकरी और लाखों रुपये की सैलरी भी ली, लेकिन पकड़ा नहीं गया
मुरादाबाद। एक कागज बनवाने के लिए लोग सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा लगाकर थक जाते हैं। जब जाकर सरकारी कागज हाथ लग पाता है। तमाम लोग तो सरकारी प्रक्रिया से तंग आकर कागज नहीं बनवा पाते हैं। लेकिन शहर के एक इंटर कालेज में एक व्यक्ति 22 साल तक सबकी आंखों में धूल झोंक कर नौकरी करता रहा, लेकिन किसी को इसकी भनक नहीं लग सकी। शिक्षा विभाग की ओर से आंखें बंद कर ली गईं। एक शिकायत नहीं हुई होती तो न जाने कब तक वीरेंद्र सरकारी खजाने को लूटता रहा। प्रधानाचार्य का कहना है कि शिकायत की जांच की भनक लगने पर ही वीरेंद्र ने त्याग पत्र दिया था। इन 22 सालों में उसने लाखों रुपये सैलरी के रूप में लिए हैं। आरोपी ने अपनी गर्दन फंसती देख उसने कालेज प्रबंधक को त्याग पत्र दे दिया। जिसमें उसने अपने त्याग पत्र में बताया कि उसने अपना व्यवसाय कर दिया है।
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