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मुरादाबाद अग्निकांड: 100 फीसदी जल गए थे तीनों बच्चे और सास बहू, सिकुड़ गई थीं सांस की नलियां
Fri, 26 Aug 2022 11:51 PM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
Published by: मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 26 Aug 2022 11:51 PM IST
सार
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, शमा परवीन, कमर आरा, नाफिया, इबाद और उमैमा का शरीर 100 फीसदी जल चुका था। सांस की नलियां भी सिकुड़ गई थीं। शरीर की खाल जल गई थी और खून सूख गया था। अधिक जल जाने की वजह से पांचों की मौत हुई थी।
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moradabad fire
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मुरादाबाद के असालतपुरा में घर के अंदर आग में फंसे तीनों बच्चे और सास बहू का शरीर 100 फीसदी जल गया था। हालत ऐसी हो गई थी कि सांस की नलियां भी सिकुड़ गईं थीं। जिससे चारों की मौत हो गई थी।
डीएम और एसएसपी के आदेश पर गलशहीद और सिविल लाइंस थाने की पुलिस ने पंचनामा करने के बाद बृहस्पतिवार देर रात ही शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था, उधर सीएमओ ने रात में ही पोस्टमार्टम स्टाफ को अलर्ट कर दिया था। बारह बजे से शुरू हुआ पोस्टमार्टम सुबह चार बजे तक चला।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, शमा परवीन, कमर आरा, नाफिया, इबाद और उमैमा का शरीर 100 फीसदी जल चुका था। सांस की नलियां भी सिकुड़ गई थीं। शरीर की खाल जल गई थी और खून सूख गया था। अधिक जल जाने की वजह से पांचों की मौत हुई थी।
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मैं तो जान बचाने के लिए चौथी मंजिल से जा रही थी कूदने
घटना के समय मैं अपने 14 साल के बेटे अफ्फान के साथ चौथी मंजिल पर थी। नीचे चीखने चिल्लाने की आवाज सुन कर तीसरी मंजिल पर आकर कमरे में भरे धुएं को निकालने के लिए मैंने खिड़की खोली ही थी कि पूरा कमरा धुआं ही धुआं हो गया। मैं जान बचाने के लिए खिड़की से कूदने जा रही थी, लेकिन नीचे आग बुझा रहे लोगों ने कहा कि कूदना मत हमने सीढ़ी मंगाई है, अभी बाहर निकाल लेंगे। तब मैं वहीं रुक गई।
घटना के समय घर में मौजूद इरशाद की पुत्र वधू आसमां का यह बताते हुए गला रुंध गया। रुंधे गले से आसमां ने बताया कि जब वह तीसरी मंजिल के कमरे में फंसी हुई थी तभी उसके 14 साल के बेटे अफ्फान ने आवाज लगाते हुए ऊपर आने को कहा। धुएं के कारण सीढ़ी दिखाई नहीं दे रही थी। अंदाज से किसी तरह ऊपर चढ़ी तो गिर गई। इस बीच बेटा खुद नीचे आने लगा। उसने हाथ पकड़ कर ऊपर खींचा, लेकिन फिर हाथ छूट गया गया, उसने दोबारा कोशिश की और मुझे खींच कर ऊपर छत पर ले गया। बाद में फायर ब्रिगेड वालों ने सीढ़ी लगा कर उन्हें उतारा।
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डीएम और एसएसपी के आदेश पर गलशहीद और सिविल लाइंस थाने की पुलिस ने पंचनामा करने के बाद बृहस्पतिवार देर रात ही शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था, उधर सीएमओ ने रात में ही पोस्टमार्टम स्टाफ को अलर्ट कर दिया था। बारह बजे से शुरू हुआ पोस्टमार्टम सुबह चार बजे तक चला।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, शमा परवीन, कमर आरा, नाफिया, इबाद और उमैमा का शरीर 100 फीसदी जल चुका था। सांस की नलियां भी सिकुड़ गई थीं। शरीर की खाल जल गई थी और खून सूख गया था। अधिक जल जाने की वजह से पांचों की मौत हुई थी।
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मैं तो जान बचाने के लिए चौथी मंजिल से जा रही थी कूदने
घटना के समय मैं अपने 14 साल के बेटे अफ्फान के साथ चौथी मंजिल पर थी। नीचे चीखने चिल्लाने की आवाज सुन कर तीसरी मंजिल पर आकर कमरे में भरे धुएं को निकालने के लिए मैंने खिड़की खोली ही थी कि पूरा कमरा धुआं ही धुआं हो गया। मैं जान बचाने के लिए खिड़की से कूदने जा रही थी, लेकिन नीचे आग बुझा रहे लोगों ने कहा कि कूदना मत हमने सीढ़ी मंगाई है, अभी बाहर निकाल लेंगे। तब मैं वहीं रुक गई।
घटना के समय घर में मौजूद इरशाद की पुत्र वधू आसमां का यह बताते हुए गला रुंध गया। रुंधे गले से आसमां ने बताया कि जब वह तीसरी मंजिल के कमरे में फंसी हुई थी तभी उसके 14 साल के बेटे अफ्फान ने आवाज लगाते हुए ऊपर आने को कहा। धुएं के कारण सीढ़ी दिखाई नहीं दे रही थी। अंदाज से किसी तरह ऊपर चढ़ी तो गिर गई। इस बीच बेटा खुद नीचे आने लगा। उसने हाथ पकड़ कर ऊपर खींचा, लेकिन फिर हाथ छूट गया गया, उसने दोबारा कोशिश की और मुझे खींच कर ऊपर छत पर ले गया। बाद में फायर ब्रिगेड वालों ने सीढ़ी लगा कर उन्हें उतारा।