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हैकर्स को हक्का-बक्का कर देगा ‘प्लगी’
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Thu, 27 Oct 2016 01:47 AM IST
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यू ट्यूब पर आईडीएम और दूसरे साफ्टवेयर के क्रेक और पायरेटेड वर्जन के जरिए वीडियो डाउनलोडिंग खतरे से खाली नहीं है। सुरक्षा एजेंसियां आगाह कर चुकी हैं कि इंटरनेट पर फ्री मिल रहे साफ्टवेयर के ये वर्जन अपने साथ वायरस लेकर आते हैं और इनकी बदौलत पाकिस्तान और चाइना में बैठे हैकर्स आपके सिस्टम का पूरा डेटा चुरा लेते हैं।
इन हैकर्स को टक्कर देने के लिए एमआईटी के स्टूडेंट्स ने ‘प्लगी’ नाम का साफ्टवेयर ईजाद किया है जो फिलहाल पूरी तरह फ्री है और इसके जरिए आप वीडियो - मूवी आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं।
एमआईटी में कंप्यूटर साइंस (तृतीय वर्र्ष) के छात्र सूर्य प्रताप सिंह, सार्थक गोयल, शोभित भटनागर, श्रुति अग्रवाल, स्पर्श सक्सेना और दीपक गुप्ता की ‘अविष्कार टीम’ ने यह साफ्टवेयर ईजाद किया है। फिलहाल 600 से अधिक लोग इसे इस्तेमाल कर रहे हैं।
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इस साफ्टवेयर की कीमत महज 99 रुपये रखी गई है हालांकि अभी यह फ्री रहेगा। स्टूडेंट्स की कामयाबी को देखते हुए साफ्टवेयर प्रोजेक्ट का खर्च एमआईटी प्रबंधन ने उठाने का फैसला किया है। उल्लेखनीय है कि यू ट्यूब से वीडियो- मूवी डाउनलोड करने के लिए साफ्टवेयर की जरूरत होती है।
सामान्यत: इसके लिए आईडीएम साफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी कीमत 2000 रुपये है। बाकी साफ्टवेयर भी इसी रेंज में हैं। लेकिन साफ्टवेयर खरीदने के बजाए लोग इंटरनेट पर पड़े इनके पायरेटेड और क्रेक वर्जन डाउन लोड कर लेेते हैं। लेकिन इन क्रेक वर्जन के साथ वायरस होता है जो सीधे सिस्टम में सेंधमारी शुरू कर देता है।
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इन हैकर्स को टक्कर देने के लिए एमआईटी के स्टूडेंट्स ने ‘प्लगी’ नाम का साफ्टवेयर ईजाद किया है जो फिलहाल पूरी तरह फ्री है और इसके जरिए आप वीडियो - मूवी आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं।
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एमआईटी में कंप्यूटर साइंस (तृतीय वर्र्ष) के छात्र सूर्य प्रताप सिंह, सार्थक गोयल, शोभित भटनागर, श्रुति अग्रवाल, स्पर्श सक्सेना और दीपक गुप्ता की ‘अविष्कार टीम’ ने यह साफ्टवेयर ईजाद किया है। फिलहाल 600 से अधिक लोग इसे इस्तेमाल कर रहे हैं।
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इस साफ्टवेयर की कीमत महज 99 रुपये रखी गई है हालांकि अभी यह फ्री रहेगा। स्टूडेंट्स की कामयाबी को देखते हुए साफ्टवेयर प्रोजेक्ट का खर्च एमआईटी प्रबंधन ने उठाने का फैसला किया है। उल्लेखनीय है कि यू ट्यूब से वीडियो- मूवी डाउनलोड करने के लिए साफ्टवेयर की जरूरत होती है।
सामान्यत: इसके लिए आईडीएम साफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी कीमत 2000 रुपये है। बाकी साफ्टवेयर भी इसी रेंज में हैं। लेकिन साफ्टवेयर खरीदने के बजाए लोग इंटरनेट पर पड़े इनके पायरेटेड और क्रेक वर्जन डाउन लोड कर लेेते हैं। लेकिन इन क्रेक वर्जन के साथ वायरस होता है जो सीधे सिस्टम में सेंधमारी शुरू कर देता है।