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Moradabad News: मनरेगा के फर्जी भुगतान करने में ग्राम प्रधान, कंप्यूटर ऑपरेटर, तत्कालीन रोजगार सेवक, ग्राम सचिव, एपीओ दोषी मिले, फंसना तय

Sat, 29 Mar 2025 01:51 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद Updated Sat, 29 Mar 2025 01:51 AM IST
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Gram Pradhan, Computer Operator, then Employment Officer, Gram Secretary, APO were found guilty of making fake payments in MNREGA, action is sure to be taken against them
अमरोहा। भले ही अधिकारी क्रिकेटर मोहम्मद मोहम्मद शमी की बहन शबीना -बहनोई मोहम्मद गजनबी समेत परिवार के आठ लोगों को मनरेगा मजदूरी के फर्जी तरीके से भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं। लेकिन, यह तो साफ है कि फर्जी तरीके से मनरेगा मजदूरी के रूप में भुगतान करने के मामले में ग्राम प्रधान, कंप्यूटर ऑपरेटर, तत्कालीन सचिव, रोजगार सेवक और एपीओ जिम्मेदार हैं। ग्राम प्रधान और उनके परिजन और कुछ करीबी भी इस खेल के शामिल हैं। अब तक की जांच में सभी दोषी मिले हैं, इनका फसना तय है। सब कुछ जानते हुए भी यह ग्राम प्रधान के परिवार के सदस्यों को बिना मजदूरी किए बिना भुगतान करते रहे। इन लोगों से फर्जी तरीके से ली गई मनरेगा मजदूरी की रकम वापस तो होगी साथ ही ग्राम प्रधान के अधिकार भी सीज हो सकते हैं। ग्राम प्रधान के परिजनों को दी गई मनरेगा मजदूरी वाले मस्टरोल पर जिम्मेदारों के हस्ताक्षर भी नहीं मिले हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार के रिपोर्ट मांगने के बाद जिले के अधिकारियों के होश उड़े हैं। तीन साल का रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं। इसके बाद कार्रवाई की बात कर रहे हैं। उधर, कार्रवाई के बचने के लिए जिम्मेदार उच्चाधिकारियों और रसूखदार नेताओं की शरण में पहुंचने लगे हैं।
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ये है पूरा मामला

क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बहन शबीना की शादी जोया ब्लॉक के गांव पलौला निवासी मोहम्मद गजनबी के साथ हुई है। शबीना की सास गुले आयशा ही ग्राम प्रधान हैं। शबीना और उनके पति गजनवी ने गांव में मनरेगा मजदूर का पंजीकरण करा रखा था। इतना ही नहीं, शबीना के पति गजनबी और एमबीबीएस व एलएलबी कर रहे उनके दो देवरों का भी मनरेगा मजदूर के रूप में जॉब कार्ड बना है। चारों के खातों में मनरेगा की करीब 2.66 लाख रुपये मजदूरी भेजी गई है। चार साल में शबीना ने 71,013 रुपये, पति गजनवी ने 65 हजार, लखनऊ में एमबीबीएस कर रहे देवर आमिर सुहेल ने 63,851, एलएलबी कर रहे देवर शेखू ने 67 हजार रुपये की मजदूरी प्राप्त की। चारों के मनरेगा के जॉब कार्ड 2021 में बने थे, जो अगस्त 2024 तक एक्टिव रहे। इसमें सीधे तौर पर सरकारी धन का दुरुपयोग का मामला सुर्खियों में आने के बाद डीएम ने परियोजना निदेशक अमरेंद्र प्रताप सिंह को जांच सौंप है। इसके बाद से अधिकारी तीन साल का रिकार्ड खंगालने में जुटे हैं।
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पलौला गांव में मनरेगा के कार्यों का तीन साल के रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। गांव में मनरेगा जॉब कार्ड बनाना और मजदूरों से काम कराने के लिए रोजगार सेवक, ग्राम सचिव और प्रधान जिम्मेदार होते हैं। अब तक की जांच में ग्राम प्रधान और कुछ कर्मचारी दोषी मिले है। मामले में केंद्र और प्रदेश सरकार ने रिपोर्ट मांगी है। इसलिए, बारीकी से रिकॉर्ड चेक किया जा रहा है। जिन लोगों ने गलत तरीके से मनरेगा मजदूरी ली है, उनसे रिकवरी की जाएगी। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।- अश्वनी कुमार मिश्रा, सीडीओ
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