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तीन समितियों में किसानों के लोन के नाम पर फर्जीवाड़ा
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मुरादाबाद। जिले की तीन सहकारी समितियों में किसानों को दिए लोन पर फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। ऋण धारक अधिकांश किसानों के पास के लोन वापस करने की रसीद है, जबकि दूसरी रसीद जिला सहकारी बैंक से गायब है। शिकायत के बाद विभाग जांच में जुट गया है। कई समिति कर्मचारी व अधिकारी जांच के घेरे में हैं। समितियों के रिकार्ड में दर्ज किसानों पर बकाया ऋण व जिला सहकारी बैंक की उधारी में भारी अंतर है।
सहकारी समिति सरकड़ा खास क्षेत्र के गांव सरकड़ा खास निवासी किसान अली हुसैन ने समिति से ऋण लिया था। अली हुसैन ने डीएम से की शिकायत में बताया कि ऋण लेने के बाद वर्ष 2016 में उसने समिति को वापस भी कर दिया था, ऋण जमा करने की रसीद भी उसके पास है। इसके बावजूद 95 हजार रुपये की ऋण वसूली का नोटिस उसके पास पहुंच गया। डीएम ने सीडीओ को मामले की जांच कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। जांच में फर्जीवाड़ा सामने आने पर सहकारिता विभाग ने तीन समितियों में जांच बैठा दी। विभाग सहकारी समिति सरकड़ा खास, बेरनी, बीजना की जांच कर रहा है। तीनों समिति क्षेत्र के करीब तीन दर्जन से अधिक किसानों से संपर्क किया, तो पूरा मामला सामने आया। इनमें अधिकांश किसान ऐसे मिले हैं, जिन्होंने समिति को ऋण लौटा दिया है और उनके पास समिति द्वारा दी गई रसीद भी है। ये रसीद का दूसरा हिस्सा बैंकों से गायब है। विभाग मामले की जांच कर रहा है।
समिति कर्मचारी जांच के घेरे में
सहकारी समितियां जिला सहकारी बैंक के धन से संचालित होती है। बैंक से ही ऋण लेकर किसानों को खाद व नकदी ऋण बांटती है। किसान के द्वारा वापस किए गए ऋण की रसीद समिति किसान को देती है। साथ ही उसी रसीद का दूसरा हिस्सा समिति बैंक में नकदी यानी पैसों के साथ जमा करती है। तीन समितियों की चल रही जांच में सामने आया है कि अधिकांश किसानों के पास ऋण जमा करने की समिति की रसीद है, इसके बावजूद किसान जिला सहकारी बैंक के कर्जदार बने हुए हैं। इस पूरे मामले में समिति कर्मचारी जांच के घेरे में आ रहे हैं।
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जांच के बाद होगा फर्जीवाड़े का आंकलन
किसानों के साथ सहकारी समिति में धोखाधड़ी की गई है। कितने किसानों के साथ फर्जीवाड़ा किया गया और इस फर्जीवाड़े में कितनी रकम का गबन हुआ है। इसका आंकलन पूरी जांच के बाद ही हो पाएगा। इस बारे में अधिकारी अभी स्पष्ट नहीं बता पा रहे हैं।
सहकारी समितियों पर किसानों को ऋण बांटा जाता है। वापस किए गए ऋण में कुछ अंतर आ रहा है। अभी तीन समितियाें की जांच की जा रही है। किसानों के पास वापस किए ऋण की रसीद है। सही स्थिति की जानकारी जांच के बाद ही पता चल पाएगी। पूरे मामले में जांच चल रही है।
जितेंद्र पाल सिंह, एआर कोआपरेटिव।
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सहकारी समिति सरकड़ा खास क्षेत्र के गांव सरकड़ा खास निवासी किसान अली हुसैन ने समिति से ऋण लिया था। अली हुसैन ने डीएम से की शिकायत में बताया कि ऋण लेने के बाद वर्ष 2016 में उसने समिति को वापस भी कर दिया था, ऋण जमा करने की रसीद भी उसके पास है। इसके बावजूद 95 हजार रुपये की ऋण वसूली का नोटिस उसके पास पहुंच गया। डीएम ने सीडीओ को मामले की जांच कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। जांच में फर्जीवाड़ा सामने आने पर सहकारिता विभाग ने तीन समितियों में जांच बैठा दी। विभाग सहकारी समिति सरकड़ा खास, बेरनी, बीजना की जांच कर रहा है। तीनों समिति क्षेत्र के करीब तीन दर्जन से अधिक किसानों से संपर्क किया, तो पूरा मामला सामने आया। इनमें अधिकांश किसान ऐसे मिले हैं, जिन्होंने समिति को ऋण लौटा दिया है और उनके पास समिति द्वारा दी गई रसीद भी है। ये रसीद का दूसरा हिस्सा बैंकों से गायब है। विभाग मामले की जांच कर रहा है।
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समिति कर्मचारी जांच के घेरे में
सहकारी समितियां जिला सहकारी बैंक के धन से संचालित होती है। बैंक से ही ऋण लेकर किसानों को खाद व नकदी ऋण बांटती है। किसान के द्वारा वापस किए गए ऋण की रसीद समिति किसान को देती है। साथ ही उसी रसीद का दूसरा हिस्सा समिति बैंक में नकदी यानी पैसों के साथ जमा करती है। तीन समितियों की चल रही जांच में सामने आया है कि अधिकांश किसानों के पास ऋण जमा करने की समिति की रसीद है, इसके बावजूद किसान जिला सहकारी बैंक के कर्जदार बने हुए हैं। इस पूरे मामले में समिति कर्मचारी जांच के घेरे में आ रहे हैं।
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जांच के बाद होगा फर्जीवाड़े का आंकलन
किसानों के साथ सहकारी समिति में धोखाधड़ी की गई है। कितने किसानों के साथ फर्जीवाड़ा किया गया और इस फर्जीवाड़े में कितनी रकम का गबन हुआ है। इसका आंकलन पूरी जांच के बाद ही हो पाएगा। इस बारे में अधिकारी अभी स्पष्ट नहीं बता पा रहे हैं।
सहकारी समितियों पर किसानों को ऋण बांटा जाता है। वापस किए गए ऋण में कुछ अंतर आ रहा है। अभी तीन समितियाें की जांच की जा रही है। किसानों के पास वापस किए ऋण की रसीद है। सही स्थिति की जानकारी जांच के बाद ही पता चल पाएगी। पूरे मामले में जांच चल रही है।
जितेंद्र पाल सिंह, एआर कोआपरेटिव।