{"_id":"6ac6b588cf03258e9e0d15f8","slug":"fleecing-patients-selling-a-ten-rupee-glucose-bottle-for-100-rupees-moradabad-news-c-15-1-mbd1044-1011256-2026-10-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Moradabad News: मरीजों से लूट....दस रुपये की ग्लूकोज की बोतल दे रहे 100 रुपये में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Moradabad News: मरीजों से लूट....दस रुपये की ग्लूकोज की बोतल दे रहे 100 रुपये में
विज्ञापन
आईवी सेट, कैनुला, खाने की नली, यूरो बैग तक 10 गुना कीमत पर बेचे जा रहे
गठिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाला इंजेक्शन थोक बाजार में 10 हजार, अस्पताल में 28 हजार का
अमर उजाला पड़ताल
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। अस्पताल में मरीज के इलाज के साथ ही बिल का मीटर भी तेजी से चलता है। दवा, इंजेक्शन और छोटे-छोटे चिकित्सकीय उपकरणों के नाम पर ऐसा अंतर सामने आया है, जिसे देखकर मरीज के तीमारदार भी चौंक जाएं। पड़ताल में एक ही सामान के तीन अलग-अलग दाम सामने आए। अस्पताल में जिस ग्लूकोज की बोतल के लिए 100 रुपये वसूले जा रहे हैं, वह मेडिकल स्टोर पर करीब 70 रुपये और थोक बाजार में करीब 10 रुपये में उपलब्ध है।
यह अंतर सिर्फ ग्लूकोज तक सीमित नहीं है। आईवी सेट, कैनुला, यूरिन कैथेटर, यूरो बैग और खाने की नली जैसी रोजमर्रा की जरूरत वाली सामग्री अस्पताल में कई गुना कीमत पर पहुंच रही है। पड़ताल में अस्पताल से बाहर निकलकर निजी मेडिकल स्टोर पर दाम पूछे गए तो कई सामानों पर 20 से 30 प्रतिशत तक का अंतर मिला। थोक बाजार में पहुंचने पर यही अंतर और बढ़ गया। अस्पताल में 120 रुपये का आईवी सेट बाजार में करीब 12 रुपये का बताया गया। 8-10 रुपये की कैनुला के लिए अस्पताल में 120 रुपये तक लिए जा रहे हैं। यूरो बैग और ब्लड सेट जैसे सामानों में भी यही तस्वीर सामने आई। महंगी दवाओं में अंतर और बड़ा है। गठिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाला गोलिमुमैब इंजेक्शन कांठ रोड और दिल्ली रोड स्थित अस्पतालों में करीब 28 हजार रुपये का बताया गया, जबकि कंजरी सराय के थोक बाजार में इसकी कीमत करीब आठ से 10 हजार रुपये बताई गई। इंटासेप्ट इंजेक्शन भी अस्पताल में करीब 10 हजार रुपये और बाजार में करीब तीन हजार रुपये का बताया गया। गंभीर लिवर रोगियों के उपचार में इस्तेमाल होने वाले एल्बुमिन इंजेक्शन की कीमत में भी बड़ा अंतर सामने आया।
-- -- -- -- -- --
इस तरह होता है आपके साथ खेल
दवा/उपकरण - असली कीमत - अस्पतालों में कीमत
आईवी सेट - 12 रुपये - 120 रुपये
कैनुला - 8-10 रुपये - 120 रुपये
यूरीन कैथेटर - 40 रुपये - 250 रुपये
यूरो बैग - 40 रुपये - 260 रुपये
बच्चों का ड्रिप सेट - 45 रुपये - 250 रुपये
ब्लड सेट - 20 रुपये - 220 रुपये
खाने की नली - 18-20 रुपये - 120 रुपये
-- -- -- -- -- --
सरकारी आंकड़े भी दिखा रहे कीमतों का खेल
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) की 25 मार्च 2026 की अधिसूचना में सेफ्ट्रियाक्सोन 500 एमजी इंजेक्शन की सीलिंग कीमत 51.49 रुपये प्रति वायल और 1000 एमजी की 63.88 रुपये तय की गई थी। सेफ्यूरोक्सिम 1500 एमजी इंजेक्शन की कीमत 346.90 रुपये प्रति वायल निर्धारित थी। कैंसर की दवाओं में भी कीमतें सरकार की निगरानी में हैं। जून 2026 में एनपीपीए ने सिस्प्लेटिन की सीलिंग कीमत 7.26 से बढ़ाकर 10.89 रुपये प्रति मिलीलीटर और कार्बोप्लाटिन की 60.49 से बढ़ाकर 90.74 रुपये प्रति मिलीलीटर की थी। जबकि यही दवाएं बाजार में इससे चार गुना ज्यादा कीमत पर मिल रही हैं।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -
इसलिए नहीं होती बड़े अस्पतालों पर कार्रवाई
एनपीपीए की सीलिंग कीमत और किसी दवा की खरीद कीमत एक ही चीज नहीं होती। अस्पताल किसी दवा को उसकी निर्धारित अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) तक बेच सकता है, लेकिन एमआरपी से अधिक वसूली नियमों के दायरे में आती है। चूंकि दवा की वास्तविक लागत से कई गुना अधिक एमआरपी दवाओं पर दर्ज होती है इसलिए अस्पताल भी खरीद कीमत से कई गुना महंगे दाम में दवा को बेचते हैं। हाल ही में खाद्य एवं औषधि नियंत्रण विभाग की एक निजी अस्पताल में जांच के दौरान कैंसर की दवाओं की खरीद कीमत और एमआरपी में 200 गुना तक का अंतर सामने आया। ऐसे में अस्पतालों की फार्मेसी और मरीजों को दिए जा रहे बिलों की जांच जरूरी हो जाती है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
वर्जन
पहले बड़े सुपर स्पेशलिटी और कॉर्पोरेट घराने वाले अस्पतालों को जांच के दायरे में लिया गया है। इसके बाद छोटे अस्पतालों की फार्मेसी की भी जांच होगी। जहां दवाओं की खरीद कीमत और एमआरपी में ज्यादा अंतर मिलते हैं, वहां दवा कंपनियों को नोटिस भेजे जाते हैं।
- उमेश भारती, औषधि निरीक्षक
विज्ञापन
गठिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाला इंजेक्शन थोक बाजार में 10 हजार, अस्पताल में 28 हजार का
अमर उजाला पड़ताल
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। अस्पताल में मरीज के इलाज के साथ ही बिल का मीटर भी तेजी से चलता है। दवा, इंजेक्शन और छोटे-छोटे चिकित्सकीय उपकरणों के नाम पर ऐसा अंतर सामने आया है, जिसे देखकर मरीज के तीमारदार भी चौंक जाएं। पड़ताल में एक ही सामान के तीन अलग-अलग दाम सामने आए। अस्पताल में जिस ग्लूकोज की बोतल के लिए 100 रुपये वसूले जा रहे हैं, वह मेडिकल स्टोर पर करीब 70 रुपये और थोक बाजार में करीब 10 रुपये में उपलब्ध है।
यह अंतर सिर्फ ग्लूकोज तक सीमित नहीं है। आईवी सेट, कैनुला, यूरिन कैथेटर, यूरो बैग और खाने की नली जैसी रोजमर्रा की जरूरत वाली सामग्री अस्पताल में कई गुना कीमत पर पहुंच रही है। पड़ताल में अस्पताल से बाहर निकलकर निजी मेडिकल स्टोर पर दाम पूछे गए तो कई सामानों पर 20 से 30 प्रतिशत तक का अंतर मिला। थोक बाजार में पहुंचने पर यही अंतर और बढ़ गया। अस्पताल में 120 रुपये का आईवी सेट बाजार में करीब 12 रुपये का बताया गया। 8-10 रुपये की कैनुला के लिए अस्पताल में 120 रुपये तक लिए जा रहे हैं। यूरो बैग और ब्लड सेट जैसे सामानों में भी यही तस्वीर सामने आई। महंगी दवाओं में अंतर और बड़ा है। गठिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाला गोलिमुमैब इंजेक्शन कांठ रोड और दिल्ली रोड स्थित अस्पतालों में करीब 28 हजार रुपये का बताया गया, जबकि कंजरी सराय के थोक बाजार में इसकी कीमत करीब आठ से 10 हजार रुपये बताई गई। इंटासेप्ट इंजेक्शन भी अस्पताल में करीब 10 हजार रुपये और बाजार में करीब तीन हजार रुपये का बताया गया। गंभीर लिवर रोगियों के उपचार में इस्तेमाल होने वाले एल्बुमिन इंजेक्शन की कीमत में भी बड़ा अंतर सामने आया।
विज्ञापन
इस तरह होता है आपके साथ खेल
दवा/उपकरण - असली कीमत - अस्पतालों में कीमत
आईवी सेट - 12 रुपये - 120 रुपये
कैनुला - 8-10 रुपये - 120 रुपये
यूरीन कैथेटर - 40 रुपये - 250 रुपये
यूरो बैग - 40 रुपये - 260 रुपये
बच्चों का ड्रिप सेट - 45 रुपये - 250 रुपये
ब्लड सेट - 20 रुपये - 220 रुपये
खाने की नली - 18-20 रुपये - 120 रुपये
सरकारी आंकड़े भी दिखा रहे कीमतों का खेल
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) की 25 मार्च 2026 की अधिसूचना में सेफ्ट्रियाक्सोन 500 एमजी इंजेक्शन की सीलिंग कीमत 51.49 रुपये प्रति वायल और 1000 एमजी की 63.88 रुपये तय की गई थी। सेफ्यूरोक्सिम 1500 एमजी इंजेक्शन की कीमत 346.90 रुपये प्रति वायल निर्धारित थी। कैंसर की दवाओं में भी कीमतें सरकार की निगरानी में हैं। जून 2026 में एनपीपीए ने सिस्प्लेटिन की सीलिंग कीमत 7.26 से बढ़ाकर 10.89 रुपये प्रति मिलीलीटर और कार्बोप्लाटिन की 60.49 से बढ़ाकर 90.74 रुपये प्रति मिलीलीटर की थी। जबकि यही दवाएं बाजार में इससे चार गुना ज्यादा कीमत पर मिल रही हैं।
विज्ञापन
इसलिए नहीं होती बड़े अस्पतालों पर कार्रवाई
एनपीपीए की सीलिंग कीमत और किसी दवा की खरीद कीमत एक ही चीज नहीं होती। अस्पताल किसी दवा को उसकी निर्धारित अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) तक बेच सकता है, लेकिन एमआरपी से अधिक वसूली नियमों के दायरे में आती है। चूंकि दवा की वास्तविक लागत से कई गुना अधिक एमआरपी दवाओं पर दर्ज होती है इसलिए अस्पताल भी खरीद कीमत से कई गुना महंगे दाम में दवा को बेचते हैं। हाल ही में खाद्य एवं औषधि नियंत्रण विभाग की एक निजी अस्पताल में जांच के दौरान कैंसर की दवाओं की खरीद कीमत और एमआरपी में 200 गुना तक का अंतर सामने आया। ऐसे में अस्पतालों की फार्मेसी और मरीजों को दिए जा रहे बिलों की जांच जरूरी हो जाती है।
वर्जन
पहले बड़े सुपर स्पेशलिटी और कॉर्पोरेट घराने वाले अस्पतालों को जांच के दायरे में लिया गया है। इसके बाद छोटे अस्पतालों की फार्मेसी की भी जांच होगी। जहां दवाओं की खरीद कीमत और एमआरपी में ज्यादा अंतर मिलते हैं, वहां दवा कंपनियों को नोटिस भेजे जाते हैं।
- उमेश भारती, औषधि निरीक्षक