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एक ही केंद्र पर होगी बीटीसी की सेमेस्टर परीक्षा
मुरादाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 23 Nov 2017 12:43 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में बीटीसी प्रशिक्षण 2015 के प्रथम सेमेस्टर (अवशेष व अनुत्तीर्ण) और द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा चार से नौ दिसंबर तक कराई जाएंगी। इसके लिए दूसरे जनपदों के विद्यार्थियों को उन्हीं के जिलों में परीक्षा कराने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन मुरादाबाद डायट के सभी विद्यार्थियों के लिए जिले में ही एक केंद्र बनाया गया है।
प्राचार्य का कहना है कि अलग-अलग जिलों के नाम से प्रवेश न होने के कारण ऐसा किया गया है।जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान कांठ में मुरादाबाद के अलावा सम्भल में डायट न होने के कारण वहां के छात्रों को भी यहीं प्रशिक्षण दिया जाता है।
बताया जाता है कि सम्भल और मुरादाबाद के सौ-सौ छात्र यहां पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन प्रवेश के समय उनके जिले अंकित नहीं थे। मेरिट सिर्फ दो सौ सीट के लिए बनी थी। इसलिए यहां पर छात्रों को अलग-अलग जिलों का नहीं माना जाता है।
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छात्रों को असुविधा से बचाने का था उद्देय
दो जनपदों के छात्रों की परीक्षा के लिए उनके जिले में परीक्षा केंद्र निर्धारित करने के आदेश थे। इसके तहत परीक्षा केंद्र जनपद मुख्यालय के नजदीक होना चाहिए था, ताकि छात्रों को वहां पहुंचने में असुविधा न हो।
इसके अलावा केंद्र पर कम से कम पांच सौ छात्रों के बैठने की व्यवस्था होनी चाहिए थी। साथ ही डिबार प्राचार्यों के स्थान पर वाह्य परीक्षक नियुक्त करने के निर्देश थे।
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प्राचार्य का कहना है कि अलग-अलग जिलों के नाम से प्रवेश न होने के कारण ऐसा किया गया है।जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान कांठ में मुरादाबाद के अलावा सम्भल में डायट न होने के कारण वहां के छात्रों को भी यहीं प्रशिक्षण दिया जाता है।
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बताया जाता है कि सम्भल और मुरादाबाद के सौ-सौ छात्र यहां पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन प्रवेश के समय उनके जिले अंकित नहीं थे। मेरिट सिर्फ दो सौ सीट के लिए बनी थी। इसलिए यहां पर छात्रों को अलग-अलग जिलों का नहीं माना जाता है।
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छात्रों को असुविधा से बचाने का था उद्देय
दो जनपदों के छात्रों की परीक्षा के लिए उनके जिले में परीक्षा केंद्र निर्धारित करने के आदेश थे। इसके तहत परीक्षा केंद्र जनपद मुख्यालय के नजदीक होना चाहिए था, ताकि छात्रों को वहां पहुंचने में असुविधा न हो।
इसके अलावा केंद्र पर कम से कम पांच सौ छात्रों के बैठने की व्यवस्था होनी चाहिए थी। साथ ही डिबार प्राचार्यों के स्थान पर वाह्य परीक्षक नियुक्त करने के निर्देश थे।