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Moradabad News: दूसरों की जान बचाने को दिया खून...जांच में खुद के बीमार होने का पता चला
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मुरादाबाद। पिछले दिनों जिला अस्पताल में भर्ती मरीज को खून की जरूरत थी। इस पर एक व्यक्ति ने अपना खून देकर अस्पताल से मरीज को चढ़ाने के लिए खून ले लिया।
जब ब्लड बैंक में उस खून की जांच की गई तो पता चला कि उस व्यक्ति को मलेरिया की शिकायत है। जब चिकित्सकों ने इसकी जानकारी देते हुए उसे बुखार आने के बारे में पूछा तो युवक ने 20 दिन पहले बीमार होने की जानकारी दी। इसके बाद युवक ने अपना उपचार शुरू करवाया।
चिकित्सकों का कहना है कि सिर्फ मलेरिया ही नहीं, बल्कि एचआईवी और हेपेटाइटिस तक के केस जांच के बाद सामने आए हैं। चिकित्सा अधीक्षक ने स्वस्थ व्यक्ति को भी हर छह महीने पर अपनी जांच करवाने के लिए कहा है। पिछले महीने जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में और शिविरों के माध्यम से 688 व्यक्तियों ने रक्तदान किया था। इसमें जब खून की जांच की गई तो हेपेटाइटिस बी के पांच मरीज और हेपेटाइटिस सी के छह केस सामने आए। इनमें अधिकांश की उम्र 40 से 45 साल के बीच है।
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इसमें एक 42 वर्षीय व्यक्ति कांठ के निवासी हैं तो दूसरे व्यक्ति बिलारी के रहने वाले हैं। दोनों ही व्यक्तियों ने शिविरों में रक्तदान किया था। चिकित्सकों के अनुसार इससे पहले एक एचआईवी का भी केस मिला था। रिपोर्ट मिलने के बाद अस्पताल से व्यक्तियों को फोन कर उन्हें बीमारी की जानकारी दी गई और उनकी काउंसिलिंग कर उपचार शुरू करवाने की सलाह भी दी। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि रक्तदान शिविरों में खून लेने के बाद उसकी जांच की जाती है। ब्यूरो
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जब ब्लड बैंक में उस खून की जांच की गई तो पता चला कि उस व्यक्ति को मलेरिया की शिकायत है। जब चिकित्सकों ने इसकी जानकारी देते हुए उसे बुखार आने के बारे में पूछा तो युवक ने 20 दिन पहले बीमार होने की जानकारी दी। इसके बाद युवक ने अपना उपचार शुरू करवाया।
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चिकित्सकों का कहना है कि सिर्फ मलेरिया ही नहीं, बल्कि एचआईवी और हेपेटाइटिस तक के केस जांच के बाद सामने आए हैं। चिकित्सा अधीक्षक ने स्वस्थ व्यक्ति को भी हर छह महीने पर अपनी जांच करवाने के लिए कहा है। पिछले महीने जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में और शिविरों के माध्यम से 688 व्यक्तियों ने रक्तदान किया था। इसमें जब खून की जांच की गई तो हेपेटाइटिस बी के पांच मरीज और हेपेटाइटिस सी के छह केस सामने आए। इनमें अधिकांश की उम्र 40 से 45 साल के बीच है।
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इसमें एक 42 वर्षीय व्यक्ति कांठ के निवासी हैं तो दूसरे व्यक्ति बिलारी के रहने वाले हैं। दोनों ही व्यक्तियों ने शिविरों में रक्तदान किया था। चिकित्सकों के अनुसार इससे पहले एक एचआईवी का भी केस मिला था। रिपोर्ट मिलने के बाद अस्पताल से व्यक्तियों को फोन कर उन्हें बीमारी की जानकारी दी गई और उनकी काउंसिलिंग कर उपचार शुरू करवाने की सलाह भी दी। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि रक्तदान शिविरों में खून लेने के बाद उसकी जांच की जाती है। ब्यूरो