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Moradabad: जिला जेल के बंदी की मौत, परिवार ने लगाया इलाज में लापरवाही का आरोप, चार साल से बंद था भीमा
Tue, 30 Apr 2024 05:11 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
Published by: मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 30 Apr 2024 05:11 AM IST
सार
मुरादाबाद के जिला जेल में बंद भीमा की मौत हो गई। वह चार साल से बंद था। परिजनों ने उसके उपचार में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए।
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कैदी के मौत के बाद रोते परिजन
- फोटो : संवाद
विस्तार
गैर इरादतन हत्या के आरोप में जेल में बंदी की मौत हो गई। सूचना मिलने पर पहुंचे परिजनों ने जेल प्रशासन पर इलाज कराने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हार्ट अटैक से मौत होने की पुष्टि हुई है।
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जेल प्रशासन का कहना है कि दो साल से बंदी कर इलाज चल रहा था। बिलारी के अब्दुल्ला गंज निवासी भीमा (32) को चार साल पहले उसे जेल भेजा दिया था। तब लेखराज नाम के व्यक्ति से उसका विवाद हो गया था।
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आरोप है कि इस दौरान भीमा ने उन्हें धक्का दे दिया था। लेखराज को गंभीर चोटें आई थीं। 12 दिन बाद उसकी मौत हाे गई थी। भीमा को हार्ट की बीमारी थी। उसके दिल में स्टंट पड़ा हुआ था। दो साल से उसका इलाज चल रहा था।
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छह माह तक वह मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती रहा था। जेल प्रशासन ने सरकारी खर्चे पर भीमा के दिल में दोबारा स्टंट डलवाए थे। कुछ दिन पहले ही वह मेरठ मेडिकल कॉलेज से वापस जेल आया था। यहां आकर भी उसे जेल अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
रविवार रात उसकी हालत बिगड़ी तो उसे जिला अस्पताल भेज दिया गया था। जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। भीमा की पत्नी बबीता और भाई ने बताया कि उन्हें बिना बताए ही भीमा को जेल प्रशासन ने मेरठ मेडिकल कॉलेज से वापस जेल बुलवा लिया था।
जेल प्रशासन ने दवा खिलाने में लापरवाही की है। इसलिए भीमा की मौत हुई है। मोर्चरी पर भीमा के परिजन हंगामा करने लगे। इसकी सूचना मिलने पर सिविल लाइंस थाने से पुलिस पहुंच गई और परिजनों को समझाकर शांत किया गया। इसके बाद पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।
बंदी भीमा हार्ट का मरीज था। वह चार साल से जेल में बंद था। दो साल से उसका जेल प्रशासन द्वारा ही इलाज कराया जा रहा था। छह तक वह मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती रहा था। भीमा के इलाज में जेल से तीन लाख से अधिक की धनराशि खर्च हो चुकी है। इलाज कराने में कोई लापरवाही नहीं की गई है। उसकी मौत से हम भी दुखी हैं। हमारी संवेदनाएं भीमा के परिवार के साथ हैं। -पीपी सिंह, वरिष्ठ जेल अधीक्षक, जिला कारागार मुरादाबाद