{"_id":"57d648454f1c1b932cd472d6","slug":"crack-on-the-railway-track","type":"story","status":"publish","title_hn":"200 किमी के ट्रैक पर क्रेक ही क्रेक ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
200 किमी के ट्रैक पर क्रेक ही क्रेक
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Mon, 12 Sep 2016 11:47 AM IST
विज्ञापन
रेलवे
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रेलवे के सफर को सुरक्षित बनाने के लिए ट्रैक की सेहत पर विशेष रूप से ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए उसकी हर स्तर पर जांच कराकर बीमारियों को दूर करने पर काम हो रहा है। ट्रैक में कोई भी खामी छिपी न रह जाए और उसके चलते दुर्घटना हो उससे पहले गहनता से जांच के लिए अल्ट्रासोनिक ट्रैक फ्लो डिटेक्टर मशीन से अल्ट्रासाउंड कर रहे हैं। अल्ट्रासाउंड में मंडल का करीब दो किमी का एरिया बीमार निकला है। रेलवे बोर्ड के निर्देश पर ट्रैक मेंटीनैंस पखवाड़ा चलाया जा रहा है।
ट्रैक ट्रेन संचालन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। ट्रैक में छोटी से खराबी सैकड़ों यात्रियों की जान खतरे में डाल सकती है। ट्रैक दुरुस्त करने के लिए उसकी जांच भी बेहद जरूरी है। पुराने सिस्टम के अनुसार गैंगमैन और ट्रैकमैन लगातार पटरियों की निगरानी करते हैं।
प्रतिदिन एक निर्धारित एरिया में वे पेट्रोलिंग कर उसकी खामियों को दूर करते हैं। लेकिन यह सब बाहर से दिखाई देने वाली कमी को दूर कर पाते हैं। ट्र्रैक के अंदर की कमी को दूर कर पाना बेहद मुश्किल है। ऐेसे में तकनीकी का भी प्रयोग बढ़ा है। जिसके तहत ट्रैक के अंदर किसी प्रकार फ्रैक्चर, गलन या लोहे की संगठनात्मक स्थिति में खराबी का पता करने के लिए अल्ट्रासोनिक ट्रैक फ्लो डिटेक्टर मशीन लगाई जाती है।
विज्ञापन
जो ट्रैक का अल्ट्रासाउंड कर उसके अंदर की खामी को निकालती है। इस मशीन से किए गए सर्वे में मंडल की दिल्ली लखनऊ, सहारनपुर लखनऊ लाइन के अलावा सभी ब्रांच लाइनों में करीब 200 किमी का एरिया में खराबी है। इसमें कई जगह ट्रैक को बदलने की जरूरत है तो कहीं कही खराब हिस्से को काटकर दूसरा लगाया जा सकता है। जर्जर होने के कारण वहां से ट्रेनों कासन पर गुजारा जा रहा है। वहीं अधिकारियों ने इसके लिए शार्ट और लांग टर्म दो प्लान बनाए हैं। लांग टर्म में जिसमें निश्चित हिस्से का ट्रैक बदलना और शार्ट टर्म में सुधार करना।
जगह जगह ट्रैक को चैक कराया जा रहा है। इसमें सभी अधिकारी लगाए गए हैं। आधुनिक मशीनाें का भी सहारा लिया जा रहा है। कई ट्रैक में खामियां मिली हैं। जिन्हें पहचानकर उन्हें ठीक कराने की प्लानिंग बना ली गई है और काम शुरू कर दिया गया है।
प्रमोद कुमार, डीआरएम
कैसे काम करती है मशीन
मुरादाबाद। मशीन पहिए के सहारे ट्रैक पर चलाई जाती है। उससे निकलने वाली अल्ट्रासोनिक किरणों से ट्रैक के अंदर की स्थिति मशीन में लगे डिस्प्ले पर दिखाई देती है। साथ ही एक ग्राफ बनता जाता है। उससे में होने वाले उतार चढ़ाव से ट्रैक की स्थिति का पता लगता है। खराबी मिलने पर उस स्थान पर लाल निशान लगा देते हैं। इसके बाद सूचना जारी कर दी जाती है। उसे बदलने या फिर ठीक करने के लिए होता है।
अलग अलग स्टेशनों को हुई आवंटित
मुरादाबाद 2
बरेली 2
शाहजहांपुर 2
रुड़की 1
हरिद्वार 2
मुरादाबाद से बरेली के बीच
बरेली से शाहजहांपुर के बीच
सीतापुर लाइन
विज्ञापन
ट्रैक ट्रेन संचालन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। ट्रैक में छोटी से खराबी सैकड़ों यात्रियों की जान खतरे में डाल सकती है। ट्रैक दुरुस्त करने के लिए उसकी जांच भी बेहद जरूरी है। पुराने सिस्टम के अनुसार गैंगमैन और ट्रैकमैन लगातार पटरियों की निगरानी करते हैं।
विज्ञापन
प्रतिदिन एक निर्धारित एरिया में वे पेट्रोलिंग कर उसकी खामियों को दूर करते हैं। लेकिन यह सब बाहर से दिखाई देने वाली कमी को दूर कर पाते हैं। ट्र्रैक के अंदर की कमी को दूर कर पाना बेहद मुश्किल है। ऐेसे में तकनीकी का भी प्रयोग बढ़ा है। जिसके तहत ट्रैक के अंदर किसी प्रकार फ्रैक्चर, गलन या लोहे की संगठनात्मक स्थिति में खराबी का पता करने के लिए अल्ट्रासोनिक ट्रैक फ्लो डिटेक्टर मशीन लगाई जाती है।
विज्ञापन
जो ट्रैक का अल्ट्रासाउंड कर उसके अंदर की खामी को निकालती है। इस मशीन से किए गए सर्वे में मंडल की दिल्ली लखनऊ, सहारनपुर लखनऊ लाइन के अलावा सभी ब्रांच लाइनों में करीब 200 किमी का एरिया में खराबी है। इसमें कई जगह ट्रैक को बदलने की जरूरत है तो कहीं कही खराब हिस्से को काटकर दूसरा लगाया जा सकता है। जर्जर होने के कारण वहां से ट्रेनों कासन पर गुजारा जा रहा है। वहीं अधिकारियों ने इसके लिए शार्ट और लांग टर्म दो प्लान बनाए हैं। लांग टर्म में जिसमें निश्चित हिस्से का ट्रैक बदलना और शार्ट टर्म में सुधार करना।
जगह जगह ट्रैक को चैक कराया जा रहा है। इसमें सभी अधिकारी लगाए गए हैं। आधुनिक मशीनाें का भी सहारा लिया जा रहा है। कई ट्रैक में खामियां मिली हैं। जिन्हें पहचानकर उन्हें ठीक कराने की प्लानिंग बना ली गई है और काम शुरू कर दिया गया है।
प्रमोद कुमार, डीआरएम
कैसे काम करती है मशीन
मुरादाबाद। मशीन पहिए के सहारे ट्रैक पर चलाई जाती है। उससे निकलने वाली अल्ट्रासोनिक किरणों से ट्रैक के अंदर की स्थिति मशीन में लगे डिस्प्ले पर दिखाई देती है। साथ ही एक ग्राफ बनता जाता है। उससे में होने वाले उतार चढ़ाव से ट्रैक की स्थिति का पता लगता है। खराबी मिलने पर उस स्थान पर लाल निशान लगा देते हैं। इसके बाद सूचना जारी कर दी जाती है। उसे बदलने या फिर ठीक करने के लिए होता है।
अलग अलग स्टेशनों को हुई आवंटित
मुरादाबाद 2
बरेली 2
शाहजहांपुर 2
रुड़की 1
हरिद्वार 2
मुरादाबाद से बरेली के बीच
बरेली से शाहजहांपुर के बीच
सीतापुर लाइन