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विधायकी रद्द होने के फैसले को अब्दुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, पूर्व मंत्री ने उठाई ये मांग
Wed, 18 Dec 2019 11:14 AM IST
शाहरुख खान
ब्यूरो, अमर उजाला, मुरादाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला, मुरादाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 18 Dec 2019 11:14 AM IST
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विधानसभा का चुनाव रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अब्दुल्ला आजम सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। अब्दुल्ला ने मंगलवार की रात नई दिल्ली से दूरभाष पर इस बात की जानकारी दी कि उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
अब्दुल्ला 2017 के विधानसभा के चुनाव में स्वार से सपा की टिकट पर चुनाव जीते थे। उनके मुकाबले बसपा से चुनाव लड़ने वाले नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने हाईकोर्ट में चुनावी याचिका दाखिल कर कहा था कि नामांकन के वक्त अब्दुल्ला की उम्र 25 साल से कम थी।
इस मामले में सोमवार को हाईकोर्ट ने अब्दुल्ला आजम के निर्वाचन को रद्द कर दिया था। अब्दुल्ला आजम ने बताया कि हाईकोर्ट के फैसले का वह पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन इससे वह संतुष्ट नहीं हैं। इसलिए उन्होंने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है।
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उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में अपील करना मेरा संवैधानिक अधिकार है और मैं इसका इस्तेमाल करूंगा। अब्दुल्ला ने कहा कि वह हाईकोर्ट के फैसले पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं।
विरोधियों द्वारा उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगाए की मांग करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसी मांग करने वाले सिर्फ बयान ही जारी कर सकते हैं, अगर इनमें से किसी की जनता में पकड़ है तो चुनाव लड़कर देख लें।
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अब्दुल्ला 2017 के विधानसभा के चुनाव में स्वार से सपा की टिकट पर चुनाव जीते थे। उनके मुकाबले बसपा से चुनाव लड़ने वाले नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने हाईकोर्ट में चुनावी याचिका दाखिल कर कहा था कि नामांकन के वक्त अब्दुल्ला की उम्र 25 साल से कम थी।
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इस मामले में सोमवार को हाईकोर्ट ने अब्दुल्ला आजम के निर्वाचन को रद्द कर दिया था। अब्दुल्ला आजम ने बताया कि हाईकोर्ट के फैसले का वह पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन इससे वह संतुष्ट नहीं हैं। इसलिए उन्होंने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है।
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उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में अपील करना मेरा संवैधानिक अधिकार है और मैं इसका इस्तेमाल करूंगा। अब्दुल्ला ने कहा कि वह हाईकोर्ट के फैसले पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं।
विरोधियों द्वारा उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगाए की मांग करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसी मांग करने वाले सिर्फ बयान ही जारी कर सकते हैं, अगर इनमें से किसी की जनता में पकड़ है तो चुनाव लड़कर देख लें।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद मंगलवार को पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा और उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार शुक्ला को पत्र भेजकर स्वार-टांडा से विधायक रहे अब्दुल्ला आजम के चुनाव लड़ने पर दस साल का प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है। इसके साथ ही वेतन-भत्तों, सुविधाओं पर व्यय की वसूली और विधायक निधि की रिकवरी की मांग भी की है।
पूर्व मंत्री के पीआरओ काशिफ खां ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग को हाईकोर्ट के फैसले की प्रतियां भेज दी गई हैं। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता नवेद मियां ने दोनों आयोगों को पत्र भी भेजकर हाईकोर्ट के निर्णय के संदर्भ में अगली कार्यवाई की मांग की है।
नवेद मियां ने मांग की है कि कूटरचित फर्जी जन्म प्रमाण पत्र में अधिक आयु दर्शाकर चुनाव लड़ने के अपराध में अब्दुल्ला आजम पर अगले दस वर्षों तक चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जाए। 15 फरवरी 2017 से 16 दिसंबर 2019 तक अब्दुल्ला द्वारा लिए गए वेतन-भत्तों और अन्य सुविधाओं पर व्यय धनराशि की वसूली राजस्व वसूली की तरह की जाए।
पूर्व मंत्री के पीआरओ काशिफ खां ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग को हाईकोर्ट के फैसले की प्रतियां भेज दी गई हैं। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता नवेद मियां ने दोनों आयोगों को पत्र भी भेजकर हाईकोर्ट के निर्णय के संदर्भ में अगली कार्यवाई की मांग की है।
नवेद मियां ने मांग की है कि कूटरचित फर्जी जन्म प्रमाण पत्र में अधिक आयु दर्शाकर चुनाव लड़ने के अपराध में अब्दुल्ला आजम पर अगले दस वर्षों तक चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जाए। 15 फरवरी 2017 से 16 दिसंबर 2019 तक अब्दुल्ला द्वारा लिए गए वेतन-भत्तों और अन्य सुविधाओं पर व्यय धनराशि की वसूली राजस्व वसूली की तरह की जाए।
उन्होंने यह भी मांग की है कि 2017 से 2019 के मध्य अब्दुल्ला द्वारा जितनी भी धनराशि विधायक निधि के रूप में प्राप्त की है उसे दुरुपयोग की श्रेणी में मानते हुए रिकवरी की जाये। इसके साथ ही उन्होंने कार्रवाई को लेकर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा का उदाहरण भी दिया है।
जिसमें कहा है कि 2017 में निर्वाचन व्यय कम दर्शाने पर भारत निर्वाचन आयोग ने उनके चुनाव लड़ने पर तीन साल का प्रतिबंध लगाया था। जबकि, अब्दुल्ला ने तो फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ा है। इसलिए दस साल का प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
जिसमें कहा है कि 2017 में निर्वाचन व्यय कम दर्शाने पर भारत निर्वाचन आयोग ने उनके चुनाव लड़ने पर तीन साल का प्रतिबंध लगाया था। जबकि, अब्दुल्ला ने तो फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ा है। इसलिए दस साल का प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।