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अल्पसंख्यक बस्तियों में बनेंगे सदभावना भवन
Updated Sat, 07 Jul 2018 03:08 AM IST
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मुरादाबाद। अल्पसंख्यकों को शादी विवाह व अन्य आयोजन अब खुले में करने की जरूरत नहीं है। शासन ने इनकी बस्तियों में सद्भावना के नाम से सरकारी भवन बनवाने का निर्णय लिया है। एक सप्ताह में इसके लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं। जिन बस्तियों में अल्पसंख्यकों की आबादी 25 फीसदी से ज्यादा है, वहां से इसके लिए आवेदन किया जा सकता है।
अल्पसंख्यक बस्तियों में अस्पताल और स्कूल बनवाने का आदेश देने के बाद सद्भावना भवन बनाने की तैयारी है। इसके लिए सभी जिलों के अल्पसंख्यक अधिकारियों की बैठक लखनऊ में संपन्न हो गई है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी अंजना सिरोही ने बताया कि अल्पसंख्यकों को शादी-विवाह करने में स्थान की परेशानी आती है। बड़े आयोजन या तो खुले मैदानों में करने पड़ते हैं, या फिर महंगे होटल-मैरिज होम करने पड़ते हैं।
सरकार ने अब इनकी बस्तियों में सद्भावना भवन बनवाने का निर्णय लिया है। भवन निर्माण के लिए उक्त कालोनी या बस्ती में 25 फीसदी अल्पसंख्यक आबादी का होना जरूरी है। वह अपना प्रस्ताव तैयार कर दे सकते हैं। इसके लिए निकाय या अन्य सरकारी विभाग भी सद्भावना भवन का प्रस्ताव कर सकते हैं। भवन निर्माण के लिए जमीन की निशुल्क व्यवस्था संबंधित निकाय को करनी होगी। इसके लिए एक सप्ताह में प्रस्ताव देने होंगे। नगर निकायों के साथ ही ग्राम विकास विभाग व जिला पंचायती राज विभाग को इसका प्रस्ताव भेज दिया गया है।
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अल्पसंख्यक बस्तियों में अस्पताल और स्कूल बनवाने का आदेश देने के बाद सद्भावना भवन बनाने की तैयारी है। इसके लिए सभी जिलों के अल्पसंख्यक अधिकारियों की बैठक लखनऊ में संपन्न हो गई है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी अंजना सिरोही ने बताया कि अल्पसंख्यकों को शादी-विवाह करने में स्थान की परेशानी आती है। बड़े आयोजन या तो खुले मैदानों में करने पड़ते हैं, या फिर महंगे होटल-मैरिज होम करने पड़ते हैं।
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सरकार ने अब इनकी बस्तियों में सद्भावना भवन बनवाने का निर्णय लिया है। भवन निर्माण के लिए उक्त कालोनी या बस्ती में 25 फीसदी अल्पसंख्यक आबादी का होना जरूरी है। वह अपना प्रस्ताव तैयार कर दे सकते हैं। इसके लिए निकाय या अन्य सरकारी विभाग भी सद्भावना भवन का प्रस्ताव कर सकते हैं। भवन निर्माण के लिए जमीन की निशुल्क व्यवस्था संबंधित निकाय को करनी होगी। इसके लिए एक सप्ताह में प्रस्ताव देने होंगे। नगर निकायों के साथ ही ग्राम विकास विभाग व जिला पंचायती राज विभाग को इसका प्रस्ताव भेज दिया गया है।
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